Turmeric Benefits: औषधीय गुणों से भरी है हल्दी, इन्फ्लेमेशन कम करने में भी मददगार; मिलेंगे 6 बड़े फायदे
Turmeric Benefits: हल्दी भारतीय रसोई का ऐसा मसाला है, जिसका इस्तेमाल सदियों से स्वाद और रंग बढ़ाने के साथ-साथ पारंपरिक घरेलू उपायों में भी किया जाता रहा है। इसमें पाया जाने वाला करक्यूमिन इसे खास बनाता है। हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुण पाए जाते हैं, जिसके कारण इसे संतुलित डाइट का हिस्सा माना जाता है। दूध, सब्जी या दाल में थोड़ी मात्रा में हल्दी शामिल करके रोजाना इसका सेवन किया जा सकता है।
हालांकि हल्दी को किसी बीमारी का इलाज या दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन सीमित मात्रा में इसका सेवन शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचा सकता है। नियमित डाइट में हल्दी को शामिल करने से पाचन से लेकर शरीर की सामान्य रोग प्रतिरोधक क्षमता तक को सपोर्ट मिल सकता है।
हल्दी का सेवन करने के 6 बड़े फायदे
शरीर में सूजन कम करने में मददगार
हल्दी में मौजूद करक्यूमिन अपने एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाता है। यह शरीर में होने वाली सामान्य सूजन को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। यही वजह है कि पारंपरिक खान-पान में हल्दी को लंबे समय से महत्व दिया जाता रहा है। संतुलित आहार के साथ इसका नियमित और सीमित सेवन शरीर के सामान्य स्वास्थ्य को सपोर्ट कर सकता है।
एंटीऑक्सीडेंट सुरक्षा देता है
शरीर में बनने वाले फ्री रेडिकल्स कोशिकाओं पर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ा सकते हैं। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन और अन्य प्राकृतिक यौगिक एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि से जुड़े माने जाते हैं। डाइट में हल्दी शामिल करने से शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से निपटने में मदद मिल सकती है। इसके लिए हल्दी को रोजाना भोजन का हिस्सा बनाना आसान तरीका है।
पाचन को रख सकती है बेहतर
भारतीय भोजन में हल्दी का इस्तेमाल केवल स्वाद और रंग के लिए नहीं होता। पारंपरिक रूप से इसे पाचन के लिए भी उपयोग किया जाता रहा है। भोजन में उचित मात्रा में हल्दी शामिल करने से पाचन तंत्र के सामान्य कामकाज को सपोर्ट मिल सकता है। हालांकि लगातार पेट दर्द, गैस या अपच की समस्या हो तो केवल हल्दी पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करती है
हल्दी में मौजूद प्राकृतिक यौगिक शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को सपोर्ट करने में भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि इसे किसी संक्रमण से बचाव की गारंटी नहीं माना जा सकता। पर्याप्त नींद, पौष्टिक भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और अच्छी स्वच्छता के साथ हल्दी को डाइट में शामिल करना ओवरऑल हेल्थ के लिए उपयोगी हो सकता है।
दिल की सेहत के लिए उपयोगी डाइट का हिस्सा
हल्दी में मौजूद करक्यूमिन पर हृदय और मेटाबॉलिक हेल्थ से जुड़े कई अध्ययन हुए हैं। कुछ शोध इसके संभावित लाभों की ओर संकेत करते हैं, लेकिन हल्दी को हृदय रोग की दवा नहीं माना जा सकता। हृदय को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित खान-पान, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और ब्लड प्रेशर व कोलेस्ट्रॉल की निगरानी ज्यादा महत्वपूर्ण है।
त्वचा के लिए भी फायदेमंद
हल्दी के एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुणों के कारण इसे त्वचा की सेहत से भी जोड़ा जाता है। संतुलित डाइट के हिस्से के रूप में इसका सेवन त्वचा को अंदर से पोषण देने वाली समग्र जीवनशैली का हिस्सा हो सकता है। हालांकि त्वचा पर सीधे हल्दी लगाने से हर व्यक्ति को फायदा हो, यह जरूरी नहीं है। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
हल्दी का सेवन करते समय रखें ध्यान
हल्दी का मतलब हमेशा अधिक मात्रा में सेवन करना नहीं है। सामान्य भोजन में इस्तेमाल होने वाली मात्रा आमतौर पर पर्याप्त होती है। हल्दी के सप्लीमेंट या अधिक मात्रा में करक्यूमिन लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है, खासकर यदि आप नियमित रूप से कोई दवा लेते हैं या आपको पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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PCOD को मैनेज करने के लिए खान-पान, एक्सरसाइज, नींद और तनाव जैसी चीजों पर ध्यान दिया जा सकता है। अपनी रोज की आदतों में छोटे बदलाव करके हेल्दी रूटीन बनाया जा सकता है। जानिए ऐसी 6 आसान आदतों के बारे में।
1. खाने की प्लेट पर दें ध्यान
PCOD में अपनी डाइट को संतुलित रखना जरूरी है। खाने में हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, फल, दूध-दही और प्रोटीन से भरपूर चीजें शामिल करें। बहुत ज्यादा मीठा, तला हुआ और पैकेज्ड खाना खाने से बचने की कोशिश करें। लंबे समय तक भूखे रहने के बजाय समय पर संतुलित खाना खाएं।
2. रोज करें एक्सरसाइज और योग
PCOD में रोजाना एक्सरसाइज को रूटीन में शामिल किया जा सकता है। इसके लिए जिम जाना जरूरी नहीं है। आप तेज वॉक, साइकिलिंग, हल्की रनिंग या स्ट्रेचिंग जैसी आसान एक्सरसाइज कर सकती हैं। अगर आप पहली बार एक्सरसाइज शुरू कर रही हैं, तो धीरे-धीरे शुरुआत करें।
3. हर्बल चाय भी हो सकती है एक विकल्प
अपनी रोज की डाइट में कभी-कभी पुदीना या दालचीनी वाली हर्बल चाय शामिल कर सकती हैं। हर्बल चाय को PCOD का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। अगर आप किसी बीमारी की दवा ले रही हैं, तो नियमित सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
4. नींद को न करें नजरअंदाज
हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए अच्छी नींद बेहद जरूरी है। रोज पर्याप्त नींद ले और सोने-जागने का समय लगभग तय रखें। रात में सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल कम करें। किताब पढ़ना या हल्का म्यूजिक सुनना सोने से पहले की अच्छी आदत हो सकती है।
5. तनाव कम करने के लिए निकालें समय
तनाव का असर आपकी नींद और रोज की दिनचर्या पर पड़ सकता है। इसलिए दिन में कुछ समय खुद के लिए निकालना जरूरी है। आप मेडिटेशन, डीप ब्रीदिंग, हल्की वॉक या योग को रूटीन में शामिल कर सकती हैं। इससे रिलैक्स महसूस करने में मदद मिल सकती है।
6. आयुर्वेदिक चीजें लेने में न करें जल्दबाजी
हर व्यक्ति के शरीर पर किसी जड़ी-बूटी का असर अलग हो सकता है। इसलिए अगर आप पहले से कोई दवा ले रही हैं या गर्भधारण की योजना बना रही हैं, तो किसी भी हर्बल प्रोडक्ट को लेने से पहले डॉक्टर या योग्य विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
सिर्फ एक नुस्खे पर निर्भर रहना सही नहीं
PCOD को मैनेज करने के लिए किसी एक घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहने के बजाय पूरी लाइफस्टाइल पर ध्यान देना ज्यादा बेहतर है। संतुलित डाइट, नियमित एक्सरसाइज और योग, पर्याप्त नींद और तनाव कम करने की कोशिश को रोज की आदतों में शामिल किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह खबर सामान्य जानकारी के लिए है। PCOD/PCOS के इलाज, दवा, एक्सरसाइज या किसी हर्बल प्रोडक्ट को शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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