Delhi सरकार ने कक्षा 9 में R-3 अनिवार्यता का नियम हटाया, CBSE गाइडलाइंस लागू होंगी
दिल्ली सरकार ने संशोधित कक्षा नौ परीक्षा और पदोन्नति नीति में उस प्रावधान को वापस ले लिया है, जिसके तहत पिछली कक्षा में चुनी गई तीसरी (आर-3) में उत्तीर्ण नहीं होने वाले छात्रों को कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए अयोग्य माना जाता था। इससे पहले, शिक्षा निदेशालय ने कहा था कि कक्षा 9 में आर-3 में असफल होने वाले छात्रों को अन्य पदोन्नति मानदंड पूरे करने पर अगली कक्षा में भेजा जा सकता है, लेकिन उन्हें बोर्ड परीक्षा में शामिल होने के लिए कक्षा 10 में इस विषय को उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। मंगलवार को जारी शुद्धिपत्र के अनुसार, अब इस प्रावधान को हटा दिया गया है और आर-3 को लेकर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के दिशा-निर्देश लागू होंगे।
एक अधिकारी ने बताया कि पहले जारी आदेश की व्याख्या को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी, जिसके कारण यह प्रावधान वापस लिया गया। सीबीएसई ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-स्कूल शिक्षा (एनसीएफ-एसई) 2023 के तहत मई में तीन नीति लागू की थी। इस नीति के तहत कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया गया है, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए।
यह व्यवस्था एक जुलाई से लागू हुई। सीबीएसई दिशा-निर्देशों के अनुसार, तीसरी (आर-3) का मूल्यांकन पूरी तरह स्कूल स्तर पर आंतरिक मूल्यांकन के माध्यम से किया जाएगा और इसके लिए कक्षा 10 की अलग बोर्ड परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी। आर-3 के अंक फाइनल सीबीएसई प्रमाणपत्र पर दर्ज होंगे, लेकिन कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में बैठने की छात्र की पात्रता पर इन अंकों का कोई असर नहीं पड़ेगा।
Amit Shah तमिलनाडु और West Bengal के दौरे पर रहेंगे, महाबलीपुरम में बैठक की अध्यक्षता करेंगे
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह महाबलीपुरम में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक की अध्यक्षता करेंगे और सिलीगुड़ी में सीमा सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री बृहस्पतिवार को दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक की अध्यक्षता करेंगे और शाम को वहां स्थित शोर मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना के अलावा केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह और लक्षद्वीप शामिल हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद के उपाध्यक्ष हैं।
इस बैठक में दक्षिणी क्षेत्र के सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल और प्रशासक तथा प्रत्येक राज्य के दो वरिष्ठ मंत्री शामिल होंगे। सरकार की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, ‘‘राज्य सरकारों के मुख्य सचिव/सलाहकार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में हिस्सा लेंगे।’’ बयान में कहा गया कि सदस्य राज्यों के मुख्यमंत्री बारी-बारी से परिषद के उपाध्यक्ष बनते हैं। दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक का आयोजन भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर-राज्य परिषद सचिवालय द्वारा तमिलनाडु सरकार की मेजबानी में किया जा रहा है।
इस व्यवस्था के तहत क्षेत्रीय परिषद ने मुख्य सचिवों के स्तर पर एक स्थायी समिति का भी गठन किया है। बयान में कहा गया, ‘‘राज्यों द्वारा प्रस्तावित मुद्दों को क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति के समक्ष चर्चा के लिए रखा जाता है और वहां विचार-विमर्श के बाद शेष मुद्दों को क्षेत्रीय परिषद की बैठक में विचार के लिए प्रस्तुत किया जाता है।’’ इसके बाद अमित शाह पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी जाएंगे, जहां शुक्रवार को वह सीमा सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों से बातचीत करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि गृह मंत्री शुक्रवार शाम तीन नए आपराधिक कानूनों पर आधारित एक प्रदर्शनी का उद्घाटन भी करेंगे।
इसके अलावा वह शनिवार को शहर में सीमा सुरक्षा से संबंधित बैठक की अध्यक्षता करेंगे। राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 15 से 22 के तहत दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद समेत पांच क्षेत्रीय परिषदों की स्थापना की गई थी। ये परिषद दो या दो से अधिक राज्यों अथवा केंद्र और राज्यों से जुड़े मुद्दों पर संवाद और चर्चा के लिए एक व्यवस्थित तंत्र उपलब्ध कराती हैं तथा आपसी सहयोग को बढ़ावा देने का मंच प्रदान करती हैं।
सलाहकारी भूमिका वाली ये परिषद पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों के बीच आपसी समझ और सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण साबित हुई हैं। बयान में कहा गया, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में क्षेत्रीय परिषदों की बैठकें संवाद के माध्यम से समाधान तलाशने के एक प्रभावी मंच के रूप में विकसित हुई हैं।’’ जून 2014 से अब तक पिछले 12 वर्षों में विभिन्न क्षेत्रीय परिषदों और उनकी स्थायी समितियों की कुल 69 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। बयान के अनुसार बैठकों में राष्ट्रीय महत्व के व्यापक मुद्दों पर भी चर्चा की जाती है, जिनमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध, विशेष रूप से दुष्कर्म के मामलों की त्वरित जांच और शीघ्र निपटारे के लिए त्वरित विशेष अदालतों का क्रियान्वयन तथा शिक्षा से जुड़े विषय शामिल हैं।
इसके अलावा क्षेत्रीय स्तर पर साझा हितों से जुड़े मुद्दों, जैसे आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, जल बंटवारे से संबंधित महत्वपूर्ण परियोजनाएं, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) और नागरिक उड्डयन से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया जाता है।
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