Govt Job Preparation: सरकारी नौकरी के लिए बदल लें अपनी तैयारी का तरीका! ये आसान स्टेप्स कर सकते हैं आपका सपना पूरा, 1 साल के अंदर मिल सकती है नौकरी
Govt Job Preparation: सरकारी नौकरी पाने के लिए सही योजना और नियमित तैयारी जरूरी है। लगातार पढ़ाई, मॉक टेस्ट, रिवीजन और पिछले सालों के प्रश्न पत्रों का अभ्यास करने में सफलता की संभावना बढ़ जाती है। सही दिशा में मेहनत करने से एक साल में नौकरी मिलने के मौके बेहतर हो सकते हैं।टॉप-10 में 5 कंपनियों का मार्केट-कैप ₹1 लाख करोड़ घटा:TCS टॉप लूजर, वैल्यू ₹34,263 करोड़ घटी; LIC की वैल्यू बढ़ी
बीते हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में गिरावट रही। इस बीच देश की 10 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से 5 का मार्केट कैप में कुल मिलाकर करीब 1 लाख करोड़ रुपए घटा है। इस दौरान आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की मार्केट वैल्यूएशन में सबसे बड़ी ₹34,263 करोड़ की गिरावट देखने को मिली। हफ्ते के कारोबारी सत्रों के दौरान सेंसेक्स 489.92 अंक (0.62%) गिरकर बंद हुआ। वहीं, दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स भी 204.65 अंक (0.83%) फिसल गया। 5 बड़ी कंपनियों को नुकसान, TCS और रिलायंस टॉप लूजर हफ्ते के दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और टीसीएस की मार्केट वैल्यूएशन में गिरावट आई। LIC सहित 5 कंपनियों की वैल्यू कुल ₹55,149 करोड़ बढ़ी बाजार के दबाव के बावजूद भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो (LT), एलआईसी (LIC) और हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयरों में मजबूती दिखी। इन 5 कंपनियों ने मिलकर अपनी मार्केट वैल्यू में ₹55,149.45 करोड़ जोड़े हैं। मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है। इसे एक उदाहरण से समझें... मान लीजिए... कंपनी 'A' के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी। कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं... मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है? कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं। उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।
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