Amit Shah तमिलनाडु और West Bengal के दौरे पर रहेंगे, महाबलीपुरम में बैठक की अध्यक्षता करेंगे
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह महाबलीपुरम में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक की अध्यक्षता करेंगे और सिलीगुड़ी में सीमा सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री बृहस्पतिवार को दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक की अध्यक्षता करेंगे और शाम को वहां स्थित शोर मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना के अलावा केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह और लक्षद्वीप शामिल हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद के उपाध्यक्ष हैं।
इस बैठक में दक्षिणी क्षेत्र के सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल और प्रशासक तथा प्रत्येक राज्य के दो वरिष्ठ मंत्री शामिल होंगे। सरकार की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, ‘‘राज्य सरकारों के मुख्य सचिव/सलाहकार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में हिस्सा लेंगे।’’ बयान में कहा गया कि सदस्य राज्यों के मुख्यमंत्री बारी-बारी से परिषद के उपाध्यक्ष बनते हैं। दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक का आयोजन भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर-राज्य परिषद सचिवालय द्वारा तमिलनाडु सरकार की मेजबानी में किया जा रहा है।
इस व्यवस्था के तहत क्षेत्रीय परिषद ने मुख्य सचिवों के स्तर पर एक स्थायी समिति का भी गठन किया है। बयान में कहा गया, ‘‘राज्यों द्वारा प्रस्तावित मुद्दों को क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति के समक्ष चर्चा के लिए रखा जाता है और वहां विचार-विमर्श के बाद शेष मुद्दों को क्षेत्रीय परिषद की बैठक में विचार के लिए प्रस्तुत किया जाता है।’’ इसके बाद अमित शाह पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी जाएंगे, जहां शुक्रवार को वह सीमा सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों से बातचीत करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि गृह मंत्री शुक्रवार शाम तीन नए आपराधिक कानूनों पर आधारित एक प्रदर्शनी का उद्घाटन भी करेंगे।
इसके अलावा वह शनिवार को शहर में सीमा सुरक्षा से संबंधित बैठक की अध्यक्षता करेंगे। राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 15 से 22 के तहत दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद समेत पांच क्षेत्रीय परिषदों की स्थापना की गई थी। ये परिषद दो या दो से अधिक राज्यों अथवा केंद्र और राज्यों से जुड़े मुद्दों पर संवाद और चर्चा के लिए एक व्यवस्थित तंत्र उपलब्ध कराती हैं तथा आपसी सहयोग को बढ़ावा देने का मंच प्रदान करती हैं।
सलाहकारी भूमिका वाली ये परिषद पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों के बीच आपसी समझ और सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण साबित हुई हैं। बयान में कहा गया, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में क्षेत्रीय परिषदों की बैठकें संवाद के माध्यम से समाधान तलाशने के एक प्रभावी मंच के रूप में विकसित हुई हैं।’’ जून 2014 से अब तक पिछले 12 वर्षों में विभिन्न क्षेत्रीय परिषदों और उनकी स्थायी समितियों की कुल 69 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। बयान के अनुसार बैठकों में राष्ट्रीय महत्व के व्यापक मुद्दों पर भी चर्चा की जाती है, जिनमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध, विशेष रूप से दुष्कर्म के मामलों की त्वरित जांच और शीघ्र निपटारे के लिए त्वरित विशेष अदालतों का क्रियान्वयन तथा शिक्षा से जुड़े विषय शामिल हैं।
इसके अलावा क्षेत्रीय स्तर पर साझा हितों से जुड़े मुद्दों, जैसे आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, जल बंटवारे से संबंधित महत्वपूर्ण परियोजनाएं, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) और नागरिक उड्डयन से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया जाता है।
Delhi High Court ने बेघरों के मताधिकार पर फैसला सुरक्षित रखा, SIR प्रक्रिया का था मामला
दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को उस जनहित याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत घर-घर जाकर गणना करने की प्रक्रिया के कारण बेघर लोगों के मताधिकार से वंचित रह जाने की आशंका जताई गई है। मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने इंदु प्रकाश सिंह की याचिका पर सुनवाई के बाद कहा, ‘‘हम आदेश पारित करेंगे।’’ याचिका में अधिकारियों को एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बेघर या विस्थापित लोगों के नाम मतदाता सूची में दर्ज करने या उन्हें सूची में बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। पीठ ने कहा कि यह अदालतों का काम नहीं, बल्कि निर्वाचन आयोग का दायित्व है कि वह ऐसा तंत्र विकसित करे जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि बेघर या तोड़फोड़ की कार्रवाई के कारण विस्थापित हुए लोग एसआईआर की प्रक्रिया से बाहर न रह जाएं।
अदालत ने कहा कि हर मामले का समाधान अदालतों पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि जनहित याचिका में किसी ऐसे नागरिक का कोई विशिष्ट उदाहरण नहीं दिया गया है, जिसका नाम इस प्रक्रिया के कारण छूट गया हो। पीठ ने कहा, ‘‘आपको ऐसे विशिष्ट व्यक्तियों की ओर इशारा करना होगा, जिन्हें इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है।
सब कुछ आपकी अपनी धारणा पर आधारित है।’’ निर्वाचन आयोग के वकील ने अदालत में कहा कि आयोग बिना पते वाले लोगों के मताधिकार से वंचित होने की आशंका से अवगत है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए पहले से ही एक प्रक्रिया निर्धारित है। हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने इस दावे का विरोध किया।
पीठ ने कहा, ‘‘हमसे इन मुद्दों पर फैसला करने के लिए न कहें। यह उनका काम है कि वे तय करें कि इस प्रक्रिया को संचालित करने का अधिक उपयुक्त तरीका क्या हो। हर बात अदालतों पर नहीं छोड़ सकते।’’ याचिका में कहा गया है कि दिल्ली में लगभग तीन लाख बेघर लोग हैं और एसआईआर के लिए निर्वाचन आयोग की घर-घर जाकर गणना करने की प्रक्रिया उनके लिए एक ‘‘संरचनात्मक बाधा’’ है।
जनहित याचिका में कहा गया, ‘‘निर्वाचन आयोग के 14 मई 2026 के निर्देश संख्या 23/2025-ईआरएस (खंड-2) के तहत दिल्ली में जारी एसआईआर प्रक्रिया इस धारणा पर आधारित है कि बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ) मतदाता सूची में दर्ज पतों पर जाकर मतदाताओं की पहचान और उनकी मौजूदगी की पुष्टि कर सकेंगे।’’ याचिका में यह भी कहा गया है कि पहले से बेघर, हाल में बेघर हुए या तोड़फोड़ की कार्रवाई की वजह से इस प्रक्रिया के कारण विस्थापित लोगों के मतदाता सूची से बाहर रह जाने और इसके परिणामस्वरूप उनके मताधिकार से वंचित होने का खतरा है। याचिका के अनुसार, इससे न केवल उनके मताधिकार का उल्लंघन हो सकता है, बल्कि भविष्य में उनकी नागरिकता पर भी सवाल उठने की आशंका है।
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