भारत की विदेशी पिचों पर बल्लेबाजी की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। श्रीलंका के खिलाफ गॉल में भारत की 165 रन की जीत के बाद दक्षिण अफ्रीका के पूर्व बल्लेबाज एबी डिविलियर्स ने विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर को लेकर अपनी राय रखी है। डिविलियर्स का मानना है कि तेंदुलकर ने भारतीय बल्लेबाजों के लिए मुश्किल विदेशी परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन करने का रास्ता बनाया, लेकिन कोहली ने उस स्तर को और ऊंचा किया है।
अपने यूट्यूब चैनल पर डिविलियर्स ने कहा कि सचिन तेंदुलकर पहले भारतीय बल्लेबाज थे जिन्होंने तेज और सीम वाली विदेशी पिचों पर सफल होने का भरोसा दिखाया। उनके मुताबिक विराट कोहली ने इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए विदेश में भारतीय बल्लेबाजी की उम्मीदों को नई ऊंचाई दी।
हालांकि आंकड़ों की बात करें तो विदेशी टेस्ट में तेंदुलकर का रिकॉर्ड अब भी कोहली से बेहतर है। तेंदुलकर ने अपने 200 टेस्ट मैचों में कुल 15,921 रन बनाए, जिसमें 8,705 रन भारत के बाहर आए। वह विदेशी टेस्ट मैचों में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज भी हैं। दूसरी ओर, मई 2025 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने वाले विराट कोहली ने 123 टेस्ट में 9,230 रन बनाए। इनमें 66 विदेशी टेस्ट मैचों में उनके नाम 4,774 रन हैं।
गौरतलब है कि दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी तेंदुलकर का रिकॉर्ड बेहतर रहा है। इन चार देशों में उन्होंने 63 टेस्ट में 5,387 रन बनाए और उनका औसत 51.30 रहा। इस दौरान उन्होंने 17 शतक और 23 अर्धशतक लगाए। कोहली ने इन देशों में 46 टेस्ट में 3,661 रन बनाए और उनका औसत 42.08 रहा। उनके नाम 12 शतक और 14 अर्धशतक हैं।
इसके बावजूद डिविलियर्स की बात सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है। उनका मानना है कि कोहली के दौर में भारतीय टीम ने विदेशी जमीन पर जीत को लेकर सोच ही बदल दी। टीम ने ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी जगहों पर चुनौती देने का आत्मविश्वास दिखाया और बल्लेबाजों से भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद बढ़ी।
बता दें कि डिविलियर्स और विराट कोहली इंडियन प्रीमियर लीग में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए लंबे समय तक साथ खेले हैं। इसी वजह से वह कोहली के खेल और तैयारी को करीब से देख चुके हैं। डिविलियर्स का कहना है कि अब केएल राहुल और देवदत्त पडिक्कल जैसे बल्लेबाज भी तेंदुलकर और कोहली की बनाई राह पर आगे बढ़ रहे हैं।
हालांकि डिविलियर्स ने केएल राहुल के विदेशी प्रदर्शन को लेकर एक अहम सुधार की जरूरत बताई है। उन्होंने राहुल की तकनीक और भारतीय टीम में उनकी उपयोगिता की तारीफ की, लेकिन कहा कि विदेश में उनका औसत करीब 34 रन है और उनसे इससे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है।
डिविलियर्स के मुताबिक राहुल को अच्छी शुरुआत मिलने के बाद उसे बड़ी पारी में बदलना होगा। उनके लिए सिर्फ शतक बनाना काफी नहीं होगा, बल्कि 150 से 180 रन जैसी बड़ी पारियां खेलकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाना जरूरी होगा। उनका कहना है कि नई गेंद के खिलाफ जल्दी आउट होने का खतरा हमेशा रहता है, इसलिए एक बार जमने के बाद राहुल को अपनी पारी को ज्यादा बड़ा बनाना होगा।
मौजूद जानकारी के अनुसार, भारतीय क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर से शुरू हुई विदेशी परिस्थितियों में सफल होने की परंपरा विराट कोहली के दौर में और मजबूत हुई। अब टीम के सामने चुनौती यही है कि नई पीढ़ी के बल्लेबाज इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए विदेशों में लगातार बड़ी पारियां खेलें और भारतीय टीम के मजबूत प्रदर्शन को बनाए रखें हैं।
Continue reading on the app