CAQM ने Delhi NCR में मालवाहक वाहनों पर रोक लगाई, 2027 से लागू होंगे नियम
दिल्ली और एनसीआर के उच्च वाहन घनत्व (एचवीडी) वाले जिलों में 2027 से माल ढुलाई के लिए केवल एन1 श्रेणी (3500 किलोग्राम से कम वजन) के हल्के इलेक्ट्रिक वाहनों को पंजीकृत करने की अनुमति होगी और 2028 में इस नियम के दायरे में एनसीआर के अन्य सभी जिले लाए जाएंगे। यह जानकारी सीएक्यूएम के सदस्य सचिव तन्मय कुमार पिथोडे ने बृहस्पतिवार को दी। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि एनसीआर के अन्य जिलों में अभी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आधारभूत संरचना स्थापित किया जाना बाकी है।
पिथोडे का यह बयान तब आया जब ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने बुधवार को दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण कम करने की कोशिशों के तहत सीएनजी, पेट्रोल और डीजल से चलने वाले हल्के वाणिज्यिक वाहनों (एलजीबी)के पंजीकरण पर चरणबद्ध तरीके से रोक लगाने की योजना को मंजूरी दी है। दिल्ली और एनसीआर के उच्च वाहन घनत्व वाले जिलों में 3,500 किलोग्राम से अधिक और 7,500 किलोग्राम तक वजन वाले एलजीबी एन-2 श्रेणी के लिए पाबंदियां 2028 से लागू होंगी। उच्च वाहन घनत्व वाले जिलों में गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर शामिल है।
हालांकि, एनसीआर के बाकी सभी ज़िलों में सीएनजी, पेट्रोल और डीज़ल से चलने वाले एन-2 श्रेणी के हल्के मालवाहक वाहनों के पंजीकरण पर रोक 2029 से लागू होगी।
Gujarat शराब त्रासदी: Congress ने उप मुख्यमंत्री से मांगा इस्तीफा, SIT जांच की मांग
गुजरात में विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को भावनगर में जहरीली शराब त्रासदी को लेकर बृहस्पतिवार को उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी से इस्तीफे की मांग की और आरोप लगाया कि राज्य में शराबबंदी केवल कागजों में सीमित है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने इस पूरे मामले की जांच उच्च न्यायालय के एक मौजूदा न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने की भी मांग की। पुलिस ने बताया कि भावनगर जिले में ज़हरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या बृहस्पतिवार को बढ़कर आठ हो गई, जबकि 39 अन्य लोग अस्पतालों में उपचाराधीन हैं।
चावड़ा ने यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)सरकार के तहत भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के कारण गुजरात में अवैध शराब और मादक पदार्थों का कारोबार फल-फूल रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘गुजरात का शराबबंदी कानून केवल कागजों पर सीमित है। अगर सरकार ईमानदारी से इस कानून को लागू करे और भ्रष्टाचार व जबरन वसूली रोके, तो राज्य में शराब की एक बूंद भी नहीं मिलनी चाहिए।’’ कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि गत सालों में जहरीली शराब पीने की बार-बार हुई घटनाओं के बावजूद भाजपा सरकार अवैध शराब के कारोबार का कोई स्थायी समाधान तलाश करने में नाकाम रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस समस्या के लिए भाजपा सरकार का ‘‘भ्रष्टाचार और जबरन वसूली’’ जिम्मेदार है। चावड़ा ने कहा कि सरकार केवल स्थानीय स्तर पर पुलिसकर्मियों या अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करके बार-बार होने वाली जहरीली शराब की त्रासदियों की जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस अधीक्षक, रेंज पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस महानिदेशक और आखिरकार राज्य के गृहमंत्री (हर्ष संघवी) की भी ज़िम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
गृह मंत्री को जनता के सामने आना चाहिए, शराबबंदी लागू करने में नाकामी की ज़िम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए।’’ चावड़ा ने कहा कि राज्य के गृह मंत्री की मुख्य ज़िम्मेदारी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब लोग मर रहे थे, तब संघवी दूसरे कार्यक्रमों में शामिल होने, गरबा खेलने और रील्स बनाने में व्यस्त थे। चावड़ा ने मांग की कि भावनगर जहरीली शराब त्रासदी की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए गुजरात उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में एक एसआईटी गठित की जाए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जांच के दायरे में पूरी कड़ी शामिल होनी चाहिए, जिसमें नकली शराब बनाने और आपूर्ति करने वाले, मेथनॉल आपूर्ति करने वाले और इसमें शामिल गैर-कानूनी नेटवर्क के साथ-साथ उन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए, जिन्होंने कथित तौर पर कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को भावनगर के प्रभावित इलाकों का दौरा करेगा ताकि घटना की मौके पर जाकर जांच की जा सके और उस पर एक रिपोर्ट तैयार की जा सके। चावड़ा ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष और विधायक जिग्नेश मेवाणी, पूर्व विधायक राजेश गोहिल, प्रदेश उपाध्यक्ष हेमांग वासवदा और प्रदेश महासचिव हरिभाई भरवाड समेत अन्य शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस अगले महीने राज्य विधानसभा के मॉनसून सत्र में भी यह मुद्दा उठाएगी और सरकार को जवाबदेह ठहराएगी।
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