Maharashtra FDA ने 25 लाख रुपये की सामग्री जब्त की, 5 होटलों के लाइसेंस निलंबित
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने प्रतिबंधित सामान और दूध व डेयरी उत्पादों सहित करीब 25 लाख रुपये मूल्य के खाद्य पदार्थ जब्त किए हैं तथा नियमों के उल्लंघन के मामले में पांच होटल व रेस्तरां के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, एफडीए ने मंगलवार को 31 होटल, रेस्तरां, सड़क किनारे खाने-पीने की दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया।
बयान के अनुसार इसके बाद 22 प्रतिष्ठानों को सुधार के लिए नोटिस जारी किए गए, जबकि पांच के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए। बयान के अनुसार प्रतिबंधित सामान के खिलाफ कार्रवाई के तहत गुटखा, पान मसाला, सुगंधित सुपारी और अन्य प्रतिबंधित वस्तुएं शामिल थीं। एफडीए ने बताया कि मुंबई, कोंकण, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर संभागों के आठ प्रतिष्ठानों से 11.40 लाख रुपये मूल्य का सामान जब्त किया गया।
एफडीए के अनुसार, इस मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया, आठ प्राथमिकी दर्ज की गईं और छह प्रतिष्ठानों को सील कर दिया गया। विभाग ने करीब 14,552 किलोग्राम अन्य खाद्य उत्पाद भी जब्त किए, जिनमें दूध और दूध से बने उत्पाद, बेकरी सामान तथा अन्य खाद्य सामग्री शामिल हैं। इनकी कीमत लगभग 13.90 लाख रुपये बताई गई है।
कुछ मामलों में नमूने जांच के लिए अधिकृत प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं। लाइसेंस निलंबन का सामना करने वाले प्रतिष्ठानों में मुंबई के मलाड (पश्चिम) स्थित होटल राधा भी शामिल है। एफडीए के अनुसार, वहां रसोई में चूहे पाए गए और जल निकासी व साफ-सफाई की व्यवस्था में गंभीर खामियां मिलीं।
इसके बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत प्रतिष्ठान का खाद्य कारोबार लाइसेंस निलंबित कर दिया गया। एफडीए ने खारघर स्थित सरस्वती कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में संचालित एक खाद्य प्रतिष्ठान का लाइसेंस भी निलंबित किया। वहां खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और कीट नियंत्रण व्यवस्था में कमियां पाई गई थीं।
विभाग ने कहा कि कुर्ला स्थित जनता तवा एंड ग्रिल के खिलाफ भी कार्रवाई की, जहां खाद्य सुरक्षा से जुड़ी गंभीर लापरवाहियां सामने आईं। एक अन्य जांच में छत्रपति संभाजीनगर जिले के वैजापुर में देवगिरी अस्पताल के पास स्थित परमेष्ठी सुपर शॉप में अधिकारियों ने एक्सपायर (उपयोग की तिथि समाप्त) हो चुके खाद्य उत्पादों की बिक्री और अस्वच्छ स्थिति पाई। इसके बाद खाद्य कारोबार संचालक के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई।
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे के नेतृत्व वाले एफडीए ने बताया कि राज्यभर में यह कार्रवाई ‘सुरक्षित भोजन, सुरक्षित महाराष्ट्र’ अभियान के तहत की जा रही है, ताकि खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। एफडीए ने खाद्य कारोबारियों से उचित भंडारण व्यवस्था, तापमान नियंत्रण, साफ-सफाई और कीट नियंत्रण उपायों को बनाए रखने की अपील की। विभाग ने चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
Goa Nightclub Fire: Bombay High Court ने रद्द की 3 आरोपियों की जमानत, 2 हफ्ते में सरेंडर का आदेश
मुंबई उच्च न्यायालय ने गोवा नाइटक्लब अग्निकांड मामले में तीन आरोपियों को दी गई जमानत यह कहते हुए रद्द कर दी अधीनस्थ अदालत जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री पर ठीक से विचार नहीं कर पाई और उसकी यह टिप्पणी गलत थी कि यह अपराध हत्या या डकैती जितना जघन्य नहीं था। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से प्रथम दृष्टया संकेत मिलता है कि रेस्तरां बिना लाइसेंस के संचालित किया जा रहा था और उसका ढांचा अनधिकृत था। साथ ही, आरोपी और उसके साझेदार कथित तौर पर पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना परिसर में आतिशबाजी करने के जोखिमों से परिचित थे।
मुंबई उच्च न्यायालय की गोवा पीठ की न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले ने अधीनस्थ अदालत द्वारा आरोपियों को दी गई जमानत को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 18 अगस्त को यह आदेश पारित किया। उन्होंने तीनों आरोपियों को अधीनस्थ अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया। छह दिसंबर, 2025 को अर्पोरा स्थित ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ नाइटक्लब में लगी भीषण आग में 25 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 50 अन्य घायल हुए थे।
सौरभ लूथरा और गौरव लूथरा भाई हैं। वे अपने व्यावसायिक साझेदार अजय गुप्ता के साथ ‘मैसर्स बीइंग जीएस हॉस्पिटैलिटी अर्पोरा एलएलपी’ में साझेदार थे, जो इस नाइटक्लब का संचालन करती थी। तीनों आरोपियों को इस साल अप्रैल में अधीनस्थ अदालत ने जमानत दी थी।
अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दो सप्ताह के भीतर सत्र अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। हालांकि, अदालत ने उन्हें आत्मसमर्पण के बाद नए सिरे से जमानत याचिका दायर करने की अनुमति दी। अदालत राज्य सरकार द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोपियों को जमानत देने के सत्र अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी।
राज्य सरकार ने दलील दी कि सत्र अदालत अपराध की गंभीरता को समझ नहीं पाई। राज्य के अनुसार, कथित आपराधिक लापरवाही, लापरवाह आचरण और वैधानिक अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के कारण 25 लोगों की मौत हुई। उच्च न्यायालय ने कहा कि जमानत के लिए दायर याचिका आरोपियों की दूसरी याचिका थी और उनकी पहली याचिका महज दो महीने पहले खारिज की गई थी।
अदालत ने कहा कि सत्र अदालत ने जमानत देने को उचित ठहराने के लिए आरोपपत्र दाखिल होने के अलावा किसी अन्य बदली परिस्थिति का उल्लेख नहीं किया था। उच्च न्यायालय ने इस निष्कर्ष को भी खारिज कर दिया कि आरोपी के फरार होने का कोई खतरा नहीं है। अदालत ने कहा कि जिस दिन प्राथमिकी दर्ज हुई, उसी दिन आरोपी देश छोड़कर फरार हो गया था और बाद में उसे भगोड़ा घोषित किया गया।
अदालत ने कहा कि आरोपपत्र दाखिल होने से आरोपों की गंभीरता कम नहीं हो जाती और न ही इससे आरोपी को जमानत पाने का कोई अधिकार मिल जाता है। उच्च न्यायालय ने कहा कि सत्र अदालत की यह टिप्पणी गलत थी कि अपराध हत्या या डकैती जितना जघन्य नहीं था। उसने इस बात पर बल दिया कि कथित अपराध की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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