Maharashtra LL.B. CAP 2026: लॉ एडमिशन का Option Form Portal खुला, 3 और 5 वर्षीय LLB का Revised Schedule जल्द
महाराष्ट्र में तीन वर्षीय और पांच वर्षीय LL.B. कोर्स में दाखिले की प्रक्रिया से जुड़ा नया अपडेट सामने आया है। महाराष्ट्र राज्य सामान्य प्रवेश परीक्षा (CET) Cell ने 12 अगस्त को जारी सार्वजनिक नोटिस में बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए राज्य के मौजूदा Colleges of Legal Education (CLEs) को Bar Council of India (BCI) की ओर से सशर्त मंजूरी दी गई है।
CET Cell के मुताबिक, BCI की 10 अगस्त की अधिसूचना के बाद अब महाराष्ट्र सरकार की ओर से आगे की प्रक्रिया को लेकर दिशा-निर्देश मिलने का इंतजार है।
Option Form Portal रहेगा एक्टिव
CET Cell ने उम्मीदवारों को राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि LL.B. CAP 2026-27 का Option Form Filling Portal बंद नहीं किया गया है। उम्मीदवार पोर्टल पर जाकर अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स से संबंधित विकल्प भरने की प्रक्रिया जारी रख सकते हैं।
हालांकि, CAP प्रक्रिया का संशोधित शेड्यूल अभी जारी नहीं किया गया है। CET Cell ने बताया कि सरकार से जरूरी निर्देश प्राप्त होने के बाद LL.B. 3 Years और LL.B. 5 Years का Revised CAP Schedule अलग से जारी किया जाएगा।
BCI की सशर्त मंजूरी के बाद बदला अपडेट
यह पूरा मामला BCI की 10 अगस्त को जारी अधिसूचना के बाद सामने आया है। इसमें महाराष्ट्र के मौजूदा कानूनी शिक्षा संस्थानों को शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए सशर्त मंजूरी दी गई है।
यह मंजूरी मौजूदा कॉलेजों, उनके पहले से स्वीकृत लॉ कोर्स, अनुमोदित सेक्शन और निर्धारित सीटों तक सीमित है। साथ ही यह संबंधित नियमों और तय शर्तों के अधीन रहेगी।
उम्मीदवारों को क्या करना चाहिए?
CAP प्रक्रिया में शामिल उम्मीदवारों को फिलहाल Option Form भरने का काम पूरा करते रहना चाहिए। नए CAP Schedule का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को किसी अनधिकृत वेबसाइट या सोशल मीडिया पोस्ट के बजाय CET Cell की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी अपडेट पर ही भरोसा करना चाहिए।
CET Cell ने उम्मीदवारों, लॉ कॉलेजों और अन्य संबंधित पक्षों को सलाह दी है कि वे आगे की जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट नियमित रूप से चेक करते रहें।
Revised CAP Schedule कब आएगा?
फिलहाल CET Cell ने संशोधित तारीखों की घोषणा नहीं की है। महाराष्ट्र सरकार से जरूरी दिशा-निर्देश मिलने के बाद LL.B. 3 Years और LL.B. 5 Years CAP 2026-27 का Revised Schedule जारी किया जाएगा।
इंश्योरेंस नहीं तो पेट्रोल-डीजल भी नहीं? सुप्रीम कोर्ट के सुझाव से बदल सकते हैं नियम
अगर आपकी कार या बाइक का मोटर इंश्योरेंस खत्म हो चुका है, तो आने वाले समय में पेट्रोल पंप से ईंधन भरवाना मुश्किल हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा और थर्ड पार्टी मोटर इंश्योरेंस के बेहतर पालन को लेकर ऐसा तकनीकी सिस्टम लागू करने का सुझाव दिया है, जिसके तहत बिना वैध इंश्योरेंस वाले वाहनों को पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि पेट्रोल पंपों को इंश्योरेंस डेटाबेस से जोड़ने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो ईंधन भराने से पहले वाहन का इंश्योरेंस स्टेटस डिजिटल तरीके से जांचा जा सकेगा। इंश्योरेंस खत्म होने पर पेट्रोल या डीजल देने से इनकार किया जा सकता है।
ANPR कैमरे और VAHAN पोर्टल होंगे लिंक
कोर्ट ने ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों को इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (IIB) और VAHAN पोर्टल से जोड़ने का भी सुझाव दिया है। इससे ट्रैफिक पुलिस बिना वाहन रोके ही यह पता लगा सकेगी कि वाहन का इंश्योरेंस वैध है या नहीं। सिस्टम खुद ई-चालान भी जारी कर सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में नए वाहनों के लिए लंबी अवधि का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य किया था। इसके तहत नई कारों के लिए तीन साल और नई दोपहिया गाड़ियों के लिए पांच साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस जरूरी किया गया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में वाहन मालिक अनिवार्य अवधि पूरी होने के बाद पॉलिसी का नवीनीकरण नहीं कराते।
बिना इंश्योरेंस वाहन चलाने पर जुर्माना
मोटर व्हीकल एक्ट के तहत बिना वैध थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के वाहन चलाने पर पहले अपराध के लिए 2,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके बावजूद देश में अब भी बड़ी संख्या में वाहन बिना इंश्योरेंस के सड़कों पर चल रहे हैं।
विशेषज्ञों ने बताया क्यों जरूरी है कदम
बजाज कैपिटल इंश्योरेंस के सीईओ वेंकटेश नायडू का कहना है कि तकनीक आधारित यह व्यवस्था लोगों को समय पर पॉलिसी रिन्यू कराने के लिए प्रेरित करेगी और सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाएगी।
वहीं पॉलिसीबाजार के मोटर इंश्योरेंस प्रमुख पारस पसरीचा के अनुसार, ANPR कैमरों, IIB और VAHAN के बीच डिजिटल इंटीग्रेशन से बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों की पहचान आसान होगी और थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का दायरा बढ़ेगा। इससे सड़क हादसों के पीड़ितों को मुआवजा मिलने में भी आसानी होगी और लंबी कानूनी प्रक्रिया की जरूरत कम पड़ेगी।
(प्रियंका कुमारी)
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