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Gajanan Sankashti Chaturthi 2026: आज रखा जाएगा गजानन संकष्टी चतुर्थी व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Gajanan Sankashti Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाई जाती है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी विनायक चतुर्थी कहलाती है। सावन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी को गजानन संकष्टी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान गणेश के गजानन स्वरूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से जीवन के संकट दूर होते हैं तथा सुख, समृद्धि और बुद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, आज सावन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 1 अगस्त 2026 को रात 11:07 बजे होगा और इसका समापन 2 अगस्त 2026 को रात 11:15 बजे होगा।
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:47 बजे से 5:31 बजे तक
- प्रातः संध्या: सुबह 5:09 बजे से 6:16 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:19 बजे से 1:11 बजे तक
- चंद्रोदय का समय: रात 9:43 बजे
गजानन संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
- प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
- भगवान गणेश के समक्ष जल और अक्षत हाथ में लेकर व्रत का संकल्प लें।
- पूजा स्थान पर लाल वस्त्र बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- भगवान को रोली, अक्षत, दूर्वा, लाल पुष्प, मोदक, लड्डू और मौसमी फल अर्पित करें।
- घी का दीपक और धूप जलाकर विधिवत पूजा करें।
- गणेश चालीसा, संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करें और 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का 108 बार जप करें।
- अंत में गणेश जी की आरती करें।
- रात्रि में चंद्रमा उदित होने पर जल में दूध, रोली और अक्षत मिलाकर चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित करें।
- इसके बाद भगवान गणेश का स्मरण करते हुए व्रत का पारण करें।
गजानन संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश के गजानन स्वरूप की उपासना विशेष रूप से विघ्नों को दूर करने वाली मानी जाती है। 'गजानन' का अर्थ है हाथी के मुख वाले भगवान। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा परिवार में सुख-समृद्धि और शुभता का वास होता है। साथ ही भगवान गणेश की कृपा से बुद्धि, विवेक और सफलता प्राप्त होने का भी आशीर्वाद मिलता है।
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