Congress ने मुख्यमंत्रियों से मांगी शिक्षा सुधार रिपोर्ट, 1 महीने का समय दिया
कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने बुधवार को पार्टी शासित चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कहा कि वे अपने-अपने प्रदेशों में शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधारों पर रिपोर्ट तैयार कर एक महीने के भीतर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को सौंपें। पार्टी ने यह ऐलान भी किया कि ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम देशभर के करीब 800 शहरों में आयोजित किया जाएगा और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इनमें से कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। यह कार्यक्रम पहले ही कोटा, देहरादून और प्रयागराज में आयोजित किया जा चुका है तथा आगामी शनिवार को पुणे में इसका आयोजन होगा।
पार्टी मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ में हुई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में युवाओं और छात्रों के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता मल्लिकार्जुन खरगे ने की। इसमें पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, जयराम रमेश और के. सी. वेणुगोपाल समेत पार्टी के शीर्ष नेता शामिल हुए।
कांग्रेस के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी (तेलंगाना), वी. डी. सतीशन (केरल), सुखविंदर सिंह सुक्खू (हिमाचल प्रदेश) और डी. के. शिवकुमार (कर्नाटक) भी बैठक में मौजूद थे। बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने संवाददाताओं से कहा कि पार्टी अध्यक्ष खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चारों मुख्यमंत्रियों से कहा है कि वे एक महीने के भीतर अपने-अपने राज्यों की शिक्षा एवं परीक्षा प्रणाली में जरूरी सुधारों पर रिपोर्ट तैयार करें। उन्होंने कहा कि वे अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष को सौंपेंगे।
सूत्रों ने बताया कि गांधी ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि वे छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने और अपने-अपने राज्यों की शिक्षा एवं परीक्षा प्रणाली में सुधार के उद्देश्य से शिक्षा विशेषज्ञों और सभी संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श कर रिपोर्ट तैयार करें। इससे पहले अपने उद्घाटन संबोधन में खरगे ने नरेन्द्र मोदी सरकार पर छात्रों का भविष्य ‘‘तबाह’’ करने का आरोप लगाया और कहा कि अब समय आ गया है कि कांग्रेस युवाओं के लिए एक व्यापक ‘एजुकेशन-टू-एम्प्लॉयमेंट रोडमैप’ तैयार करे। बैठक में पारित प्रस्ताव में कार्य समिति ने युवाओं की स्थिति पर गहरी चिंता जताई।
पार्टी ने आरोप लगाया कि युवा पीढ़ी को मोदी सरकार से हर मोर्चे पर निराशा और विश्वासघात का सामना करना पड़ रहा है। प्रस्ताव में कहा गया, ‘‘पिछले एक दशक में पेपर लीक महामारी का रूप ले चुका है और 2014 से अब तक पेपर लीक के कम से कम 152 मामले सामने आए हैं।’’ इसमें कहा गया कि हाल में नीट परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित किए जाने के कारण कम से कम 26 छात्रों ने आत्महत्या की, जबकि पिछले पांच वर्षों में इसी तरह के कारणों से 90 से अधिक छात्रों ने अपनी जान गंवाई है। कांग्रेस कार्य समिति ने कहा कि बेरोजगारी का सबसे अधिक खामियाजा युवा भुगत रहे हैं और 12 साल बीत जाने तथा अवसरों में कमी आने के साथ उनकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
उसने कहा कि शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी ‘‘सरकार की व्यवस्था संबंधी विफलता के संकट’’ में बदल गई है। प्रस्ताव में कहा गया कि स्नातक और स्नातकोत्तर युवाओं में बेरोजगारी दर औपचारिक शिक्षा नहीं लेने वालों की तुलना में भी अधिक है। कार्य समिति ने छात्र आंदोलनों के खिलाफ मोदी सरकार द्वारा ‘‘मनमाने और क्रूर दमन’’ की कड़ी निंदा की।
इसमें युवतियों और बच्चों पर हमले, बिजली के झटके देने वाली लाठियों, आंसू गैस, पैलेट गन और एके-47 के इस्तेमाल तथा असहमति की आवाजों पर ‘‘खुली सेंसरशिप’’ का आरोप लगाया गया। प्रस्ताव में कहा गया, ‘‘प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का संसद का सामना करने और इन गंभीर विफलताओं पर जवाब देने से इनकार भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में न केवल उनकी कायरता को दर्शाता है, बल्कि देश के भविष्य के प्रति उनकी पूर्ण उदासीनता और उपेक्षा को भी दिखाता है।’’ कांग्रेस कार्य समिति ने ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के माध्यम से देश के युवाओं की आवाज और उनकी चिंताओं को सक्रिय रूप से उठाने के लिए राहुल गांधी की सराहना की। पार्टी ने दावा किया कि इस अभियान को व्यापक स्तर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।
कार्य समिति ने कहा कि राहुल गांधी ने झारखंड के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रति संवेदनशील और न्यायपूर्ण रवैया अपनाने का आग्रह भी किया। उसने कहा कि गांधी लगातार यह स्पष्ट करते रहे हैं कि भारत की शिक्षा व्यवस्था को निजीकरण, केंद्रीकरण और आरएसएस-भाजपा की ‘‘रूढ़ीवादी बेड़ियों’’ के बंधक के रूप में नहीं रखा जा सकता। कांग्रेस कार्य समिति ने यह भी कहा कि छात्र संगठनों और एकजुट विपक्ष के संसद के भीतर और बाहर लगातार दबाव के कारण शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
Delhi सरकार ने कक्षा 9 में R-3 अनिवार्यता का नियम हटाया, CBSE गाइडलाइंस लागू होंगी
दिल्ली सरकार ने संशोधित कक्षा नौ परीक्षा और पदोन्नति नीति में उस प्रावधान को वापस ले लिया है, जिसके तहत पिछली कक्षा में चुनी गई तीसरी (आर-3) में उत्तीर्ण नहीं होने वाले छात्रों को कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए अयोग्य माना जाता था। इससे पहले, शिक्षा निदेशालय ने कहा था कि कक्षा 9 में आर-3 में असफल होने वाले छात्रों को अन्य पदोन्नति मानदंड पूरे करने पर अगली कक्षा में भेजा जा सकता है, लेकिन उन्हें बोर्ड परीक्षा में शामिल होने के लिए कक्षा 10 में इस विषय को उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। मंगलवार को जारी शुद्धिपत्र के अनुसार, अब इस प्रावधान को हटा दिया गया है और आर-3 को लेकर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के दिशा-निर्देश लागू होंगे।
एक अधिकारी ने बताया कि पहले जारी आदेश की व्याख्या को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी, जिसके कारण यह प्रावधान वापस लिया गया। सीबीएसई ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-स्कूल शिक्षा (एनसीएफ-एसई) 2023 के तहत मई में तीन नीति लागू की थी। इस नीति के तहत कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया गया है, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए।
यह व्यवस्था एक जुलाई से लागू हुई। सीबीएसई दिशा-निर्देशों के अनुसार, तीसरी (आर-3) का मूल्यांकन पूरी तरह स्कूल स्तर पर आंतरिक मूल्यांकन के माध्यम से किया जाएगा और इसके लिए कक्षा 10 की अलग बोर्ड परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी। आर-3 के अंक फाइनल सीबीएसई प्रमाणपत्र पर दर्ज होंगे, लेकिन कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में बैठने की छात्र की पात्रता पर इन अंकों का कोई असर नहीं पड़ेगा।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi







