क्या पीरियड्स आपको बना सकते हैं एक बेहतर एथलीट? [Can your period make you a better athlete?]
खेल की दुनिया में पीरियड्स पर आज भी खुलकर बात नहीं होती, लेकिन इसे नजरअंदाज करना महिला खिलाड़ियों के लिए खतरनाक हो सकता है. दुनिया की सबसे बेहतरीन ट्राइएथलीटों में से एक, लॉरा फिलिप अपनी ट्रेनिंग अपने पीरियड्स साइकिल के हिसाब से तय करती हैं. जानिए, उन्होंने ऐसा फैसला क्यों किया और इसके क्या नतीजे रहे. Menstruation is still a taboo topic in sports, but ignoring the menstrual cycle can be dangerous for female athletes. Laura Philipp, one of the best triathletes on the planet, aligns her training program with her cycle. #WomensHealth #dwsportshindi #dwhindi
गुजरात: 2 दिन में दूसरी बार प्रत्यारोपण के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन से अहमदाबाद पहुंचा हार्ट
अहमदाबाद, 2 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय रेलवे ने 2 दिन में दूसरी बार वंदे भारत एक्सप्रेस से दान किया हुआ हार्ट पहुंचाया है। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि हार्ट को हृदय प्रत्यारोपण के लिए अंकलेश्वर से अहमदाबाद लाया गया। यह एक समय महत्वपूर्ण ऑपरेशन था।
दान किया हुआ हार्ट 2 अगस्त को ट्रेन नंबर 20901 मुंबई सेंट्रल–गांधीनगर कैपिटल वंदे भारत एक्सप्रेस से लाया गया। इसे अंकलेश्वर के जयाबेन मोदी मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल से निकाला गया था।
इस हार्ट को अहमदाबाद के यूएन मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर में प्रत्यारोपित किया जाना था।
इस ऑपरेशन के लिए पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस को अंकलेश्वर रेलवे स्टेशन पर विशेष स्टॉप दिया गया, ताकि अंग को बिना देरी के कोच ई- 01 में सुरक्षित रूप से रखा जा सके।
ट्रेन के अहमदाबाद पहुंचने के बाद रेलवे के वाणिज्यिक कर्मचारी, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और गुजरात पुलिस ने प्लेटफॉर्म 1 से ग्रीन कॉरिडोर बनाया, ताकि हार्ट को कम से कम समय में यूएन मेहता अस्पताल पहुंचाया जा सके।
पश्चिम रेलवे के अनुसार, प्रत्यारोपण यूएन मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर की विशेषज्ञ मेडिकल टीम द्वारा किया जाएगा।
यह ऑपरेशन 2 दिन पहले हुए एक और ऐतिहासिक दान किए हुए हार्ट के इसी तरह के प्रत्यारोपण के बाद हुआ है। तब भी इसी वंदे भारत सेवा से सूरत से अहमदाबाद तक जीवित हार्ट ले जाया गया था।
रेलवे और मेडिकल अधिकारियों ने उस अभियान को भारत में ट्रेन से दान किए हुए हार्ट का पहला परिवहन बताया था। भारी बारिश और गुजरात के कुछ हिस्सों में बाढ़ जैसी स्थिति के बावजूद अंग लगभग 2 घंटे में अहमदाबाद पहुंच गया था।
इस ऑपरेशन से यह साबित हुआ कि हाई-स्पीड रेल संवेदनशील अंग प्रत्यारोपण में मदद कर सकती है।
हृदय प्रत्यारोपण के लिए दान किए गए अंगों को एक सीमित समय के अंदर मरीज तक पहुंचाना जरूरी होता है, ताकि वे खराब न हों।
रेलवे अधिकारियों ने कहा कि वंदे भारत एक्सप्रेस की रफ्तार और समय पर चलना दान किए गए अंगों को तेजी से पहुंचाने में मदद कर रहा है। इससे उन देरी को कम किया जा रहा है, जो प्रत्यारोपण के नतीजों को प्रभावित कर सकती हैं।
पश्चिम रेलवे ने कहा कि उसने रविवार के ऑपरेशन को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए अस्पतालों, राज्य पुलिस, मेडिकल टीमों और रेलवे अधिकारियों के साथ करीबी समन्वय किया।
रेलवे ने एक बयान में कहा, भारतीय रेलवे ने एक बार फिर मानवता की सेवा और जीवन बचाने की अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। वंदे भारत एक्सप्रेस के जरिए जीवित हार्ट को तेजी से पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अधिकारियों ने कहा, लगातार दो बार दान किए हुए हार्ट को सफलतापूर्वक पहुंचाना दिखाता है कि रेलवे की आधुनिक, हाई-स्पीड और समयबद्ध सेवाएं अब सिर्फ यात्री परिवहन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा सेवा में भी मदद कर रही हैं।
पश्चिम रेलवे ने यह भी कहा कि वह भविष्य में भी ऐसी मानवीय और जीवन रक्षक गतिविधियों के लिए हर संभव मदद देने के लिए प्रतिबद्ध है।
--आईएएनएस
एएमटी/डीकेपी
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