CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने चौथे नंबर पर रहते हुए सफर किया खत्म, जीते 13 गोल्ड समेत 39 मेडल्स
Commonwealth Games 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सभी मुकाबले खत्म हो चुके हैं. भारत ने 39 मेडल जीतकर चौथे स्थान पर अपना सफर खत्म किया है, जिसमें 13 गोल्ड मेडल शामिल है.
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— India_AllSports (@India_AllSports) August 2, 2026
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Explainer: ODI वर्ल्ड कप में भुवनेश्वर कुमार क्यों हैं भारत की जरूरत? जानें वो कारण जो उन्हें साउथ अफ्रीका में बनाते हैं बेहद खतरनाक
ODI World Cup 2026: वनडे वर्ल्ड कप 2027 की तैयारियां अभी से जोरों-शोरों से चल रही हैं, जबकि टूर्नामेंट का आगाज होने में अभी 1 साल से ज्यादा का समय बचा हुआ है. पिछली बार 2023 वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से मिली हार अब भी भारतीय टीम और फैंस को दर्द दे जाती है. विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे भारतीय दिग्गज सिर्फ वनडे वर्ल्ड कप 2027 खेलने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं. वनडे वर्ल्ड कप के लिए अभी से टीम इंडिया के स्क्वाड की चर्चा होने लगी है. इसी बीच भारतीय टीम का एक स्टार तेज गेंदबाज सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसकी टीम इंडिया में वापसी की मांग हो रही है, क्योंकि यह गेंदबाज वर्ल्ड कप में टीम इंडिया के लिए एक्स-फैक्टर साबित हो सकता है. हम बात कर रहे हैं भुवनेश्वर कुमार की... तो चलिए जानते हैं कि आखिरकार साउथ अफ्रीका में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप में भुवनेश्वर टीम इंडिया के लिए इतने जरूरी क्यों हैं.
साउथ अफ्रीका की पिचें और भुवनेश्वर कुमार का 'स्विंग' जादू
साउथ अफ्रीका की पिचों को पारंपरिक रूप से तेज गेंदबाजों के लिए मददगार माना जाता है. जोहान्सबर्ग, सेंचुरियन और केपटाउन में शुरुआती ओवरों में तेज हवा चलती है और पिच पर नमी होती है, जो स्विंग गेंदबाजों के लिए स्वर्ग मानी जाती है. गौरतलब है कि भुवनेश्वर कुमार दुनिया के उन गिने-चुने गेंदबाजों में शामिल हैं जो बिना किसी अतिरिक्त गति के भी नई गेंद को दोनों तरफ In-swing और Out-swing हवा में लहरा सकते हैं. ऐसे में जब साउथ अफ्रीका की मददगार पिचों पर जब स्विंग मिलेगा तो भुवनेश्वर कुमार दुनिया के किसी भी बल्लेबाज को अपना शिकार बना सकते हैं.
पावरप्ले में विकेट चटकाने और रन रोकने की कला
वनडे क्रिकेट में शुरुआती 10 ओवर यानी पावरप्ले पूरे मैच की दिशा तय करता है. भुवनेश्वर कुमार के पास नई गेंद से पावरप्ले में गेंदबाजी करने और विकेट लेने का लंबा अनुभव रहा है और उनका रिकॉर्ड भी शानदार है. भुवी की सबसे बड़ी ताकत स्विंग के साथ-साथ बेहद सटीक लेंथ पर गेंदबाजी करना है, जिससे बल्लेबाजों को रन बनाने का मौका नहीं मिलता. ऐसे में जब विरोधी टीमों के ओपनर्स पर रन बनाने का दबाव बढ़ता है, तो वे गलत शॉट खेलते हैं और भुवी इस तरह शुरुआत में विकेट निकालकर देते हैं. साउथ अफ्रीका में विरोधी टीम के बैटिंग ऑर्डर को पावरप्ले में ध्वस्त करने के लिए टीम इंडिया को भुवी की जरूरत पड़ेगी.
डेथ ओवरों में विविधताओं का जाल
भुवनेश्वर कुमार सिर्फ नई गेंद से ही नहीं बल्कि डेथ ओवरों (आखिरी 10 ओवर) में भी उतनी ही खतरनाक गेंदबाजी करते हैं. हालांकि पिछले कुछ सालों से उनकी गति 130-135 किमी/घंटा के आसपास रहती है, लेकिन उनके पास डेथ ओवरों के लिए कई हथियार हैं. नकल बॉल के मास्टर भुवी अपनी इस कला से दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाजों को चकमा दे चुके हैं. साउथ अफ्रीका की पिचों पर जहां गेंद में अतिरिक्त उछाल होता है, वहां भुवी की धीमी गति की गेंदों और नकल गेंद का अंदाजा लगाना बल्लेबाजों के लिए बेहद मुश्किल हो जाएगा.
दबाव की परिस्थितियों में 'अनुभव' का कोई विकल्प नहीं
वर्ल्ड कप जैसे बड़े नॉकआउट टूर्नामेंट में सिर्फ अपनी स्किल ही नहीं, बल्कि दबाव को झेलने का अनुभव भी बेहद काम आता है. भुवनेश्वर कुमार ने साल 2012 में डेब्यू करने के बाद से भारत के लिए कई आईसीसी टूर्नामेंट खेले हैं. ऐसे में उनके पास अनुभव का भंडार है. वह जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज जैसे गेंदबाजों के साथ मिलकर एक ऐसी बॉलिंग यूनिट तैयार कर सकते हैं जिसके पास हर परिस्थिति से निपटने का अनुभव हो. टीम के युवा गेंदबाजों को भी भुवी से काफी कॉन्फिडेंस मिलेगा.
दक्षिण अफ्रीका में भुवनेश्वर कुमार का पुराना शानदार रिकॉर्ड
भुवनेश्वर कुमार के लिए साउथ अफ्रीका की परिस्थितियां नई नहीं हैं. उन्होंने वहां भारत के लिए टेस्ट, वनडे और टी-20, तीनों फॉर्मेट खेले हैं. उन्होंने साल 2018 के दौरे पर दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों को अपनी स्विंग और सीम मूवमेंट से काफी परेशान किया था. भुवी को अच्छी तरह पता है कि केपटाउन या जोहान्सबर्ग की पिचों पर गेंद को किस लेंथ पर टप्पा खिलाना है ताकि अधिकतम मूवमेंट मिल सके. उनका यह अनुभव टीम के लिए बेहद काम आ सकता है.
भारतीय निचले क्रम को बल्लेबाजी में मजबूती देना
आधुनिक वनडे क्रिकेट में वही टीमें सबसे ज्यादा सफल होती हैं जिनकी बल्लेबाजी में गहराई होती है. भारतीय टीम अक्सर नंबर 8 पर एक ऐसे गेंदबाज की कमी महसूस करती है जो जरूरत पड़ने पर टीम के लिए बल्लेबाजी कर सके. भुवनेश्वर कुमार तकनीकी रूप से एक बेहद सक्षम बल्लेबाज हैं. जब भी टीम को 30 या 40 रनों की जरूरत होगी, तो भुवी वे रन बनाकर दे सकते हैं. भुवी टेस्ट और वनडे में कई अर्धशतक जड़ चुके हैं. भुवी निचले क्रम में आकर मैच को फिनिश करने की क्षमता भी रखते हैं. ऐसे में वह टीम इंडिया के निचले क्रम की बल्लेबाजी के लिए भी अहम साबित हो सकते हैं. ऐसे में भुवी साउथ अफ्रीका में टीम इंडिया के लिए अहम साबित हो सकते हैं.
टीम इंडिया में वापसी को लेकर भुवनेश्वर कुमार का आया बयान
भुवनेश्वर कुमार ने टीम इंडिया में अपनी वापसी की चल रही खबरों पर अपनी चुप्पी तोड़ी है. भुवी ने RCB पॉडकास्ट में कहा, "मैं भारत का प्रतिनिधित्व करने का अपना सपना पहले ही जी चुका हूं, इसलिए टीम इंडिया में वापसी करना अब ऐसी चीज नहीं है जिसके पीछे मैं भाग रहा हूं.आज, मैं क्रिकेट खेलता हूं क्योंकि मुझे वास्तव में इस खेल से प्यार है. मैं साल भर ट्रेनिंग करके, घरेलू टूर्नामेंटों और यूपी टी20 लीग में खेलकर खुद को समर्पित रखता हूं, और इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करता हूं कि अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए मुझे पर्याप्त आराम मिले."
???? I DON'T PLAY FOR AN INDIA COMEBACK ANYMORE - BHUVI ????
— Sam (@cricsam02) August 2, 2026
Bhuvneshwar Kumar said????️: He has already fulfilled his dream of playing for India, so making a comeback is no longer his main goal.
- He explained that he now plays purely for the love of cricket. However, he remains… pic.twitter.com/4i4ViZ2ee5
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