Gas Burner Cleaning: धीमी हो गई है गैस चूल्हे की आंच? इन तरीकों से करें बर्नर की सफाई, नए जैसी होगी फ्लेम
Gas Burner Cleaning: गैस चूल्हे पर खाना बनाते समय अगर बर्नर की लौ पहले के मुकाबले धीमी हो गई है, तो हर बार गैस की कमी या रेगुलेटर को जिम्मेदार मानना सही नहीं है। कई बार बर्नर के छोटे-छोटे छेद तेल, मसाले, दूध या खाने के जले हुए कणों से बंद हो जाते हैं। इसकी वजह से गैस का फ्लो प्रभावित होता है और लौ नीली व तेज जलने के बजाय कमजोर या असमान दिखाई देने लगती है।
बर्नर की नियमित सफाई न सिर्फ चूल्हे की लौ को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती है, बल्कि किचन की सफाई और खाना पकाने की सुविधा के लिए भी जरूरी है। अच्छी बात यह है कि बर्नर को साफ करने के लिए महंगे क्लीनर की जरूरत नहीं पड़ती। घर में मौजूद कुछ आसान चीजों और सही तरीके से आप जमा गंदगी को हटा सकते हैं।
बर्नर साफ करने के आसान तरीके
सबसे पहले बर्नर को ठंडा होने दें
सफाई शुरू करने से पहले गैस बंद करें और बर्नर को पूरी तरह ठंडा होने दें। अगर चूल्हा हाल ही में इस्तेमाल हुआ है तो तुरंत बर्नर निकालने की कोशिश न करें। गैस की सप्लाई बंद रखना भी जरूरी है। सफाई के दौरान जल्दबाजी करने के बजाय पहले बर्नर को चूल्हे से सावधानीपूर्वक निकालें और अलग रख लें।
सूखी गंदगी को ब्रश से हटाएं
बर्नर पर जमा सूखे मसाले, तेल की परत और जले हुए खाद्य कणों को पहले किसी पुराने मुलायम ब्रश से साफ करें। बर्नर के छोटे छेदों के आसपास जमी गंदगी पर खास ध्यान दें। बहुत ज्यादा जोर लगाकर रगड़ने से बचें, क्योंकि बर्नर की सतह या गैस के छेद को नुकसान पहुंच सकता है।
गुनगुने पानी से करें सफाई
अगर बर्नर पर चिकनाई ज्यादा जम गई है, तो उसे निर्माता के निर्देशों के अनुसार गुनगुने पानी और हल्के डिशवॉशिंग लिक्विड में कुछ समय भिगोया जा सकता है। इससे जमी चिकनाई नरम होने लगती है और उसे साफ करना आसान हो जाता है। बर्नर की सामग्री के अनुसार सफाई का तरीका अलग हो सकता है, इसलिए बहुत तेज रसायनों का इस्तेमाल करने से बचें।
छोटे छेदों की सफाई सावधानी से करें
बर्नर के छोटे-छोटे पोर्ट बंद होने पर लौ असमान हो सकती है। इन्हें साफ करने के लिए मुलायम ब्रश या निर्माता द्वारा सुझाए गए सफाई उपकरण का इस्तेमाल करें। किसी नुकीली धातु की पिन से छेद को बड़ा करने या जोर से कुरेदने से बचें। इससे बर्नर की संरचना और गैस फ्लो प्रभावित हो सकता है।
बर्नर को पूरी तरह सुखाना न भूलें
सफाई के बाद बर्नर को अच्छी तरह धोया गया है तो उसे पूरी तरह सूखने दें। बर्नर में नमी रह जाने पर गैस जलने में परेशानी या लौ असमान हो सकती है। इसलिए उसे तब तक वापस चूल्हे पर न लगाएं, जब तक वह पूरी तरह सूख न जाए। चूल्हे के आसपास की सतह को भी साफ और सूखा रखें।
बर्नर सही जगह लगाकर चेक करें
पूरी तरह सूखने के बाद बर्नर को उसकी सही स्थिति में वापस लगाएं। कैप टेढ़ी या गलत तरीके से लगी होने पर भी लौ असमान दिखाई दे सकती है। गैस चालू करने के बाद लौ को ध्यान से देखें। सामान्य तौर पर साफ और सही तरीके से लगा बर्नर समान लौ देने में मदद करता है। अगर लौ लगातार पीली, कमजोर या असामान्य रहे, तो चूल्हे की गैस लाइन, नोजल या अन्य हिस्सों को खुद खोलने के बजाय योग्य गैस तकनीशियन से जांच करवाएं।
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लेखक: (कीर्ति)
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Turmeric Benefits: औषधीय गुणों से भरी है हल्दी, इन्फ्लेमेशन कम करने में भी मददगार; मिलेंगे 6 बड़े फायदे
Turmeric Benefits: हल्दी भारतीय रसोई का ऐसा मसाला है, जिसका इस्तेमाल सदियों से स्वाद और रंग बढ़ाने के साथ-साथ पारंपरिक घरेलू उपायों में भी किया जाता रहा है। इसमें पाया जाने वाला करक्यूमिन इसे खास बनाता है। हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुण पाए जाते हैं, जिसके कारण इसे संतुलित डाइट का हिस्सा माना जाता है। दूध, सब्जी या दाल में थोड़ी मात्रा में हल्दी शामिल करके रोजाना इसका सेवन किया जा सकता है।
हालांकि हल्दी को किसी बीमारी का इलाज या दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन सीमित मात्रा में इसका सेवन शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचा सकता है। नियमित डाइट में हल्दी को शामिल करने से पाचन से लेकर शरीर की सामान्य रोग प्रतिरोधक क्षमता तक को सपोर्ट मिल सकता है।
हल्दी का सेवन करने के 6 बड़े फायदे
शरीर में सूजन कम करने में मददगार
हल्दी में मौजूद करक्यूमिन अपने एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाता है। यह शरीर में होने वाली सामान्य सूजन को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। यही वजह है कि पारंपरिक खान-पान में हल्दी को लंबे समय से महत्व दिया जाता रहा है। संतुलित आहार के साथ इसका नियमित और सीमित सेवन शरीर के सामान्य स्वास्थ्य को सपोर्ट कर सकता है।
एंटीऑक्सीडेंट सुरक्षा देता है
शरीर में बनने वाले फ्री रेडिकल्स कोशिकाओं पर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ा सकते हैं। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन और अन्य प्राकृतिक यौगिक एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि से जुड़े माने जाते हैं। डाइट में हल्दी शामिल करने से शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से निपटने में मदद मिल सकती है। इसके लिए हल्दी को रोजाना भोजन का हिस्सा बनाना आसान तरीका है।
पाचन को रख सकती है बेहतर
भारतीय भोजन में हल्दी का इस्तेमाल केवल स्वाद और रंग के लिए नहीं होता। पारंपरिक रूप से इसे पाचन के लिए भी उपयोग किया जाता रहा है। भोजन में उचित मात्रा में हल्दी शामिल करने से पाचन तंत्र के सामान्य कामकाज को सपोर्ट मिल सकता है। हालांकि लगातार पेट दर्द, गैस या अपच की समस्या हो तो केवल हल्दी पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करती है
हल्दी में मौजूद प्राकृतिक यौगिक शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को सपोर्ट करने में भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि इसे किसी संक्रमण से बचाव की गारंटी नहीं माना जा सकता। पर्याप्त नींद, पौष्टिक भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और अच्छी स्वच्छता के साथ हल्दी को डाइट में शामिल करना ओवरऑल हेल्थ के लिए उपयोगी हो सकता है।
दिल की सेहत के लिए उपयोगी डाइट का हिस्सा
हल्दी में मौजूद करक्यूमिन पर हृदय और मेटाबॉलिक हेल्थ से जुड़े कई अध्ययन हुए हैं। कुछ शोध इसके संभावित लाभों की ओर संकेत करते हैं, लेकिन हल्दी को हृदय रोग की दवा नहीं माना जा सकता। हृदय को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित खान-पान, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और ब्लड प्रेशर व कोलेस्ट्रॉल की निगरानी ज्यादा महत्वपूर्ण है।
त्वचा के लिए भी फायदेमंद
हल्दी के एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुणों के कारण इसे त्वचा की सेहत से भी जोड़ा जाता है। संतुलित डाइट के हिस्से के रूप में इसका सेवन त्वचा को अंदर से पोषण देने वाली समग्र जीवनशैली का हिस्सा हो सकता है। हालांकि त्वचा पर सीधे हल्दी लगाने से हर व्यक्ति को फायदा हो, यह जरूरी नहीं है। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
हल्दी का सेवन करते समय रखें ध्यान
हल्दी का मतलब हमेशा अधिक मात्रा में सेवन करना नहीं है। सामान्य भोजन में इस्तेमाल होने वाली मात्रा आमतौर पर पर्याप्त होती है। हल्दी के सप्लीमेंट या अधिक मात्रा में करक्यूमिन लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है, खासकर यदि आप नियमित रूप से कोई दवा लेते हैं या आपको पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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