Honor Play 11 Pro लॉन्च: मिलेगी 7,000mAh बैटरी और OLED डिस्प्ले, जानें कीमत और स्पेसिफिकेशन
Honor ने अपने Play सीरीज का नया स्मार्टफोन Honor Play 11 Pro चीन में लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इस फोन को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर लिस्ट करते हुए इसकी कीमत, फीचर्स और उपलब्धता की जानकारी साझा की है। यह स्मार्टफोन बड़ी बैटरी, हाई-रिफ्रेश रेट OLED डिस्प्ले और दमदार हार्डवेयर के साथ आता है।
Honor Play 11 Pro के फीचर्स और स्पेसिफिकेशन
Honor Play 11 Pro में 6.6 इंच का 1.5K OLED फ्लैट डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। डिस्प्ले की पीक ब्राइटनेस 6,500 निट्स है और इसमें 95 प्रतिशत स्क्रीन-टू-बॉडी रेशियो मिलता है। आंखों की सुरक्षा के लिए फोन में 3840Hz PWM Dimming तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया है।
स्मार्टफोन में MediaTek Dimensity 6500 प्रोसेसर दिया गया है। यह 8GB RAM और 256GB इंटरनल स्टोरेज के साथ आता है। हालांकि, इसमें माइक्रोएसडी कार्ड के जरिए स्टोरेज बढ़ाने की सुविधा नहीं मिलेगी। फोन Android 16 आधारित MagicOS 10 पर चलता है।
7,000mAh बैटरी के साथ 45W फास्ट चार्जिंग
Honor Play 11 Pro की सबसे बड़ी खासियत इसकी 7,000mAh की बड़ी बैटरी है। इसके साथ 45W वायर्ड फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है। कंपनी का दावा है कि 1,000 चार्जिंग साइकल के बाद भी बैटरी अपनी मूल क्षमता का 80 प्रतिशत तक बनाए रखेगी, यानी यह करीब छह साल तक बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।
50MP कैमरा और दमदार बिल्ड क्वालिटी
फोटोग्राफी के लिए फोन में 50 मेगापिक्सल का रियर कैमरा और 8 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है। इसके अलावा फोन में मेटल फ्रेम, IP66 डस्ट और वाटर रेजिस्टेंस तथा SGS 5-स्टार ड्रॉप रेजिस्टेंस सर्टिफिकेशन भी मिलता है, जो इसकी मजबूती को बढ़ाता है।
कीमत और उपलब्धता
Honor Play 11 Pro को चीन में 8GB RAM + 256GB स्टोरेज वेरिएंट में लॉन्च किया गया है। इसकी कीमत 2,099 युआन (करीब 25,000 रुपये) रखी गई है। यह स्मार्टफोन Moon Silver, Sunrise Gold और Midnight Black कलर ऑप्शन में आएगा। फिलहाल इसकी प्री-बुकिंग चीन में शुरू हो चुकी है।
Explainer: कौन हैं इराक में ईरान समर्थित शिया हथियारबंद समूह, जिसे निशाना बना रहा अमेरिका और सऊदी अरब
Explainer: मिडिल ईस्ट में तनाव जारी है. हालांकि, पिछले दो दिनों से अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कोई बड़ी सैन्य कार्रवाई नहीं की है. लेकिन बीते सप्ताह अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित शिया हथियारबंद गुटों पर ताबड़तोड़ हमले किए. इन सहयोगियों का कहना है कि ये इसी गुट ने सऊदी तेल ठिकानों पर हुए ड्रोन हमले किए थे. अमेरिका और सऊदी अरब के इन हमलों ने उन मिलिशिया (हथियारबंद गुटों) पर ध्यान केंद्रित किया है, जिनके पास इराक में बहुत ज्यादा राजनीतिक और सैन्य ताकत है.
इराक में इतने शक्तिशाली कैसे बने मिलिशिया?
बता दें कि ईरान समर्थि ये शिया गुट तब उभरकर सामने आया जब करीब 23 साल पहले 2003 में अमेरिका के नेतृत्व में इराक पर हमले के बाद राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन की सरकार गिर गई थी और तेहरान ने इराक की राजनीति और सुरक्षा मामलों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली. ईरान से मिलने वाली आर्थिक और सैन्य मदद से ये मिलिशिया ऐसी ताकतवर सेना बन गए हैं जो मारक क्षमता के मामले में राष्ट्रीय सेना का मुकाबला कर सकती हैं. वे इराक के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक ढांचे में भी गहराई से जुड़े हुए हैं; वे बिजनेस नेटवर्क बना रहे हैं और संसद व सरकार में भी जगह बना रहे हैं.
मिलिशिया की गतिविधियों पर नजर रखने वाले दो सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, वे 'इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक' का हिस्सा हैं. यह लगभग 10 कट्टरपंथी शिया हथियारबंद गुटों का एक समूह है, जिसके पास कुल मिलाकर लगभग 50,000 लड़ाके और हथियार मौजूद हैं. जिनमें लंबी दूरी की मिसाइलें और एंटी-एयरक्राफ्ट हथियार भी शामिल हैं.
'रेजिस्टेंस ग्रुप' ईरान के क्षेत्रीय प्रॉक्सी (प्रतिनिधि) बलों के नेटवर्क का एक अहम हिस्सा है. इस समूह का कहना है कि 2023 में गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से उसने इजरायल और इराक व सीरिया में अमेरिकी सेना पर दर्जनों मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं. ऐसे में ट्रंप प्रशासन ने इराकी नेताओं पर दबाव डाला है कि वे इन हथियारबंद गुटों पर लगाम लगाएं.
कौन से हैं सबसे ताकतवर ग्रुप?
'कताइब हिज्बुल्लाह' इराक में 'इस्लामिक रेजिस्टेंस' का सबसे ताकतवर गुट है. ईरान के सबसे करीबी हथियारबंद ग्रुप्स में से एक है. जिसे 2000 के दशक के बीच में अबू महदी अल-मुहंदिस ने बनाया था. 2020 में बगदाद पर हुए अमेरिकी हवाई हमले में मुहंदिस और ईरान के बड़े मेजर-जनरल कासिम सुलेमानी की मौत हो गई थी. इस ग्रुप के बनने के कुछ ही समय बाद ये मिलिट्री और डिप्लोमैटिक ठिकानों पर जानलेवा हमले करने के लिए कुख्यात हो गया. इस पर स्नाइपर, रॉकेट, मोर्टार हमलों और सड़क किनारे बम (IED) का इस्तेमाल करने का आरोप लगा.
10,000 सदस्यों वाला संगठन है कताइब हिज्बुल्लाह
अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस के मुताबिक, कताइब हिज्बुल्लाह के 10,000 तक सदस्य हैं. इराकी अधिकारियों और ग्रुप के सदस्यों का कहना है कि उनके पास ड्रोन, रॉकेट और कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का जखीरा है. अमेरिका ने कई बार कताइब हिज्बुल्लाह के ठिकानों, बेस और ट्रेनिंग व लॉजिस्टिक्स हब पर हमले किए हैं. ग्रुप ने अमेरिकी सेना पर हमले रोकने की सरकारी अपील को मानने से इनकार किया है और उसे चुनौती दी है.
कताइब हिज्बुल्लाह सुन्नी विद्रोहियों के खिलाफ लड़ चुका है जंग
इसने सीरिया के गृह युद्ध के दौरान ज्यादातर सुन्नी विद्रोहियों के खिलाफ दूसरे शिया मिलिशिया के साथ मिलकर लड़ाई लड़ी. ग्रुप ने कहा है कि उसने कई हाई-प्रोफाइल अपहरण किए हैं. इराकी अधिकारियों के मुताबिक, मिलिशिया ने 2023 में इराक में रिसर्च ट्रिप पर आईं इजरायली-रूसी पीएचडी छात्रा एलिजाबेथ त्सुरकोव का अपहरण कर लिया था.
2007 में अमेरिका ने किया था खजाली को गिरफ्तार
'असाइब अहल अल-हक' (लीग ऑफ द राइटियस) की कमान कैस अल-खजाली के हाथ में है. 1974 में बगदाद के गरीब सदर सिटी इलाके में जन्मे खजाली ने इराक के बड़े नेताओं में से एक बनने की कोशिश में अपनी छवि को नरम बनाने की कोशिश की है. अमेरिका के हमले के बाद मची अफरातफरी के बीच खजाली चर्चा में आए. 2007 में, उन्हें अमेरिकी सेना ने गिरफ्तार किया था. उस पर दक्षिणी इराक के शिया बहुल इलाके कर्बला में सरकारी परिसर पर हमले में शामिल होने का आरोप था, जिसमें पांच अमेरिकी सैनिक मारे गए थे. इराक में अमेरिकी जेल में लगभग तीन साल बिताने के बाद उसे रिहा कर दिया गया.
अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ की थी बड़ी कार्रवाई
खजाली ने उग्र धर्मगुरु मोक्तादा अल-सद्र की मेहदी सेना के साथ मिलकर अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, लेकिन 2006 में अपना खुद का हथियारबंद गुट बना लिया. वह उन कई मिलिशिया लड़ाकों में से एक थे जो 2014 में इस्लामिक स्टेट द्वारा देश के बड़े हिस्से पर कब्जा करने और आतंक का राज कायम करने के बाद उससे लड़ने के लिए उत्तरी इराक गए थे.
इराक के गृहयुद्ध में भी शामिल हो चुका है खजाली का गुट
2020 में, खजाली ने कहा था कि इस्लामिक स्टेट की हार के बाद इराक में हजारों अमेरिकी सैनिकों के बने रहने का कोई औचित्य नहीं है और अगर वे नहीं गए तो उन्हें कब्जा करने वाली सेना माना जाएगा. मिलिशिया कमांडर होने के बावजूद, गाजा युद्ध के दौरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिलिशिया के हमलों में खजाली शामिल नहीं हुए और वे इराक के शिक्षा मंत्रालय के साथ काम करते रहे. उन्होंने इस बात से इनकार किया है कि 2006 से 2007 तक इराक के गृह युद्ध के दौरान हजारों लोगों की मौत में उनका मिलिशिया गुट शामिल था.
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