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तबाह होने वाला है टोक्यो! खौफ में जापान बना रहा दूसरी राजधानी? रेस में 4 शहरों का नाम

जापानी संसद ने देश की एक 'दूसरी राजधानी' बनाने के ऐतिहासिक कानून को मंजूरी दे दी है. वैज्ञानिकों और ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक अगले 30 सालों में टोक्यो में भयानक जलजला आने वाला है. जिसके बाद पूरा देश ठप्प पड़ जाएगा. इसी तबाही से निपटने के लिए ताकाइची सरकार ने मास्टरप्लान तैयार किया है. जापानी सरकार की बैकअप राजधानी की रेस में ओसाका, नागोया, फुकुओका और सपोरो जैसे शहर सबसे आगे हैं.

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कौन हैं गुरनूर बरार? 6,6,6,6…से टेस्ट मैच में मचाई सनसनी, श्रीलंका के गेंदबाजों की जमकर की धुनाई!

India vs Sri Lanka के वॉर्म-अप मैच में शानदार खेल दिखाने वाले गुरनूर बरार खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं। दरअसल एक ही ओवर में चार छक्के लगाने वाले गुरनूर के अलग अंदाज को देखकर हेड कोच गौतम गंभीर भी मुस्कुराते और तालियां बजाते नजर आए। लेकिन गुरनूर बरार की कहानी सिर्फ इस विस्फोटक पारी तक सीमित नहीं है। लंबी कद-काठी वाले इस तेज गेंदबाज ने चोट, टीम से बाहर होने और लंबे इंतजार के बाद भारतीय टीम तक पहुंचने का रास्ता तय किया है।

गुरनूर बरार कौन हैं?

दरअसल गुरनूर बरार पंजाब के तेज गेंदबाज हैं, जिन्होंने कम उम्र में क्रिकेट को गंभीरता से अपनाया। करीब 6 फीट 5 इंच लंबाई की वजह से उन्हें गेंद को उछाल दिलाने और बल्लेबाजों को परेशान करने में खास फायदा मिलता है। उन्होंने करीब 15 साल की उम्र में क्रिकेट को अपना पूरा समय देना शुरू किया था। इससे पहले वह मोहाली में टेनिस बॉल क्रिकेट खेलते थे और किसी बड़ी क्रिकेट अकादमी से नियमित ट्रेनिंग नहीं लेते थे।

वहीं परिवार के सपोर्ट के बाद उन्होंने चैंपियंस क्रिकेट अकादमी में ट्रेनिंग शुरू की। बाद में तेज गेंदबाजी के विशेषज्ञ कोच वरिंदर सिंह के साथ काम किया। लगातार मेहनत के साथ उनकी रफ्तार और गेंद पर कंट्रोल बेहतर हुआ। शुरुआती दौर में वह करीब 135 किमी/घंटे की रफ्तार से गेंद डालते थे। इसके बाद उनकी फिटनेस, रन-अप और गेंदबाजी एक्शन पर काम किया गया, जिससे उनके खेल में बड़ा बदलाव देखने को मिला।

चोट से वापसी कर घरेलू क्रिकेट में किया धमाका

दरअसल गुरनूर बरार ने पंजाब की अंडर-23 टीम से अपनी पहचान बनानी शुरू की। विजय हजारे ट्रॉफी 2021-22 में उन्होंने सीनियर क्रिकेट में कदम रखा। इसके बाद रणजी ट्रॉफी में उनका डेब्यू भी यादगार रहा। रेलवे के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने सिर्फ 16 रन देकर 4 विकेट लिए और पंजाब को बड़ी बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई। 2023 में चोटिल राज अंगद बावा की जगह उन्हें पंजाब किंग्स के साथ आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट मिला। आईपीएल में उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले। लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ अपने पहले मैच में उन्होंने तीन ओवर गेंदबाजी की और 42 रन दिए। इसके बाद वह टीम से बाहर हो गए।

पीठ में स्ट्रेस फ्रैक्चर की समस्या सामने आई

वहीं इसी दौरान उनकी पीठ में स्ट्रेस फ्रैक्चर की समस्या सामने आई और वह 2023-24 के घरेलू सीजन से बाहर हो गए। यह दौर उनके करियर के लिए मुश्किल था, लेकिन उन्होंने वापसी की तैयारी शुरू कर दी। कोच वरिंदर सिंह के साथ करीब तीन महीने के खास ट्रेनिंग प्रोग्राम में उनकी गेंदबाजी तकनीक, फिटनेस और ताकत पर काम किया गया।

हालांकि इस मेहनत का असर 2024 में दिखा। शेर-ए-पंजाब टी20 कप में गुरनूर ने 22 विकेट लिए और टूर्नामेंट के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। इसके बाद 2024-25 रणजी ट्रॉफी में उन्होंने पंजाब के लिए 7 मैचों में 26 विकेट लेकर अपनी दावेदारी मजबूत की। इसी प्रदर्शन के बाद उनका नाम राष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीरता से लिया जाने लगा।

गुजरात टाइटन्स से भारतीय टीम तक का सफर

वहीं गुरनूर की मेहनत का अगला बड़ा पड़ाव आईपीएल बना। नवंबर 2024 की मेगा नीलामी में गुजरात टाइटन्स ने उन्हें 1.3 करोड़ रुपए में खरीदा। टीम में अनुभवी तेज गेंदबाजों की मौजूदगी के कारण उन्हें लगातार खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन उन्होंने इस दौरान टीम के बड़े खिलाड़ियों से काफी कुछ सीखा। कैगिसो रबाडा और मोहम्मद सिराज जैसे गेंदबाजों के साथ रहना और आशीष नेहरा की देखरेख में ट्रेनिंग करना उनके लिए अहम रहा।

इससे पहले गुरनूर को भारतीय टीम के नेट्स में भी गेंदबाजी करने का मौका मिल चुका था। उन्होंने रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे बल्लेबाजों को गेंदबाजी की और गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल से भी काम करने का अवसर मिला। ऐसे अनुभवों ने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया। दरअसल अब चर्चा में आने की सबसे बड़ी वजह उनका श्रीलंका XI के खिलाफ वॉर्म-अप मैच का प्रदर्शन है। मुकाबले के दूसरे दिन भारत की पारी के आखिरी हिस्से में गुरनूर ने सिर्फ 18 गेंदों पर नाबाद 36 रन बना दिए। उन्होंने 4 छक्के और 2 चौके लगाए। उनका स्ट्राइक रेट 200 रहा।

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टेस्ट में रनों की 5 सबसे बड़ी हार, 675 रन से मैच गंवा चुकी है टीम, 98 साल से अटूट है विश्व कीर्तिमान

5 biggest defeat by runs in test history: टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में कुछ मुकाबले ऐसे भी रहे हैं, जहां टीमें रनों के विशाल अंतर से करारी शिकस्त झेलने पर मजबूर हुईं. साल 1928 में ऑस्ट्रेलिया को इंग्लैंड के हाथों शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था, जो आज भी टेस्ट इतिहास की रनों के लिहाज से सबसे बड़ी हार है. इसके अलावा इंग्लैंड को 1934 में और दक्षिण अफ्रीका को 1911 में रनों की भारी पराजय मिली. वहीं, मॉडर्न युग में अफगानिस्तान 2023 में और ऑस्ट्रेलिया 2018 में बड़े अंतर से मुकाबला गंवाकर इस अनचाही लिस्ट में शामिल हैं. Sat, 22 Aug 2026 05:01:03 +0530

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