Muzaffarnagar Court: 100 केस जज रविकुमार दिवाकर की अदालत से स्थानांतरित किए गए
जिले के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रविकुमार दिवाकर के समक्ष लंबित हत्या के करीब 100 मामले जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में स्थानांतरित कर दिए गए हैं। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की ओर से चार माह में 10 मामलों में 22 लोगों को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद यह प्रशासनिक आदेश दिया गया है।
शासकीय वकील कुलदीप कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि न्यायाधीश दिवाकर की अध्यक्षता वाली त्वरित सुनवाई अदालत से ऐसे लंबित मामले जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार सिंह की अदालत में स्थानांतरित कर दिए गए हैं जिनमें मौत या आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने कहा कि न्यायाधीश दिवाकर की अदालत से मौत की सजा दिए जाने की आशंका को लेकर वकीलों और वादकारियों के बीच चिंता थी। उन्होंने कहा कि जिला न्यायाधीश ने मंगलवार को प्रशासनिक आदेश जारी कर इन मामलों को अपनी अदालत में वापस मंगाने का निर्णय लिया।
पिछले चार महीनों में दिवाकर की अदालत ने 10 मामलों में फैसला सुनाया है, जिनमें कुल 22 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई है।
Rajasthan Police हर बुधवार करेगी नशे के नेटवर्क की समीक्षा, डीजीपी ने दिए सख्त निर्देश
राजस्थान पुलिस अब मादक पदार्थों के खिलाफ अभियानों की हर बुधवार को राज्यभर में समीक्षा करेगी। एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने कहा कि नई रणनीति के तहत पुलिस का ध्यान केवल मादक पदार्थों की जब्ती और आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित न रहकर पूरे ड्रग आपूर्ति नेटवर्क को ध्वस्त करने पर रहेगा।
पुलिस मुख्यालय में बुधवार को पहली साप्ताहिक समीक्षा बैठक पुलिस महानिदेशक राजीव शर्मा की अध्यक्षता में हुई। पुलिस महानिदेशक ने अधिकारियों को मादक पदार्थों के स्रोत, आपूर्ति श्रृंखला और इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। शर्मा ने कहा कि नशे और नशे के कारोबार में शामिल लोगों को किसी भी परिस्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने कहा कि 2026 के पहले सात महीनों में मादक पदार्थों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में अधिक रही है। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि कार्रवाई केवल नशीले पदार्थों की जब्ती और आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि पुलिस को पूरे नेटवर्क की पहचान कर उसे जड़ से खत्म करने की दिशा में काम करना होगा। अधिकारियों को जिलों में ‘ड्रग हॉटस्पॉट’ चिह्नित कर उनकी नियमित निगरानी करने तथा तस्करों और उनके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
शर्मा ने बताया कि राज्य में ‘एंटी-नारकोटिक्स ऑपरेशन’ के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है, ताकि बेहतर समन्वय, खुफिया जानकारी जुटाने और निगरानी में मदद मिल सके। बैठक में पुलिस महानिरीक्षक (अपराध) शरत कविराज, पुलिस उपमहानिरीक्षक (एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स) अभिजीत सिंह, पुलिस अधीक्षक (एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स) अमित जैन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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