Gujarat शराब त्रासदी: Congress ने उप मुख्यमंत्री से मांगा इस्तीफा, SIT जांच की मांग
गुजरात में विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को भावनगर में जहरीली शराब त्रासदी को लेकर बृहस्पतिवार को उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी से इस्तीफे की मांग की और आरोप लगाया कि राज्य में शराबबंदी केवल कागजों में सीमित है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने इस पूरे मामले की जांच उच्च न्यायालय के एक मौजूदा न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने की भी मांग की। पुलिस ने बताया कि भावनगर जिले में ज़हरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या बृहस्पतिवार को बढ़कर आठ हो गई, जबकि 39 अन्य लोग अस्पतालों में उपचाराधीन हैं।
चावड़ा ने यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)सरकार के तहत भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के कारण गुजरात में अवैध शराब और मादक पदार्थों का कारोबार फल-फूल रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘गुजरात का शराबबंदी कानून केवल कागजों पर सीमित है। अगर सरकार ईमानदारी से इस कानून को लागू करे और भ्रष्टाचार व जबरन वसूली रोके, तो राज्य में शराब की एक बूंद भी नहीं मिलनी चाहिए।’’ कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि गत सालों में जहरीली शराब पीने की बार-बार हुई घटनाओं के बावजूद भाजपा सरकार अवैध शराब के कारोबार का कोई स्थायी समाधान तलाश करने में नाकाम रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस समस्या के लिए भाजपा सरकार का ‘‘भ्रष्टाचार और जबरन वसूली’’ जिम्मेदार है। चावड़ा ने कहा कि सरकार केवल स्थानीय स्तर पर पुलिसकर्मियों या अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करके बार-बार होने वाली जहरीली शराब की त्रासदियों की जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस अधीक्षक, रेंज पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस महानिदेशक और आखिरकार राज्य के गृहमंत्री (हर्ष संघवी) की भी ज़िम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
गृह मंत्री को जनता के सामने आना चाहिए, शराबबंदी लागू करने में नाकामी की ज़िम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए।’’ चावड़ा ने कहा कि राज्य के गृह मंत्री की मुख्य ज़िम्मेदारी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब लोग मर रहे थे, तब संघवी दूसरे कार्यक्रमों में शामिल होने, गरबा खेलने और रील्स बनाने में व्यस्त थे। चावड़ा ने मांग की कि भावनगर जहरीली शराब त्रासदी की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए गुजरात उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में एक एसआईटी गठित की जाए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जांच के दायरे में पूरी कड़ी शामिल होनी चाहिए, जिसमें नकली शराब बनाने और आपूर्ति करने वाले, मेथनॉल आपूर्ति करने वाले और इसमें शामिल गैर-कानूनी नेटवर्क के साथ-साथ उन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए, जिन्होंने कथित तौर पर कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को भावनगर के प्रभावित इलाकों का दौरा करेगा ताकि घटना की मौके पर जाकर जांच की जा सके और उस पर एक रिपोर्ट तैयार की जा सके। चावड़ा ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष और विधायक जिग्नेश मेवाणी, पूर्व विधायक राजेश गोहिल, प्रदेश उपाध्यक्ष हेमांग वासवदा और प्रदेश महासचिव हरिभाई भरवाड समेत अन्य शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस अगले महीने राज्य विधानसभा के मॉनसून सत्र में भी यह मुद्दा उठाएगी और सरकार को जवाबदेह ठहराएगी।
Mahua Moitra गिरफ्तारी वारंट के खिलाफ Calcutta High Court में याचिका देंगी
तृणमूल कांग्रेस की लोकसभा सदस्य महुआ मोइत्रा ने बृहस्पतिवार को कहा कि कथित रूप से नफरत फैलाने वाले भाषण के मामले में उनके खिलाफ पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर की एक अदालत द्वारा जारी किये गये गिरफ्तारी वारंट को वह कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती देंगी। मोइत्रा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि यह वारंट ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ की धारा 228 के तहत उनके द्वारा दायर की गयी छूट की अर्ज़ी पर फ़ैसला किए बिना’ जारी किया गया। इस धारा के तहत आरोपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट मांगने और वकील के ज़रिए अपना पक्ष रखने की अनुमति मिलती है।
कृष्णानगर की तृतीय अदालत के न्यायिक मजिस्ट्रेट ने बुधवार को सांसद के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। अदालत ने कहा कि बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद वह पेश नहीं हुईं। अदालत ने आदेश दिया कि 28 अगस्त को वारंट के तामील की रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए।
मोइत्रा ने कहा कि अदालत के समन में बताई गई पेशी की पहली दो तारीखों — चार और 12 अगस्त — पर पेश होना मुमकिन नहीं था, क्योंकि न सिर्फ़ वह उन तारीखों पर संसद में मौजूद थीं, बल्कि कृष्णानगर बार एसोसिएशन ने उस अदालत का ‘बहिष्कार कर’ कर रखा था, जिसकी वजह से ‘वहां कोई न्यायिक कामकाज नहीं हो रहा था।’ उन्होंने कहा, ‘‘ .... मैं अब इसे चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाऊंगी।’’ अधीनस्थ अदालत मोइत्रा के खिलाफ चैना नंदी और पांच अन्य लोगों की एक अर्ज़ी पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं ने मोइत्रा पर आरोप लगाया कि उन्होंने ‘केंद्रीय गृह मंत्री, भारतीय सशस्त्र बलों के बहादुर जवानों और हिंदू समुदाय के लोगों द्वारा पूजनीय कुछ धार्मिक मान्यताओं और प्रतीकों’ के खिलाफ बयान दिये। शिकायतकर्ताओं ने सांसद पर हिंदुओं द्वारा पूज्य एवं सम्मानीय समझी जाने वाली तुलसी माला के खिलाफ आपत्तिजनक एवं अशोभनीय टिप्पणी करने का आरोप लगाया।
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