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Malwa Style Bati: मालवी स्वाद से भरी बाटी लगेगी लाजवाब! इन टिप्स से करें तैयार, अंदर से सॉफ्ट बाहर से बनेगी कुरकुरी

Malwa Style Bati Recipe: मालवा का खान-पान अपने देसी स्वाद, भरपूर मसालों और मिट्टी से जुड़े पारंपरिक व्यंजनों के लिए खास पहचान रखता है। इसी स्वाद की झलक मालवी बाटी में भी देखने को मिलती है। ऊपर से सुनहरी और हल्की कुरकुरी, जबकि अंदर से नरम और स्वादिष्ट बाटी दाल, चटनी, सब्जी या भरपूर घी के साथ परोसी जाए तो खाने का मजा दोगुना हो जाता है। इसे घर पर बनाना आसान है, बस आटा गूंथने और सेंकने के तरीके में थोड़ी सावधानी जरूरी है।

अक्सर घर पर बाटी बनाते समय सबसे बड़ी परेशानी यह आती है कि वह बाहर से तो अच्छी तरह सिक जाती है, लेकिन अंदर से काफी सख्त हो जाती है। कुछ आसान कुकिंग टिप्स अपनाकर इस समस्या से बचा जा सकता है। आटे में सही मात्रा में मोयन डालने से लेकर बाटी को सही तापमान पर सेंकने तक हर स्टेप इसका टेक्सचर तय करता है। आइए जानते हैं मालवी अंदाज की सॉफ्ट और कुरकुरी बाटी बनाने का आसान तरीका।

सही आटा है स्वादिष्ट बाटी का राज

बाटी के लिए गेहूं के आटे का इस्तेमाल करें। इसमें थोड़ा सूजी या बारीक रवा मिलाने से बाहरी हिस्सा अच्छा कुरकुरा बन सकता है। आटे में पर्याप्त मात्रा में घी का मोयन डालना बेहद जरूरी है। मोयन इतना होना चाहिए कि आटे को मुट्ठी में दबाने पर वह आसानी से बंध जाए। इसके बाद धीरे-धीरे पानी डालकर थोड़ा सख्त लेकिन चिकना आटा गूंथें।

आटे को दें थोड़ा आराम

आटा गूंथने के तुरंत बाद बाटी बनाने के बजाय इसे करीब 15-20 मिनट ढककर रख दें। इससे आटा सेट हो जाता है और बाटी का टेक्सचर बेहतर बनता है। इसके बाद आटे को बराबर हिस्सों में बांटकर गोल लोइयां तैयार करें। मालवी स्वाद के लिए चाहें तो इनमें हल्का मसाला, अजवाइन या थोड़ी सी कसूरी मेथी भी मिलाई जा सकती है।

लोइयों में हल्की दरारें जरूर बनाएं

बाटी की गोल लोई तैयार करने के बाद उसके ऊपर अंगूठे या उंगली से हल्का दबाव देकर छोटी दरारें या निशान बना सकते हैं। इससे गर्मी अंदर तक पहुंचने में मदद मिलती है और बाटी बाहर से बहुत ज्यादा सख्त होने से बच सकती है। लोई को बहुत ज्यादा दबाकर चपटा करने की जरूरत नहीं है। इसका आकार गोल और पर्याप्त मोटा रखें।

धीमी-मध्यम आंच पर करें तैयार

बाटी को बहुत तेज आंच पर सेंकने से बाहर का हिस्सा जल्दी कड़ा या ज्यादा भूरा हो सकता है, जबकि अंदर का हिस्सा कच्चा रह सकता है। इसलिए इसे नियंत्रित धीमी-मध्यम आंच पर धीरे-धीरे पकाएं। ओवन, तंदूर, गैस या एयर फ्रायर में बनाते समय उपकरण के अनुसार तापमान और समय थोड़ा अलग हो सकता है। बीच-बीच में बाटी को घुमाते रहें, ताकि चारों तरफ से एकसमान सिके।

आखिर में घी का लगाएं तड़का

बाटी अच्छी तरह सुनहरी और कुरकुरी हो जाए तो इसे हल्का दबाकर या फोड़कर ऊपर से गर्म घी डालें। घी अंदर तक पहुंचने से बाटी का स्वाद बढ़ जाता है और उसका अंदरूनी हिस्सा ज्यादा स्वादिष्ट लगता है। इसे गर्मागर्म दाल, लहसुन की चटनी, हरी चटनी और प्याज के साथ परोसें।

इन गलतियों से बचें

आटे में बहुत कम मोयन डालना, जरूरत से ज्यादा पानी डालकर आटा बहुत नरम कर देना और तेज आंच पर बाटी सेंकना आम गलतियां हैं। इसके अलावा बाटी को एक ही तरफ छोड़ देने से भी वह असमान रूप से पक सकती है। सही मोयन, संतुलित आटा और धीमी-मध्यम आंच का इस्तेमाल करेंगे तो घर पर भी मालवी अंदाज की बाहर से कुरकुरी और अंदर से सॉफ्ट बाटी तैयार की जा सकती है।

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लेखक: (कीर्ति)

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Gas Burner Cleaning: धीमी हो गई है गैस चूल्हे की आंच? इन तरीकों से करें बर्नर की सफाई, नए जैसी होगी फ्लेम

Gas Burner Cleaning: गैस चूल्हे पर खाना बनाते समय अगर बर्नर की लौ पहले के मुकाबले धीमी हो गई है, तो हर बार गैस की कमी या रेगुलेटर को जिम्मेदार मानना सही नहीं है। कई बार बर्नर के छोटे-छोटे छेद तेल, मसाले, दूध या खाने के जले हुए कणों से बंद हो जाते हैं। इसकी वजह से गैस का फ्लो प्रभावित होता है और लौ नीली व तेज जलने के बजाय कमजोर या असमान दिखाई देने लगती है।

बर्नर की नियमित सफाई न सिर्फ चूल्हे की लौ को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती है, बल्कि किचन की सफाई और खाना पकाने की सुविधा के लिए भी जरूरी है। अच्छी बात यह है कि बर्नर को साफ करने के लिए महंगे क्लीनर की जरूरत नहीं पड़ती। घर में मौजूद कुछ आसान चीजों और सही तरीके से आप जमा गंदगी को हटा सकते हैं। 

बर्नर साफ करने के आसान तरीके

सबसे पहले बर्नर को ठंडा होने दें
सफाई शुरू करने से पहले गैस बंद करें और बर्नर को पूरी तरह ठंडा होने दें। अगर चूल्हा हाल ही में इस्तेमाल हुआ है तो तुरंत बर्नर निकालने की कोशिश न करें। गैस की सप्लाई बंद रखना भी जरूरी है। सफाई के दौरान जल्दबाजी करने के बजाय पहले बर्नर को चूल्हे से सावधानीपूर्वक निकालें और अलग रख लें।

सूखी गंदगी को ब्रश से हटाएं
बर्नर पर जमा सूखे मसाले, तेल की परत और जले हुए खाद्य कणों को पहले किसी पुराने मुलायम ब्रश से साफ करें। बर्नर के छोटे छेदों के आसपास जमी गंदगी पर खास ध्यान दें। बहुत ज्यादा जोर लगाकर रगड़ने से बचें, क्योंकि बर्नर की सतह या गैस के छेद को नुकसान पहुंच सकता है।

गुनगुने पानी से करें सफाई
अगर बर्नर पर चिकनाई ज्यादा जम गई है, तो उसे निर्माता के निर्देशों के अनुसार गुनगुने पानी और हल्के डिशवॉशिंग लिक्विड में कुछ समय भिगोया जा सकता है। इससे जमी चिकनाई नरम होने लगती है और उसे साफ करना आसान हो जाता है। बर्नर की सामग्री के अनुसार सफाई का तरीका अलग हो सकता है, इसलिए बहुत तेज रसायनों का इस्तेमाल करने से बचें।

छोटे छेदों की सफाई सावधानी से करें
बर्नर के छोटे-छोटे पोर्ट बंद होने पर लौ असमान हो सकती है। इन्हें साफ करने के लिए मुलायम ब्रश या निर्माता द्वारा सुझाए गए सफाई उपकरण का इस्तेमाल करें। किसी नुकीली धातु की पिन से छेद को बड़ा करने या जोर से कुरेदने से बचें। इससे बर्नर की संरचना और गैस फ्लो प्रभावित हो सकता है।

बर्नर को पूरी तरह सुखाना न भूलें
सफाई के बाद बर्नर को अच्छी तरह धोया गया है तो उसे पूरी तरह सूखने दें। बर्नर में नमी रह जाने पर गैस जलने में परेशानी या लौ असमान हो सकती है। इसलिए उसे तब तक वापस चूल्हे पर न लगाएं, जब तक वह पूरी तरह सूख न जाए। चूल्हे के आसपास की सतह को भी साफ और सूखा रखें।

बर्नर सही जगह लगाकर चेक करें
पूरी तरह सूखने के बाद बर्नर को उसकी सही स्थिति में वापस लगाएं। कैप टेढ़ी या गलत तरीके से लगी होने पर भी लौ असमान दिखाई दे सकती है। गैस चालू करने के बाद लौ को ध्यान से देखें। सामान्य तौर पर साफ और सही तरीके से लगा बर्नर समान लौ देने में मदद करता है। अगर लौ लगातार पीली, कमजोर या असामान्य रहे, तो चूल्हे की गैस लाइन, नोजल या अन्य हिस्सों को खुद खोलने के बजाय योग्य गैस तकनीशियन से जांच करवाएं।

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लेखक: (कीर्ति)

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Russell Arnold का बड़ा बयान: Sri Lanka को तीसरे स्पिनर से बिगड़ जाएगा Team Balance

श्रीलंका के पूर्व ऑलराउंडर रसेल अर्नोल्ड ने भारत के खिलाफ़ दूसरे टेस्ट के लिए मेज़बान टीम की प्लेइंग XI में तीसरे मुख्य स्पिनर को शामिल करने की क्षमता पर संदेह जताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इससे टीम का संतुलन बिगड़ सकता है। दो मैचों की सीरीज़ का दूसरा टेस्ट 23 अगस्त को कोलंबो के सिंहलीज़ स्पोर्ट्स क्लब (SSC) में शुरू होने वाला है। भारत अभी 1-0 से आगे है, क्योंकि उसने गाले इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए पहले टेस्ट में 165 रनों से जीत हासिल की थी।
 

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भारत ने पहले टेस्ट में तीन मुख्य स्पिनर उतारे थे, और मैच के आखिरी दौर में खराब होती पिच पर उनकी असरदार गेंदबाजी ने अहम भूमिका निभाई। इसके उलट, श्रीलंका ने दो स्पेशलिस्ट स्पिनर खिलाए थे। जब पूछा गया कि क्या श्रीलंका को दूसरे टेस्ट के लिए अनुभवी स्पिनर रमेश मेंडिस को टीम में शामिल करना चाहिए, तो अर्नोल्ड ने कहा कि एक और स्पिनर को लाने के लिए शायद दूसरे खिलाड़ियों को बाहर करना पड़ सकता है। 

उन्होंने कहा कि टीम के संतुलन को देखते हुए, मुझे नहीं लगता कि श्रीलंका के पास कोई और विकल्प है, क्योंकि आपको अपने बल्लेबाजों की ज़रूरत होती है। सातवें नंबर पर खेलने वाले डिकवेला [निरोशन] के अलावा, केशरा नुवान्था ने भी हिम्मत दिखाई, जो देखकर अच्छा लगा, लेकिन हमारे निचले क्रम के बल्लेबाजों ने भी कोई खास योगदान नहीं दिया। ओपनिंग पोजीशन पर हमें संघर्ष करना पड़ा है, मिडिल ऑर्डर ने रन बनाए हैं, लेकिन उसके बाद निचले क्रम के बल्लेबाज बहुत जल्दी आउट हो जाते हैं।

अर्नोल्ड ने आगे कहा कि और इसलिए, एक और फ्रंटलाइन स्पिनर को टीम में शामिल करने के लिए आप किसे बाहर करेंगे? हां, अगर वे सिर्फ़ एक सीमर के साथ खेलने का फ़ैसला करते हैं, तो यह एक विकल्प हो सकता है - यह SSC (सिंहलीज़ स्पोर्ट्स क्लब) की पिच के बर्ताव या उसके हाल पर निर्भर करेगा। लेकिन आम तौर पर, भारत के उलट, हम वह संतुलन नहीं बना पाते, क्योंकि टीम के दूसरे खिलाड़ियों की भूमिका भी बहुत अहम होती है। वे टीम में क्या योगदान देते हैं, यह मायने रखता है।
 

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उन्होंने कहा कि भारत को यह फायदा है कि वे रवींद्र जडेजा को तीसरे स्पिनर के तौर पर शामिल कर सकते हैं, क्योंकि उनकी बल्लेबाज़ी भी बहुत अच्छी है। उन्होंने कहा कि अब आप तीसरे स्पिनर की बात कर रहे हैं - रवींद्र जडेजा - जो शायद भारत के लिए टॉप 5 में बल्लेबाज़ी कर सकते हैं। ज़रूरत पड़ने पर नंबर 5 पर भी। तो ऐसे खिलाड़ियों का होना फायदेमंद है, क्योंकि इससे आपके पास ज़्यादा विविधता और विकल्प मौजूद रहते हैं।
 
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Fri, 21 Aug 2026 15:17:00 +0530

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