NEET UG Counselling 2026: MCC ने रोकी Round 1 की Choice Locking, 31,728 सीटों पर एडमिशन का इंतजार; जानें नया अपडेट
मेडिकल कॉलेजों में दाखिले का इंतजार कर रहे NEET UG 2026 उम्मीदवारों के लिए फिलहाल Choice Locking को लेकर स्थिति साफ नहीं हुई है। Medical Counselling Committee (MCC) ने Round 1 के लिए Choice Locking प्रक्रिया अभी शुरू नहीं की है। MCC की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उम्मीदवारों को नई टाइमिंग की घोषणा का इंतजार करने के लिए कहा गया है।
इसका सीधा मतलब है कि उम्मीदवार अभी Round 1 के लिए अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स की Choice Lock नहीं कर पाएंगे। उन्हें MCC की ओर से नए शेड्यूल की घोषणा होने तक इंतजार करना होगा।
31,728 सीटों पर होना है एडमिशन
NEET UG Counselling 2026 के Round 1 में MBBS, BDS और BSc Nursing की कुल 31,728 सीटों पर दाखिले की प्रक्रिया होनी है। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे MCC की वेबसाइट पर लगातार नजर बनाए रखें, क्योंकि Choice Locking की नई तारीख कभी भी जारी की जा सकती है।
17 अगस्त को आना है Seat Allotment
मौजूदा काउंसलिंग शेड्यूल के अनुसार Round 1 का प्रोविजनल सीट अलॉटमेंट रिजल्ट 17 अगस्त 2026 को जारी किया जाना प्रस्तावित है। जिन उम्मीदवारों को सीट आवंटित होगी, उन्हें 18 से 22 अगस्त 2026 के बीच संबंधित कॉलेज में रिपोर्ट करना होगा।
हालांकि Choice Locking में देरी के कारण आगे की तारीखों में बदलाव हो सकता है। इसलिए उम्मीदवारों को पुराने शेड्यूल के बजाय MCC की ओर से जारी होने वाले नए अपडेट को प्राथमिकता देनी चाहिए।
कुछ और महत्वपूर्ण लिस्ट भी जारी
इस बीच MCC ने 85 प्रतिशत कोटे के तहत CW कैटेगरी से संबंधित सप्लीमेंट्री लिस्ट भी जारी की है। इसमें Armed Forces Personnel के बच्चों और विधवाओं से संबंधित उम्मीदवार शामिल हैं।
इसके अलावा JIPMER Puducherry और Karaikal Internal Quota के लिए पात्र उम्मीदवारों की अतिरिक्त सूची भी जारी की गई है। इस लिस्ट में कुल 5,407 उम्मीदवारों को शामिल किया गया है।
उम्मीदवार क्या करें?
अभी उम्मीदवारों को Choice Locking के लिए कोई जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है। MCC की ओर से नई टाइमिंग जारी होने के बाद ही उम्मीदवार अपनी पसंद लॉक करें। साथ ही काउंसलिंग से जुड़ी तारीखों, सीट अलॉटमेंट और कॉलेज रिपोर्टिंग को लेकर किसी भी बदलाव के लिए MCC की आधिकारिक वेबसाइट चेक करते रहें।
UPI Payment New Rule: ₹2,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर लग सकता है MDR चार्ज, सरकार कर रही नए नियमों की तैयारी
UPI Payment New Rule: अगर आप Paytm, PhonePe, Google Pay या किसी अन्य UPI ऐप के जरिए ₹2,000 से अधिक का भुगतान करते हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार ने Payment and Settlement Systems Act में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है, जिससे भविष्य में चुनिंदा UPI ट्रांजैक्शन पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने का कानूनी प्रावधान बनाया जा सकता है।
हालांकि फिलहाल UPI भुगतान पर कोई नया शुल्क लागू नहीं किया गया है। यदि संसद इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो सरकार बाद में अलग अधिसूचना जारी कर MDR लागू कर सकती है। प्रस्ताव के अनुसार, यह शुल्क सीधे ग्राहकों से नहीं बल्कि पात्र व्यापारियों (Merchants) से लिया जा सकता है।
क्या ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार और संबंधित पक्षों के बीच एक प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है, जिसके तहत ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.3% से 0.5% तक MDR लगाया जा सकता है। हालांकि यह प्रस्ताव अभी अंतिम नहीं है और इस पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है।
किन कारोबारियों पर लागू हो सकता है नियम?
प्रस्ताव के अनुसार, MDR केवल उन व्यापारियों (Merchants) पर लागू हो सकता है, जिनका सालाना कारोबार 1.5 करोड़ रुपये से अधिक है। सरकार एक अन्य मॉडल पर भी विचार कर रही है, जिसमें ट्रांजैक्शन की राशि के बजाय व्यापारी के वार्षिक कारोबार के आधार पर शुल्क तय किया जा सकता है। इसके अलावा MDR की अधिकतम सीमा तय करने पर भी चर्चा हो रही है।
क्या ग्राहकों को देना होगा अतिरिक्त पैसा?
मौजूदा प्रस्ताव के अनुसार MDR का भुगतान ग्राहकों को नहीं, बल्कि व्यापारियों को करना होगा। यानी यदि यह नियम लागू होता भी है, तो शुल्क सीधे उपभोक्ताओं से नहीं लिया जाएगा। हालांकि कुछ बड़े व्यापारी अपनी व्यावसायिक रणनीति के तहत इस अतिरिक्त लागत को उत्पाद या सेवाओं की कीमत में शामिल कर सकते हैं। वहीं छोटे कारोबारियों को इस प्रस्ताव के दायरे से बाहर रखा जा सकता है।
सरकार यह बदलाव क्यों करना चाहती है?
फिलहाल UPI पर Zero MDR व्यवस्था लागू है। इसका मतलब है कि UPI भुगतान स्वीकार करने पर व्यापारियों से कोई प्रोसेसिंग फीस नहीं ली जाती। बैंकों और डिजिटल पेमेंट कंपनियों का कहना है कि बिना MDR के डिजिटल पेमेंट नेटवर्क का विस्तार और रखरखाव करना मुश्किल हो रहा है। कार्ड पेमेंट्स में जहां व्यापारी पहले से प्रोसेसिंग फीस देते हैं, वहीं UPI में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
भारत में UPI का कितना बड़ा नेटवर्क है?
UPI आज देश का सबसे लोकप्रिय डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म बन चुका है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने UPI के जरिए 23.7 अरब (23.7 Billion) से अधिक ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू करीब 29.9 लाख करोड़ रुपये रही।रिपोर्ट्स के मुताबिक, ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन कुल UPI भुगतान का केवल लगभग 5% हैं, लेकिन कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में इनकी हिस्सेदारी करीब 65% है।
फिलहाल क्या है स्थिति?
अभी तक ₹2,000 से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन पर कोई MDR लागू नहीं किया गया है। सरकार ने केवल ऐसा कानूनी प्रावधान तैयार करने का प्रस्ताव रखा है, जिससे भविष्य में जरूरत पड़ने पर अधिसूचना जारी कर शुल्क लागू किया जा सके। अंतिम फैसला संसद की मंजूरी और बाद की सरकारी अधिसूचना पर निर्भर करेगा।
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