बाईं नहीं दाईं तरफ था दिल, बनावट भी थी अलग, सफदरजंग के डॉक्टर्स ने किया ऐसा ऑपरेशन, दुनिया में कोई नहीं कर पाया
दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ने कार्डियक सर्जरी की फील्ड में नया इतिहास रचा है. अस्पताल के डॉक्टरों ने दुनिया में पहली बार दिल की दो बेहद दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे मरीज का रोबोटिक सिस्टमिक एवी वाल्व रिप्लेसमेंट सफलतापूर्वक किया. इस ऑपरेशन में ना ही छाती की हड्डी नहीं काटनी पड़ी और ना ही मरीज को दर्द का सामना करना पड़ा.
Video: 55 की उम्र, एक्सीडेंट में टूटी कमर... पर थामी टोटो की स्टेयरिंग, यह 'सुपरवुमन' अब किसी से कम नहीं
Jamshedpur Snehlata Devi Inspiring Story: कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों, तो किस्मत के थपेड़े भी घुटने टेक देते हैं. जमशेदपुर की 55 वर्षीय स्नेहलता देवी आज इस बात का जीता-जागता सबूत बन चुकी हैं. 15 साल पहले पति के असमय निधन ने जिंदगी में अंधेरा भर दिया था, लेकिन उन्होंने हाथ फैलाने के बजाय मेहनत का रास्ता चुना. कभी राशन की दुकान चलाई, कभी सिलाई की तो कभी कैंटीन में चूल्हा फूंका. संघर्ष चल ही रहा था कि एक दर्दनाक हादसे ने उनकी कमर और पैर की हड्डियां तोड़ दीं. काम छूटा, शरीर टूट गया, लेकिन दिल में जल रही खुदमुख्तारी (आत्मनिर्भरता) की मशाल नहीं बुझी. चार दीवारों में कैद होने के बजाय स्नेहलता देवी ने लोन पर टोटो (ई-रिक्शा) निकाला और समाज की झिझक व उम्र की बंदिशों को दरकिनार कर सड़कों पर उतर गईं. कोख से कोई संतान न होने के बावजूद वे खुद को बेसहारा नहीं मानतीं. आज वे न सिर्फ सम्मान के साथ अपनी आजीविका कमा रही हैं, बल्कि अपनी मेहनत की कमाई से दूसरों की मदद भी करती हैं. जमशेदपुर की सड़कों पर टोटो की स्टेयरिंग संभाले स्नेहलता जी गर्व से कहती हैं कि बैठे रहने से कोई रोटी नहीं देता. जब तक शरीर में सांस है, काम करती रहूंगी। उम्र तो बस एक आंकड़ा है, मेरा हौसला आज भी 18 साल का है.
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