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Goa Nightclub Fire: Bombay High Court ने रद्द की 3 आरोपियों की जमानत, 2 हफ्ते में सरेंडर का आदेश

मुंबई उच्च न्यायालय ने गोवा नाइटक्लब अग्निकांड मामले में तीन आरोपियों को दी गई जमानत यह कहते हुए रद्द कर दी अधीनस्थ अदालत जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री पर ठीक से विचार नहीं कर पाई और उसकी यह टिप्पणी गलत थी कि यह अपराध हत्या या डकैती जितना जघन्य नहीं था। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से प्रथम दृष्टया संकेत मिलता है कि रेस्तरां बिना लाइसेंस के संचालित किया जा रहा था और उसका ढांचा अनधिकृत था। साथ ही, आरोपी और उसके साझेदार कथित तौर पर पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना परिसर में आतिशबाजी करने के जोखिमों से परिचित थे।

मुंबई उच्च न्यायालय की गोवा पीठ की न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले ने अधीनस्थ अदालत द्वारा आरोपियों को दी गई जमानत को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 18 अगस्त को यह आदेश पारित किया। उन्होंने तीनों आरोपियों को अधीनस्थ अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया। छह दिसंबर, 2025 को अर्पोरा स्थित ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ नाइटक्लब में लगी भीषण आग में 25 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 50 अन्य घायल हुए थे।

सौरभ लूथरा और गौरव लूथरा भाई हैं। वे अपने व्यावसायिक साझेदार अजय गुप्ता के साथ ‘मैसर्स बीइंग जीएस हॉस्पिटैलिटी अर्पोरा एलएलपी’ में साझेदार थे, जो इस नाइटक्लब का संचालन करती थी। तीनों आरोपियों को इस साल अप्रैल में अधीनस्थ अदालत ने जमानत दी थी।

अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दो सप्ताह के भीतर सत्र अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। हालांकि, अदालत ने उन्हें आत्मसमर्पण के बाद नए सिरे से जमानत याचिका दायर करने की अनुमति दी। अदालत राज्य सरकार द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोपियों को जमानत देने के सत्र अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी।

राज्य सरकार ने दलील दी कि सत्र अदालत अपराध की गंभीरता को समझ नहीं पाई। राज्य के अनुसार, कथित आपराधिक लापरवाही, लापरवाह आचरण और वैधानिक अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के कारण 25 लोगों की मौत हुई। उच्च न्यायालय ने कहा कि जमानत के लिए दायर याचिका आरोपियों की दूसरी याचिका थी और उनकी पहली याचिका महज दो महीने पहले खारिज की गई थी।

अदालत ने कहा कि सत्र अदालत ने जमानत देने को उचित ठहराने के लिए आरोपपत्र दाखिल होने के अलावा किसी अन्य बदली परिस्थिति का उल्लेख नहीं किया था। उच्च न्यायालय ने इस निष्कर्ष को भी खारिज कर दिया कि आरोपी के फरार होने का कोई खतरा नहीं है। अदालत ने कहा कि जिस दिन प्राथमिकी दर्ज हुई, उसी दिन आरोपी देश छोड़कर फरार हो गया था और बाद में उसे भगोड़ा घोषित किया गया।

अदालत ने कहा कि आरोपपत्र दाखिल होने से आरोपों की गंभीरता कम नहीं हो जाती और न ही इससे आरोपी को जमानत पाने का कोई अधिकार मिल जाता है। उच्च न्यायालय ने कहा कि सत्र अदालत की यह टिप्पणी गलत थी कि अपराध हत्या या डकैती जितना जघन्य नहीं था। उसने इस बात पर बल दिया कि कथित अपराध की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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Congress ने मुख्यमंत्रियों से मांगी शिक्षा सुधार रिपोर्ट, 1 महीने का समय दिया

कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने बुधवार को पार्टी शासित चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कहा कि वे अपने-अपने प्रदेशों में शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधारों पर रिपोर्ट तैयार कर एक महीने के भीतर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को सौंपें। पार्टी ने यह ऐलान भी किया कि ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम देशभर के करीब 800 शहरों में आयोजित किया जाएगा और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इनमें से कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। यह कार्यक्रम पहले ही कोटा, देहरादून और प्रयागराज में आयोजित किया जा चुका है तथा आगामी शनिवार को पुणे में इसका आयोजन होगा।

पार्टी मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ में हुई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में युवाओं और छात्रों के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता मल्लिकार्जुन खरगे ने की। इसमें पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, जयराम रमेश और के. सी. वेणुगोपाल समेत पार्टी के शीर्ष नेता शामिल हुए।

कांग्रेस के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी (तेलंगाना), वी. डी. सतीशन (केरल), सुखविंदर सिंह सुक्खू (हिमाचल प्रदेश) और डी. के. शिवकुमार (कर्नाटक) भी बैठक में मौजूद थे। बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने संवाददाताओं से कहा कि पार्टी अध्यक्ष खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चारों मुख्यमंत्रियों से कहा है कि वे एक महीने के भीतर अपने-अपने राज्यों की शिक्षा एवं परीक्षा प्रणाली में जरूरी सुधारों पर रिपोर्ट तैयार करें। उन्होंने कहा कि वे अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष को सौंपेंगे।

सूत्रों ने बताया कि गांधी ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि वे छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने और अपने-अपने राज्यों की शिक्षा एवं परीक्षा प्रणाली में सुधार के उद्देश्य से शिक्षा विशेषज्ञों और सभी संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श कर रिपोर्ट तैयार करें। इससे पहले अपने उद्घाटन संबोधन में खरगे ने नरेन्द्र मोदी सरकार पर छात्रों का भविष्य ‘‘तबाह’’ करने का आरोप लगाया और कहा कि अब समय आ गया है कि कांग्रेस युवाओं के लिए एक व्यापक ‘एजुकेशन-टू-एम्प्लॉयमेंट रोडमैप’ तैयार करे। बैठक में पारित प्रस्ताव में कार्य समिति ने युवाओं की स्थिति पर गहरी चिंता जताई।

पार्टी ने आरोप लगाया कि युवा पीढ़ी को मोदी सरकार से हर मोर्चे पर निराशा और विश्वासघात का सामना करना पड़ रहा है। प्रस्ताव में कहा गया, ‘‘पिछले एक दशक में पेपर लीक महामारी का रूप ले चुका है और 2014 से अब तक पेपर लीक के कम से कम 152 मामले सामने आए हैं।’’ इसमें कहा गया कि हाल में नीट परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित किए जाने के कारण कम से कम 26 छात्रों ने आत्महत्या की, जबकि पिछले पांच वर्षों में इसी तरह के कारणों से 90 से अधिक छात्रों ने अपनी जान गंवाई है। कांग्रेस कार्य समिति ने कहा कि बेरोजगारी का सबसे अधिक खामियाजा युवा भुगत रहे हैं और 12 साल बीत जाने तथा अवसरों में कमी आने के साथ उनकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।

उसने कहा कि शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी ‘‘सरकार की व्यवस्था संबंधी विफलता के संकट’’ में बदल गई है। प्रस्ताव में कहा गया कि स्नातक और स्नातकोत्तर युवाओं में बेरोजगारी दर औपचारिक शिक्षा नहीं लेने वालों की तुलना में भी अधिक है। कार्य समिति ने छात्र आंदोलनों के खिलाफ मोदी सरकार द्वारा ‘‘मनमाने और क्रूर दमन’’ की कड़ी निंदा की।

इसमें युवतियों और बच्चों पर हमले, बिजली के झटके देने वाली लाठियों, आंसू गैस, पैलेट गन और एके-47 के इस्तेमाल तथा असहमति की आवाजों पर ‘‘खुली सेंसरशिप’’ का आरोप लगाया गया। प्रस्ताव में कहा गया, ‘‘प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का संसद का सामना करने और इन गंभीर विफलताओं पर जवाब देने से इनकार भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में न केवल उनकी कायरता को दर्शाता है, बल्कि देश के भविष्य के प्रति उनकी पूर्ण उदासीनता और उपेक्षा को भी दिखाता है।’’ कांग्रेस कार्य समिति ने ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के माध्यम से देश के युवाओं की आवाज और उनकी चिंताओं को सक्रिय रूप से उठाने के लिए राहुल गांधी की सराहना की। पार्टी ने दावा किया कि इस अभियान को व्यापक स्तर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।

कार्य समिति ने कहा कि राहुल गांधी ने झारखंड के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रति संवेदनशील और न्यायपूर्ण रवैया अपनाने का आग्रह भी किया। उसने कहा कि गांधी लगातार यह स्पष्ट करते रहे हैं कि भारत की शिक्षा व्यवस्था को निजीकरण, केंद्रीकरण और आरएसएस-भाजपा की ‘‘रूढ़ीवादी बेड़ियों’’ के बंधक के रूप में नहीं रखा जा सकता। कांग्रेस कार्य समिति ने यह भी कहा कि छात्र संगठनों और एकजुट विपक्ष के संसद के भीतर और बाहर लगातार दबाव के कारण शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा।

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  Sports

टेस्ट के 6 गेंदबाज, जिन्होंने पहली गेंद पर लिए सबसे ज्यादा विकेट, 149 साल के इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा

6 bowlers most take wicket on the first ball in a Test: ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क ने टेस्ट क्रिकेट में इतिहास रच दिया. बांग्लादेश के खिलाफ दूसरे टेस्ट की पहली ही गेंद पर शादमान इस्लाम को आउट कर वह टेस्ट इतिहास में सबसे ज्यादा बार पहली गेंद पर विकेट लेने वाले दुनिया के पहले गेंदबाज बन गए. उन्होंने वेस्टइंडीज के पेड्रो कोलिन्स का रिकॉर्ड तोड़ा. इसके साथ ही स्टार्क ने टेस्ट के पहले ओवर में 9 विकेट पूरे कर जेम्स एंडरसन का सर्वकालिक रिकॉर्ड भी ध्वस्त कर दिया. Sat, 22 Aug 2026 17:54:06 +0530

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