दुनिया के 6 देश जहां नहीं है राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री, फिर भी चलती है सरकार
दुनिया के अधिकांश देशों में सरकार का नेतृत्व राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री करते हैं, लेकिन कुछ देशों में आज भी राजशाही परंपरा कायम है। इन देशों में राजा, सुल्तान, अमीर या धार्मिक प्रमुख ही शासन की बागडोर संभालते हैं और सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी जारी है
'BRICS: द न्यू वर्ल्ड ऑर्डर' थीम पर आयोजित एफजीएस विकसित भारत यंग लीडरशिप समिट 2026
भारत, रूस और दक्षिण अफ्रीका ने ब्रिक्स देशों के युवाओं के बीच सहयोग को नई दिशा देने का संकल्प लिया. नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में आयोजित इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन फोरम फॉर ग्लोबल स्टडीज़ (FGS) ने दक्षिण अफ्रीकी ब्रिक्स यूथ एसोसिएशन (SABYA) के रणनीतिक सहयोग से किया. सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, राजनयिकों, शिक्षाविदों, देशभर से आए 175 युवा प्रतिनिधियों और विभिन्न देशों के प्रतिभागियों ने भाग लिया.
ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना
इस सम्मेलन का उद्देश्य युवा नेतृत्व, अकादमिक कूटनीति और ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना था. "BRICS: द न्यू वर्ल्ड ऑर्डर" विषय पर आयोजित इस समिट में नेतृत्व, नवाचार, सार्वजनिक नीति, उद्यमिता, सतत विकास, कूटनीति और वैश्विक सहयोग जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई. वक्ताओं ने कहा कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को हासिल करने और ग्लोबल साउथ को मजबूत बनाने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी.
युवा पीढ़ी की आवश्यकता
समिट के उद्घाटन सत्र में भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एवं शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. आर. के. रंजन सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. उन्होंने युवाओं से नेतृत्व क्षमता विकसित करने, नवाचार, शोध, उद्यमिता और जनसेवा के क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए एक जागरूक, सशक्त और वैश्विक सोच रखने वाली युवा पीढ़ी की आवश्यकता है, जो देश के विकास के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की भूमिका को भी मजबूत बनाए.
नेतृत्व की नई मिसाल पेश कर सकें
सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण फोरम फॉर ग्लोबल स्टडीज (FGS) और दक्षिण अफ्रीकी ब्रिक्स यूथ एसोसिएशन (SABYA) के बीच रणनीतिक साझेदारी रही. SABYA के संस्थापक, कार्यकारी अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रेमंड मटलाला ने कहा कि ब्रिक्स का भविष्य ऐसे युवाओं पर निर्भर करता है जो नवाचार, डिजिटल परिवर्तन, उद्यमिता और सतत विकास के माध्यम से वैश्विक नेतृत्व की नई मिसाल पेश कर सकें. उन्होंने भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच उच्च शिक्षा, नेतृत्व विकास और जन-से-जन संपर्क बढ़ाने पर विशेष जोर दिया.
युवा आदान-प्रदान के बढ़े अवसर
समिट में नई दिल्ली स्थित रशियन हाउस (रूसी विज्ञान एवं संस्कृति केंद्र) की भी महत्वपूर्ण भागीदारी रही. रशियन हाउस की निदेशक डॉ. एलेना रेमिज़ोवा और प्रतिनिधि अनास्तासिया इल्युशिना ने भारत और रूस के बीच शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति और युवा आदान-प्रदान के बढ़ते अवसरों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच अकादमिक साझेदारी और सांस्कृतिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है. वहीं, रशियन हाउस के प्रतिनिधि अनार इसायेव ने 'Gen Z टाउनहॉल डायलॉग' में युवाओं के साथ वैश्विक नेतृत्व, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर संवाद किया.
सम्मेलन में देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों से आए 175 युवा प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई. 'इंडिया स्पीक्स 2047' राष्ट्रीय TED-स्टाइल यंग लीडरशिप टॉक्स और 'Gen Z टाउनहॉल डायलॉग' के दौरान युवाओं ने सुशासन, तकनीक, स्टार्टअप, उद्यमिता, सतत विकास, कूटनीति और राष्ट्र निर्माण से जुड़े अपने विचार और नीति संबंधी सुझाव प्रस्तुत किए.
सीधे संवाद का अवसर मिला
प्रतिनिधियों को कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञों से सीधे संवाद का अवसर भी मिला. इनमें लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डी. पी. पांडेय, कमोडोर अनिल जय सिंह, हिंदुस्तानी भाषा अकादमी के अध्यक्ष सुधाकर पाठक तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर वेस्ट एशियन स्टडीज़ के अध्यक्ष प्रो. जाजति पटनायक शामिल रहे. इन विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक मामलों, सार्वजनिक नीति और वैश्विक शासन पर अपने विचार साझा किए.
संबंधों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता
समिट के समापन सत्र में इंडिया-रूस फाउंडेशन के अध्यक्ष और नई दिल्ली स्थित रूसी भौगोलिक सोसायटी केंद्र के अध्यक्ष सुधीर पाल सभरवाल ने मुख्य संबोधन दिया. उनके साथ इंडियन एसोसिएशन ऑफ रशियन कम्पैट्रियट्स (IARC) की अध्यक्ष एलेना बर्मन भी मौजूद रहीं. दोनों वक्ताओं ने भारत और रूस के बीच शिक्षा, संस्कृति, रणनीतिक सहयोग और जन-से-जन संबंधों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया.
युवाओं को सशक्त बनाना है
फोरम फॉर ग्लोबल स्टडीज़ के संस्थापक निदेशक डॉ. संदीप त्रिपाठी ने कहा कि FGS विकसित भारत यंग लीडरशिप समिट 2026 का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग, अकादमिक कूटनीति और नीति संवाद के माध्यम से युवाओं को सशक्त बनाना है. उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीकी ब्रिक्स यूथ एसोसिएशन, रशियन हाउस, इंडिया-रूस फाउंडेशन और विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भागीदारी ने इस सम्मेलन को ब्रिक्स देशों के युवाओं के लिए एक प्रभावी मंच बना दिया है. उनका विश्वास है कि शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और युवा नेतृत्व आधारित सहयोग विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने के साथ-साथ ग्लोबल साउथ के भविष्य को भी नई दिशा देगा.
फोरम फॉर ग्लोबल स्टडीज़ (FGS) नई दिल्ली स्थित एक स्वतंत्र बहु-विषयक थिंक टैंक है, जो शोध, नीति संवाद, नेतृत्व विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है. यह संस्थान विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, राजनयिक मिशनों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर अकादमिक उत्कृष्टता, रणनीतिक सोच और युवा नेतृत्व को प्रोत्साहित करते हुए विकसित भारत @2047 के विजन को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहा है.
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