सज्जन कुमार का सियासी सफर: तीन बार सांसद बनने से 1984 दंगा मामलों तक, जानिए बड़े विवाद और उपलब्धियां
दिल्ली की राजनीति में कभी प्रभावशाली चेहरा रहे पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का राजनीतिक सफर उपलब्धियों और गंभीर विवादों से भरा रहा है. नगर निगम पार्षद से राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचे कुमार ने तीन बार लोकसभा का चुनाव जीता, लेकिन 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों ने उनके राजनीतिक जीवन पर गहरी छाप छोड़ी. हाल के वर्षों में अदालतों के अलग-अलग फैसलों के कारण उनका नाम एक बार फिर चर्चा में रहा है.
नगर निगम से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
सज्जन कुमार ने 1970 के दशक में दिल्ली की स्थानीय राजनीति से शुरुआत की. 1977 में वह दिल्ली नगर निगम के पार्षद चुने गए और इसी दौर में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव भी बने. इसके बाद उनका राजनीतिक प्रभाव तेजी से बढ़ा.
1980 में उन्होंने बाहरी दिल्ली लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश किया. इस चुनाव में उन्होंने दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश को हराया था. यह जीत उनके राजनीतिक करियर का बड़ा मोड़ मानी गई.
तीन बार लोकसभा पहुंचे
सज्जन कुमार 1980, 1991 और 2004 में लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए. 2004 में उन्होंने बाहरी दिल्ली से दोबारा जीत दर्ज की. संसद में उन्होंने शहरी विकास और सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना से जुड़ी समितियों में भी काम किया.
हालांकि, 1996 की हार के बाद उनका राजनीतिक प्रभाव एक समय कमजोर पड़ा. इसके बावजूद उन्होंने दिल्ली की राजनीति में अपनी पकड़ बनाए रखी और 2004 में एक बार फिर लोकसभा पहुंचने में कामयाब रहे.
सामाजिक काम भी रहे चर्चा में
संसद की आधिकारिक जीवनी में सज्जन कुमार का पेशा सामाजिक कार्यकर्ता और कारोबारी बताया गया है. इसमें विधवाओं और गरीब महिलाओं की बेटियों के विवाह में आर्थिक सहायता, झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों के पुनर्वास और दिव्यांग लोगों की मदद जैसी गतिविधियों का उल्लेख मिलता है.
यही उनके राजनीतिक व्यक्तित्व का दूसरा पक्ष था, जिसमें स्थानीय स्तर पर सामाजिक संपर्क और जनकल्याण से जुड़े कामों को महत्व दिया जाता था.
1984 के दंगों ने बदल दी तस्वीर
सज्जन कुमार के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा विवाद 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़ा रहा. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान उन पर भीड़ को उकसाने और हिंसा में भूमिका निभाने के आरोप लगे.
इन आरोपों ने दशकों तक उनका पीछा किया और उनके राजनीतिक करियर को गंभीर नुकसान पहुंचाया.
2018 में दिल्ली हाई कोर्ट से उम्रकैद
1984 के दंगा मामले में निचली अदालत से राहत मिलने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने 2018 में फैसला पलटते हुए सज्जन कुमार को दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई. यह मामला पांच सिखों की हत्या और हिंसा से जुड़ा था.
इसके बाद उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. उनकी राजनीतिक सक्रियता भी लगभग समाप्त हो गई.
2025 में हत्या के एक और मामले में दोषी
फरवरी 2025 में दिल्ली की एक अदालत ने 1984 की हिंसा से जुड़े एक अन्य मामले में सज्जन कुमार को दो सिखों—जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या का दोषी ठहराया. बाद में उन्हें उम्रकैद की सजा दी गई.
2026 में कुछ मामलों में मिली राहत
हालांकि, सभी मामलों में अदालतों का फैसला उनके खिलाफ नहीं रहा. जनवरी 2026 में दिल्ली की एक अदालत ने जनकपुरी और विकासपुरी में 1984 की हिंसा से जुड़े एक मामले में सज्जन कुमार को बरी कर दिया. अदालत ने आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं पाए और गवाहों द्वारा कई दशक बाद उनका नाम लिए जाने को भी महत्वपूर्ण माना. इस तरह उनके खिलाफ दर्ज अलग-अलग मामलों में न्यायिक निष्कर्ष अलग-अलग रहे हैं.
उपलब्धियों और विवादों के बीच पूरा हुआ सफर
सज्जन कुमार का राजनीतिक जीवन भारतीय राजनीति के उन अध्यायों में शामिल है, जहां एक नेता की चुनावी सफलता और सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव के साथ गंभीर कानूनी विवाद भी जुड़े रहे. नगर निगम से शुरुआत करके तीन बार लोकसभा पहुंचना उनकी बड़ी राजनीतिक उपलब्धि रही, जबकि 1984 के दंगा मामलों में दोषसिद्धियों ने उनके करियर की दिशा पूरी तरह बदल दी.
आज सज्जन कुमार सक्रिय राजनीति से बाहर हैं और जेल में सजा काट रहे हैं. उनका सफर यह भी दिखाता है कि लंबे राजनीतिक प्रभाव और चुनावी सफलता के बावजूद गंभीर आपराधिक मामलों की न्यायिक प्रक्रिया किसी नेता की सार्वजनिक विरासत को किस तरह पूरी तरह बदल सकती है.
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भारतीय कॉलेज छात्रों के लिए गूगल का बड़ा तोहफा, एक साल तक मुफ्त मिलेगा 'एआई प्लस' प्लान
नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनी गूगल ने भारत के कॉलेज विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा ऐलान किया है। कंपनी ने पात्र कॉलेज छात्रों को एक वर्ष के लिए मुफ्त एआई प्लस सब्सक्रिप्शन देने की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को पढ़ाई, शोध और कौशल विकास के लिए उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) उपकरणों तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना है।
गूगल ने अपने आधिकारिक ब्लॉग में बताया कि इस विशेष ऑफर के तहत पात्र विद्यार्थियों को जेमिनी ओमनी का उपयोग करने की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही सामान्य उपयोगकर्ताओं की तुलना में दोगुनी उपयोग सीमा, 400 जीबी क्लाउड स्टोरेज क्षमता और कई अतिरिक्त एआई सुविधाएं बिना किसी शुल्क के एक वर्ष तक उपलब्ध कराई जाएंगी।
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गूगल ने एआई सदस्यता के साथ-साथ अपने जेमिनी और गूगल सर्च प्लेटफॉर्म पर कई नए शिक्षण उपकरण भी पेश किए हैं। विद्यार्थियों को एक विशेष स्टूडेंट हब उपलब्ध कराया जाएगा, जहां वे अपनी पढ़ाई को व्यवस्थित कर सकेंगे और जेमिनी की शैक्षणिक सुविधाओं का उपयोग कर पाएंगे।
कंपनी ने एक नया स्टडी नोटबुक फीचर भी शुरू किया है, जो विद्यार्थियों को व्यक्तिगत अध्ययन सहायता प्रदान करेगा। यह प्रणाली डायग्नोस्टिक क्विज के माध्यम से छात्रों की मजबूत और कमजोर विषयगत समझ की पहचान करेगी। इसके आधार पर विद्यार्थियों के लिए उनकी आवश्यकताओं और लक्ष्यों के अनुरूप छोटे-छोटे अध्ययन कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे।
गूगल ने बताया कि जेमिनी लाइव को भी और उन्नत बनाया जा रहा है। अब विद्यार्थी चलते-फिरते आवाज के माध्यम से डीप रिसर्च रिपोर्ट मंगा सकेंगे और उन पर बातचीत कर सकेंगे। इससे शोध और जटिल विषयों को समझना अधिक आसान हो जाएगा।
इसके अलावा, गूगल सर्च में जोड़ी गई नई सुविधाओं के माध्यम से छात्र कठिन अवधारणाओं को समझने के लिए इंटरैक्टिव विजुअल सामग्री तैयार कर सकेंगे, साथ ही वे विभिन्न विषयों और प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित अभ्यास क्विज भी हल कर सकेंगे। वहीं गूगल लेंस की सहायता से किसी भी विषय को चरणबद्ध तरीके से समझने में मदद मिलेगी।
विद्यार्थी अपने शैक्षणिक प्रोजेक्ट्स को व्यवस्थित करने के लिए नोटबुक बना सकेंगे और अध्ययन सामग्री को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने के लिए अनुकूलित फाइलें भी तैयार कर सकेंगे।
गूगल का कहना है कि सर्च, जेमिनी और यूट्यूब पर उपलब्ध सभी शैक्षणिक उपकरण सुरक्षा को ध्यान में रखकर विकसित किए गए हैं। इनका डिजाइन शिक्षण विज्ञान के सिद्धांतों पर आधारित है और इनका उद्देश्य व्यक्तिगत सीखने के अनुभव को बेहतर बनाना है, जबकि शिक्षकों की भूमिका को केंद्र में बनाए रखना है।
कंपनी के अनुसार, यह छात्र ऑफर उन 140 से अधिक देशों और बाजारों में उपलब्ध है जहां गूगल एआई प्लस सेवा संचालित होती है। भारत में पात्र विद्यार्थी 31 दिसंबर 2026 तक इस मुफ्त ऑफर का लाभ उठा सकते हैं। इसके लिए निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया और अन्य लागू शर्तों को पूरा करना होगा।
--आईएएनएस
डीबीपी
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