सुविंदर विक्की ने कभी इंश्योरेंस पॉलिसी बेची थी:खाने तक के पैसे नहीं थे; ‘आवारापन 2’ के किरदार को अपनी जिंदगी से जुड़ा बताया
एक्टर सुविंदर विक्की हाल ही में फिल्म ‘आवारापन 2’ में दिखाई दिए। कभी वो एक थिएटर प्ले से मिले सिर्फ 5 हजार रुपए लेकर मुंबई पहुंचे थे, लेकिन पैसे जल्दी खत्म हो गए और उन्हें एक महीने के अंदर पंजाब लौटना पड़ा। मुंबई में एक समय ऐसा भी आया, जब उनके पास खाने तक के पैसे नहीं थे। गुजारा करने के लिए उन्होंने इंश्योरेंस पॉलिसी बेचीं और छोटे-मोटे काम किए। करीब एक दशक तक पंजाबी फिल्मों में छोटे किरदार निभाने के बाद उन्होंने ‘उड़ता पंजाब’ से हिंदी फिल्मों में कदम रखा। इसके बाद ‘केसरी’, ‘माइलस्टोन’, ‘कोहरा’ और ‘धुरंधर द रिवेंज’ जैसे प्रोजेक्ट्स में काम किया है। हाल ही में सुविंदर विक्की ने दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में अपनी हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘आवारापन 2’ के बारे में बात की। पढ़िए इंटरव्यू की अहम बातें। सवाल: ‘आवारापन 2’ का हिस्सा बनने का मौका आपको कैसे मिला और जब आपको फिल्म ऑफर हुई तो पहला रिएक्शन क्या था? जवाब: मेरे लिए सबसे खुशी की बात यह है कि मैं ‘आवारापन 2’ से जुड़ा। करीब 18 साल पहले जब ‘आवारापन’ आई थी, तब उसने युवाओं के बीच एक अलग ही इमेज बनाई थी। फिल्म के म्यूजिक और इमरान हाशमी के काम को लेकर उस समय काफी चर्चा हुई थी। आज मेरी बेटी भी बड़ी हो गई है और वह भी ‘आवारापन’ को लेकर काफी एक्साइटेड रहती है। जैसे ही उसे पता चला कि मैं ‘आवारापन 2’ में काम कर रहा हूं, उसने फिल्म को लेकर बातें शुरू कर दीं। मेरे लिए यह एक बड़ी खुशी थी कि मैं उस फिल्म की दुनिया का हिस्सा बन रहा हूं, जिसे एक पीढ़ी ने इतना पसंद किया है। सवाल: ‘आवारापन 2’ में आपके किरदार जयदीप का अपना आंतरिक संघर्ष क्या है? जवाब: जयदीप का संघर्ष मुझे अपने जीवन के संघर्ष से काफी जुड़ा हुआ लगा। मेरी जिंदगी में भी एक समय यह द्वंद्व रहा कि क्या करना है, अभिनेता बनना है तो कैसे बनना है, कितनी स्ट्रगल करनी पड़ेगी, पैसे आएंगे या नहीं आएंगे, नौकरी के साथ यह काम करना पड़ेगा या पूरी तरह इसमें आना चाहिए। जयदीप के भीतर भी कुछ इसी तरह के सवाल हैं। वह सोचता है कि यहां रहूं या छोड़ दूं, साथ दूं या नहीं दूं। मुझे लगा कि उसके ये संघर्ष मेरे अपने संघर्षों से काफी मैच करते हैं। इसलिए मुझे इस किरदार से जुड़ना बहुत आसान लगा। सवाल: आपने अब तक कई ग्रे और नेगेटिव शेड्स वाले किरदार निभाए हैं। क्या अब कुछ अलग करने की इच्छा थी? जवाब: बिल्कुल। मन करता है कि कुछ अलग भी नजर आए। ऐसा नहीं है कि मैं रोमांस नहीं कर सकता। मेरा भी मन करता है कि पर्दे पर मेरी कोई हीरोइन हो, हम रोमांटिक सीन करें, तारों की छांव में बैठें या मैं उसके लिए मारधाड़ करूं और वह मेरे जख्मों पर मरहम लगाए। लेकिन फिर लगता है कि अगर हर कोई यही करेगा तो हम जो करते हैं, वह कौन करेगा? हमारे हिस्से में अच्छाई के साथ-साथ निगेटिविटी और बुराई को भी पर्दे पर उतारने की जिम्मेदारी आती है। सवाल: क्या किसी विलेन या ग्रे किरदार की सफलता का पैमाना यह है कि दर्शक उससे नफरत करने लगें? जवाब: बिल्कुल। एक विलेन तब कामयाब होता है, जब लोगों को उससे नफरत होने लगे। अगर आप किसी किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाते हैं और दर्शक उस किरदार को लेकर रिएक्ट करते हैं, उसकी तारीफ करते हैं या उससे डरते-नफरत करते हैं, तो एक अभिनेता के तौर पर वही आपकी सफलता है। सवाल: क्या किसी किरदार को निभाने के बाद उससे बाहर निकलने में आपको कभी परेशानी हुई है? जवाब: ऐसा बहुत ज्यादा नहीं हुआ, लेकिन ‘माइलस्टोन’ में गालिब का किरदार करते समय मुझे काफी पीठ दर्द रहता था। शूटिंग के बाद भी कुछ समय तक वह दर्द मेरे साथ रहा। फिर मैंने अपने दिमाग को यह समझाया कि आपने इतनी मेहनत की है, लगातार सीढ़ियां चढ़ते रहे हैं, इसलिए शरीर में कोई मसल खिंच गया होगा। पता नहीं सच में ऐसा था या मैंने अपने दिमाग को उस तरह सेट किया, लेकिन मेरे लिए वह तरीका काम कर गया। कई बार ऐसा भी होता है कि एक किरदार से निकलकर तुरंत दूसरे किरदार में जाना पड़ता है। जैसे मैंने बलबीर का किरदार किया और उसके बाद ‘सतलुज’ के लिए तैयारी करनी थी। ऐसे समय में अभिनेता को बहुत जल्दी स्विच ऑन और स्विच ऑफ करना पड़ता है। सवाल: पंजाबी सिनेमा, हिंदी फिल्मों और ओटीटी तीनों जगह काम करते हुए क्या आपकी एक्टिंग अप्रोच बदलती है? जवाब: मैं खुद को इस मामले में किस्मत वाला मानता हूं कि मुझे अक्सर ऐसा काम मिल जाता है, जो मुझे पसंद आता है। मेरे पास बहुत ज्यादा ऑप्शंस भी नहीं होते। अगर 8-10 स्क्रिप्ट आती हैं और उनमें से एक चुननी है तो मेरे लिए जो काम करने लायक है, मैं उसे करना चाहता हूं। चाहे किरदार एक सीन का हो, दो सीन का हो या 40 दिन का काम हो, मेरे लिए उसमें कुछ करने लायक जरूर होना चाहिए। अब तक मुझे जो काम मिला है, उसमें मैं खुद को काफी लकी मानता हूं। सवाल: इतने साल इंडस्ट्री में काम करने के बाद भी क्या आज काम मांगने में झिझक नहीं होती? जवाब: नहीं, काम मांगने में कैसी झिझक? यह मेरा काम है। मैंने अपनी खुशी से, पूरे होश-हवास में इस फील्ड को चुना है। भगवान को साक्षी मानकर तय किया है कि मुझे अभिनेता बनना है। अब मेरी ड्यूटी है कि मुझे हर किरदार को अपनी 100 प्रतिशत क्षमता के साथ निभाना है। लोगों को वह पसंद आए, यही मेरे लिए सबसे बड़ी बात है। मेरे लिए मेरे सारे किरदार एक जैसे हैं। कोई एक दूसरे से कम या ज्यादा नहीं है। सवाल: आगे ऐसा कौन-सा किरदार करना चाहते हैं, जो अभी तक नहीं मिला? जवाब: मैं ऐसा किरदार करना चाहता हूं, जो मेरी अपनी जिंदगी के ज्यादा करीब हो। मैंने पुलिस वाले काफी किए हैं। अब कोई ऐसा आम आदमी, इंश्योरेंस एजेंट जैसा किरदार, बिजनेसमैन या पिता की भूमिका जिसमें जिंदगी की सच्चाई और मेरे अपने अनुभवों की झलक हो ऐसा कुछ करना चाहूंगा। क्योंकि जब किरदार आपके अपने अनुभवों से जुड़ता है तो उसे निभाने का आनंद अलग होता है।
रणदीप हुड्डा@50 गरीबी में मेल सेक्स वर्कर बनने निकले:बाढ़ में उतरकर पीड़ितों को बांटा खाना; नेपाल जेल में बिकिनी किलर से मिले
बॉलीवुड के संजीदा एक्टर्स में शुमार रणदीप हुड्डा आज 50 साल के हो गए हैं। पर्दे पर अपनी दमदार एक्टिंग और सीरियस किरदारों से पहचान बनाने वाले रणदीप की असल जिंदगी का एक पहलू इंसानियत से भरा भी है। जब भी देश के किसी कोने में आपदा आई या लोग तकलीफ में दिखे, रणदीप ग्लैमरस दुनिया से दूर जमीनी स्तर पर मदद के लिए सबसे आगे खड़े नजर आए। हाल ही में असम में आई भीषण बाढ़ के दौरान भी रणदीप हुड्डा का यही मानवीय चेहरा देखने को मिला। जब बाढ़ के पानी ने असम के कई इलाकों को डुबा दिया, तो रणदीप सोशल मीडिया पर केवल दुख जताकर नहीं रुके। वे सीधे असम के शिवसागर जिले पहुंचे। यहां वे खुद पानी में उतरे और पीड़ितों को राहत सामग्री बांटी। रेलवे स्टेशन पर बनाए गए राहत कैंपों में रह रहे पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचकर उन्होंने भोजन परोसा और लंगर की व्यवस्था संभाली। केरल के बाद साल 2019 में जब महाराष्ट्र का नासिक जिला भयंकर सूखे की चपेट में था, तब भी रणदीप राहत लेकर पहुंचे। नासिक के वेले गांव में स्थिति इतनी गंभीर थी कि पीने के पानी के कुएं पूरी तरह सूख चुके थे और ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे थे। रणदीप खुद उस गांव में पहुंचे, स्थिति का जायजा लिया और सूखे की मार झेल रहे ग्रामीणों के लिए रोज 25 से 30 पानी के टैंकरों का इंतजाम कराया। नासिक के सूखे में टैंकर लेकर पहुंचे थे रणदीप हुड्डा का राहत कार्यों में जुटना हाल की घटना तक सीमित नहीं है। वे लंबे समय से संकट के समय जमीनी स्तर पर सेवा करते आए हैं। 2018 में जब केरल भीषण बाढ़ की चपेट में था और लाखों लोग बेघर हो गए थे, तब रणदीप सीधे केरल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे थे। संस्था खालसा एड के साथ मिलकर उन्होंने राहत शिविरों में हजारों लोगों के लिए खाना पकाने से लेकर बांटने तक का काम किया था। बड़े-बड़े बर्तनों में खाना बनाते और बाढ़ पीड़ितों को भोजन परोसते हुए उनकी तस्वीरें भी सामने आईं। 2025 में पंजाब में आई बाढ़ के दौरान भी वे प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे और राहत सामग्री बांटी। वीकेंड पर करते हैं बीच की सफाई, UN ने बनाया ब्रांड एंबेसडर रणदीप हुड्डा सिर्फ प्राकृतिक आपदाओं में ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए भी सक्रिय रहे हैं। मुंबई के वर्सोवा बीच और मीठी नदी के सफाई अभियान में वे लगातार पर्यावरण कार्यकर्ता अफरोज शाह के साथ मिलकर खड़े रहे। वीकेंड्स पर जब अन्य बॉलीवुड सेलिब्रिटीज पार्टियों में व्यस्त रहते थे, तब रणदीप सुबह-सुबह वर्सोवा बीच पर ग्लव्स पहनकर कचरा और प्लास्टिक उठाते नजर आते थे। पर्यावरण के प्रति उनके इसी काम को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने उन्हें 'जलीय प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण' (CMS) के लिए अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया था। वे खुद बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही जानवरों और प्रकृति से गहरा लगाव रहा है। उन्होंने कई घोड़ों को गोद ले रखा है और बाघ संरक्षण अभियानों में भी वे सक्रिय भूमिका निभाते हैं। इंसानियत और समाज सेवा का यह जज्बा रणदीप को उनके परिवार से विरासत में मिला है। उनके पिता डॉक्टर और मां आशा हुड्डा एक जानी-मानी सोशल वर्कर हैं। रणदीप का मानना है कि बचपन में मां को दूसरों की मदद करते देखकर ही उनके भीतर भी जरूरतमंदों के प्रति यह संवेदनशीलता पैदा हुई। खर्च निकालने के लिए मेल सेक्स वर्कर बनने निकले स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए रणदीप हुड्डा ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न चले गए। वहां उन्होंने मार्केटिंग में बैचलर्स की डिग्री ली और उसके बाद बिजनेस मैनेजमेंट व ह्यूमन रिसोर्स में मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में उनके दिन बहुत कठिनाइयों में बीते। जेब खर्च निकालने और अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्होंने वहां कई छोटे-मोटे काम किए। रणदीप ने ऑस्ट्रेलिया में रेस्टोरेंट में बर्तन धोए, वेटर का काम किया, कार वाशिंग सेंटर में गाड़ियां धोईं और देर रात तक टैक्सी भी चलाई। संघर्ष इतना बढ़ गया था कि एक वक्त पैसों की सख्त किल्लत के कारण उन्होंने जिगोलो (मेल सेक्स वर्कर) बनने के बारे में भी गंभीरता से सोचा था। मिड-डे को दिए एक इंटरव्यू में रणदीप ने खुलासा किया था कि उन्होंने जिगोलो बनने के लिए वहां कोशिश भी की थी। एक एजेंट ने उन्हें एक कपल को सर्विस देने के लिए कहा तो उन्होंने मना कर दिया। एयरलाइन कंपनी में नौकरी, थिएटर से मिला पहला ब्रेक ऑस्ट्रेलिया से पढ़ाई पूरी कर जब रणदीप भारत लौटे, तो उन्होंने मुंबई में एक एयरलाइन कंपनी में मार्केटिंग की नौकरी शुरू कर दी। नौकरी के साथ-साथ वे थिएटर और मॉडलिंग भी कर रहे थे। एक दिन रणदीप मुंबई में एक प्ले की रिहर्सल कर रहे थे, तभी मशहूर डायरेक्टर मीरा नायर की नजर उन पर पड़ी। मीरा नायर उनके अभिनय और पर्सनालिटी से काफी प्रभावित हुईं। मीरा नायर ने रणदीप को अपनी आने वाली फिल्म 'मानसून वेडिंग' (2001) के ऑडिशन के लिए बुलाया। ऑडिशन में रणदीप का काम पसंद आया और उन्हें एनआरआई रिश्तेदार राहुल चड्ढा के किरदार में कास्ट कर लिया गया। इस तरह साल 2001 में रणदीप हुड्डा ने बॉलीवुड में अपना पहला कदम रखा। 35 हजार रुपए का कॉन्ट्रैक्ट किया, 4 साल तक काम नहीं मिला 'मानसून वेडिंग' के बाद रणदीप को उम्मीद थी कि उन्हें बॉलीवुड में काम मिलने लगेगा, लेकिन उनके करियर में एक बड़ा अड़ंगा आ गया। उस दौरान मशहूर डायरेक्टर रामगोपाल वर्मा ने रणदीप का एक नाटक देखा और उनसे प्रभावित होकर उन्हें अपनी गैंगस्टर फिल्म के लिए साइन कर लिया। रामगोपाल वर्मा ने रणदीप के साथ 35,000 रुपए महीने का एक एक्सक्लूसिव कॉन्ट्रैक्ट साइन कराया। शर्त यह थी कि जब तक रामगोपाल वर्मा की फिल्म पूरी नहीं हो जाती, रणदीप किसी दूसरे बैनर की फिल्म में काम नहीं कर सकते। लेकिन स्क्रिप्टिंग और प्रोडक्शन की वजह से वह फिल्म टलती गई। यह इंतजार एक-दो महीने नहीं, बल्कि पूरे चार साल लंबा चला। इस कॉन्ट्रैक्ट के कारण रणदीप के हाथ से कई बड़ी फिल्में निकल गईं। आखिरकार 2005 में जाकर रामगोपाल वर्मा ने फिल्म 'D' बनाई। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई। रणदीप का 4 साल का कीमती वक्त और करियर का शुरुआती फ्लो इस वजह से पूरी तरह प्रभावित हुआ। इसके बाद उन्होंने 'डरना जरूरी है' और 'रू-ब-रू' जैसी फिल्मों में काम किया, लेकिन ये फिल्में भी असफल रहीं। 'वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई' से बदला करियर का ग्राफ लगातार असफलताओं के बाद साल 2010 में मिलन लुथरिया की फिल्म 'वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई' रणदीप के करियर में टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। फिल्म में उन्होंने एसीपी विल्सन का ईमानदार किरदार निभाया था। अजय देवगन और इमरान हाशमी जैसे बड़े स्टार्स की मौजूदगी के बावजूद रणदीप ने अपनी दमदार एक्टिंग से आलोचकों और दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस फिल्म की सफलता के बाद इंडस्ट्री ने रणदीप की अदाकारी को गंभीरता से लेना शुरू किया और उनके पास मुख्य किरदारों के ऑफर्स आने लगे। इसके बाद उन्होंने 'साहब बीवी और गैंगस्टर', 'जन्नत 2' और 'जिस्म 2' जैसी फिल्मों में अपनी अदाकारी का प्रदर्शन किया। 'हाईवे' के लिए धूप में सनबर्न कराया, वोदका पीकर किरदार में ढले रणदीप हुड्डा को बॉलीवुड का एक ऐसा मेथड एक्टर माना जाता है जो किरदार में ढलने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। साल 2014 में आई इम्तियाज अली की फिल्म 'हाईवे' में रणदीप ने महावीर भाटी नाम के एक एरोगेंट किडनैपर का किरदार निभाया था। इस किरदार की तैयारी के लिए रणदीप ने बेहद अजीब और कठिन तरीके अपनाए। फिल्म में उनका लुक काफी थका हुआ, उबड़-खाबड़ और सनबर्न से झुलसा हुआ दिखना था। इसलिए रणदीप सेट पर कोई मेकअप नहीं लेते थे, बल्कि घंटों तेज धूप में सीधे लेट जाते थे ताकि उनकी स्किन कुदरती रूप से झुलस जाए और सनबर्न हो जाए। इसके बावजूद अगर किसी दिन वे फ्रेश या साफ-सुथरे दिखते, तो किरदार के चेहरे पर वह थकान लाने के लिए वे वोदका की पूरी बोतल पी लेते थे। काठमांडू जेल में ‘बिकिनी किलर’ से 10 मिनट की मुलाकात साल 2015 में आई फिल्म 'मैं और चार्ल्स' में रणदीप ने दुनिया के सबसे शातिर क्रिमिनल और 'बिकिनी किलर' के नाम से मशहूर चार्ल्स शोभराज का किरदार निभाया था। इस किरदार की बारीकियों, बॉडी लैंग्वेज और बात करने के लहजे को समझने के लिए रणदीप सिर्फ किताबों या डाक्यूमेंट्रीज पर निर्भर नहीं रहे। उन्होंने फिल्म के डायरेक्टर पी. रमन से जिद की कि वे उन्हें असली चार्ल्स शोभराज से मिलाएं। उस वक्त चार्ल्स शोभराज नेपाल की काठमांडू जेल में बंद था। काफी कोशिशों और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद रणदीप को काठमांडू की सेंट्रल जेल में चार्ल्स शोभराज से मिलने की इजाजत मिली। रणदीप जब जेल पहुंचे, तो चार्ल्स उनसे करीब 7 फीट की दूरी पर खड़ा था। ई-टाइम्स को दिए अपने इंटरव्यू में रणदीप ने बताया था कि शुरुआत में चार्ल्स ने उन्हें नहीं पहचाना। फिर रणदीप ने उन्हें अपने और फिल्म के बारे में बताया। चार्ल्स ने रणदीप से पूछा कि उन्होंने किरदार की तैयारी कहां से की, जिस पर रणदीप ने कहा कि इंटरनेट पर उपलब्ध उनके पुराने वीडियोज से। इसके बाद चार्ल्स शोभराज ने फिल्म के पोस्टर पर रणदीप को अपना ऑटोग्राफ भी दिया था। 3 साल तक दाढ़ी-बाल नहीं काटे, फिल्म बंद होने पर गुरुद्वारे में मांगी माफी रणदीप हुड्डा के करियर का सबसे दर्दनाक और इमोशनल किस्सा उनकी फिल्म 'बैटल ऑफ सारागढ़ी' से जुड़ा है। यह फिल्म रणदीप का ड्रीम प्रोजेक्ट थी, जिसमें वे हवलदार ईशर सिंह का किरदार निभा रहे थे। सिख इतिहास और इस महान योद्धा के किरदार के प्रति सम्मान जताने के लिए रणदीप ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में जाकर शपथ ली थी कि जब तक यह फिल्म पूरी होकर रिलीज नहीं हो जाती, वे अपने सिर के बाल और दाढ़ी नहीं कटवाएंगे। डायरेक्टर राजकुमार संतोषी के निर्देशन में फिल्म की शूटिंग शुरू हुई और कुछ हिस्सा शूट भी कर लिया गया। रणदीप ने 3 साल तक कोई दूसरी फिल्म साइन नहीं की और अपने केस (बाल) बढ़ाए रखे। लेकिन प्रोडक्शन और बजट की दिक्कतों की वजह से फिल्म की शूटिंग अटक गई। इसी दौरान अक्षय कुमार की इसी विषय पर बनी फिल्म 'केसरी' का ऐलान हो गया और वह रिलीज भी हो गई। इसके बाद 'बैटल ऑफ सारागढ़ी' हमेशा के लिए डिब्बा बंद हो गई। रणदीप के लिए 3 साल का लंबा इंतजार, मेहनत और इमोशनल जुड़ाव सब बेकार हो गया था। जब आखिरकार उन्हें अपने बाल कटवाने पड़े, तो वे गुरुद्वारे गए। वहां उन्होंने सिख परंपरा के मुताबिक कसम पूरी न कर पाने के लिए ईश्वर से माफी मांगी और फिर अपने बाल कटवाए। सुष्मिता सेन से रिश्ता टूटने को बताया टर्निंग प्वाइंट रणदीप हुड्डा की पर्सनल और लव लाइफ भी काफी उतार-चढ़ाव भरी रही है। साल 2006 में आई फिल्म 'कर्मा और होली' के सेट पर उनकी मुलाकात बॉलीवुड एक्ट्रेस और पूर्व मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन से हुई थी। शूटिंग के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और उन्होंने करीब 3 साल तक एक-दूसरे को डेट किया। सुष्मिता सेन के साथ ब्रेकअप के बाद रणदीप काफी अकेले पड़ गए थे। हालांकि, बाद में रणदीप ने कई इंटरव्यूज में माना कि सुष्मिता के साथ हुआ ब्रेकअप उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। उन्होंने कहा कि ब्रेकअप के बाद वे अपने काम और एक्टिंग करियर को लेकर ज्यादा सीरियस हो गए और अपना पूरा ध्यान फिल्मों पर लगा दिया। सुष्मिता के अलावा रणदीप का नाम एक्ट्रेस नीतू चंद्रा के साथ भी लंबे वक्त तक जुड़ा। 'मर्डर 3' की शूटिंग के दौरान अदिति राव हैदरी के साथ भी उनके लिंकअप की खबरें आईं, हालांकि रणदीप ने इन बातों पर कभी खुलकर कोई कमेंट नहीं किया। ये खबर भी पढ़ें सुनील शेट्टी@65- धमकी मिलने पर अंडरवर्ल्ड डॉन को गालियां दीं:को-एक्ट्रेस से मिलाने के लिए जूनियर आर्टिस्ट को नकली मुख्यमंत्री बनाया; अजय देवगन ‘दूधवाला’ कहते हैं 90 का दशक। मुंबई में अंडरवर्ल्ड का खौफ ऐसा था कि बड़े-बड़े कारोबारी और फिल्म स्टार भी धमकी भरे फोन से घबरा जाते थे। इसी दौर में एक बॉलीवुड एक्टर को भी लगातार धमकी वाले फोन आ रहे थे। करीब डेढ़ साल तक धमकियों का सिलसिला चलता रहा, लेकिन एक दिन बात हद से आगे बढ़ गई। पूरी खबर पढ़ें
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