Bhagwant Mann ने लुधियाना में दो School of Eminence का उद्घाटन किया
लुधियाना, दो अगस्त पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रविवार को यहां किदवई नगर और मिलर गंज में दो नए ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ का लोकार्पण किया, जिससे जिले में ऐसे विद्यालयों की कुल संख्या 16 हो गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक कक्षाओं, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, सभागार और अन्य उन्नत सुविधाओं से सुसज्जित ये नए परिसर राज्य सरकार के सरकारी शिक्षा को मजबूत करने और विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों का हिस्सा हैं। मान ने कहा कि शिक्षा में लगातार निवेश से सरकारी स्कूलों को बेहतरीन संस्थानों में बदल दिया गया है।
उन्होंने कहा कि बेहतर आधारभूत ढांचे, विदेश में शिक्षकों का प्रशिक्षण और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के कारण अब अभिभावकों का सरकारी विद्यालयों की ओर रुझान बढ़ा है। मान ने नए विद्यालयों के दौरे के दौरान विद्यार्थियों से बातचीत भी की। उन्होंने कक्षाओं, विज्ञान प्रयोगशालाओं और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं का दौरा किया, जहां उन्होंने आधुनिक बुनियादी ढांचे का जायजा लिया और विद्यार्थियों से उनकी पढ़ाई, वैज्ञानिक प्रयोगों और सीखने के अनुभवों के बारे में जानकारी ली।
एक सभा को संबोधित करते हुए मान ने कहा कि पंजाब की औद्योगिक क्रांति का नेतृत्व करने के बाद लुधियाना अब राज्य की शिक्षा क्रांति में भी अगुवाई कर रहा है।
Taslima Nasreen ने भारत में UCC लागू करने की वकालत की
(तस्वीरों के साथ) कोलकाता, दो अगस्त बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन ने रविवार को भारत में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने की वकालत करते हुए कहा कि भेदभाव, खासकर महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को खत्म करने के लिए ऐसा कानून जरूरी है। उन्होंने पड़ोसी देश बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी ऐसे कानून की जरूरत पर जोर दिया। तसलीमा ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘सभी विकसित देशों में यूसीसी जैसे कानून हैं।
बांग्लादेश, पाकिस्तान और भारत को यूसीसी की जरूरत है। सभी के लिए समान कानून होने चाहिए। महिलाओं को बहुत ज्यादा भेदभाव का सामना करना पड़ता है और यूसीसी के जरिए इसमें से काफी हद तक भेदभाव को दूर किया जा सकता है।
यह जरूरी है।’’ तसलीमा का यह बयान पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा राज्य के लिए यूसीसी के मसौदे की समीक्षा करने के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करने के बाद आया है। सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक प्रस्तावित कानून के ‘‘व्यापक असर और विस्तृत दायरे’’ के मद्देनजर यह समिति बनाई गई है। इसके मुताबिक कोई भी अगला कदम उठाने से पहले समिति मसौदा विधेयक की समीक्षा करेगी।
तसलीमा (63) ने बांग्लादेश का जिक्र करते हुए कहा कि समानता सभ्यता की नींव है, लेकिन कई महिलाओं को अब भी भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘बांग्लादेश में हिंदू महिलाओं को समान अधिकार नहीं हैं। वह अपने पिता की संपत्ति की उत्तराधिकारी नहीं बन सकतीं।
अगर हिंदू महिलाओं को आज़ादी और समान अधिकार चाहिए, तो यूसीसी जरूरी है।’’ तसलीमा शनिवार को करीब 19 साल बाद कोलकाता लौटीं। यहां उनका रवींद्र सदन में राज्य सरकार के एक कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। उन्हें 2007 में उनकी किताब ‘द्विखंडितो’ के प्रकाशन को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के कारण तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के कहने पर कोलकाता छोड़ना पड़ा था।
लेखिका ने एक दिन पहले शहर में हुए उनके सम्मान समारोह में हुई गड़बड़ी पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि उन्हें ‘‘अपमान’’ महसूस हुआ, जब दर्शकों के एक हिस्से के विरोध के कारण मशहूर कवि जॉय गोस्वामी को मंच छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। तसलीमा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘न केवल जॉय का अपमान हुआ, बल्कि मेरा भी अपमान हुआ क्योंकि मैंने ही उन्हें आमंत्रित किया था।’’ विवाद तब शुरू हुआ जब तसलीमा ने गोस्वामी को मंच पर आमंत्रित किया और उनसे सभा को संबोधित करने का अनुरोध किया।
हालांकि, दर्शकों के एक वर्ग के विरोध की वजह से मशहूर कवि को बिना संबोधन के मंच से उतरना पड़ा। लेखिका ने उस घटना को याद करते हुए कहा, ‘‘मैंने अपने भाषण में अभिव्यक्ति की आज़ादी के बारे में बात की थी। हर किसी को बोलने की अनुमति होनी चाहिए।
किसी को भी अपने विचार व्यक्त करने से रोकना सही नहीं है।’’ तसलीमा ने प्रदर्शनकारियों के बर्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘‘जिन लोगों ने मेरे भाषण की तारीफ की, उन्हीं लोगों ने उन्हें मंच पर नहीं आने दिया। क्या उन्होंने मुझसे भी सवाल नहीं पूछे? यह विरोधाभासी बात है।
जब कोई अभिव्यक्ति की आज़ादी की बात करता है, तो लोग उसका समर्थन करते हैं, लेकिन जब किसी कवि को बोलने के लिए बुलाया जाता है, तो वे उसे सुनना नहीं चाहते। यह सही नहीं है।
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