'वो मुझे गलत तरीके से छूने लगा...', विजय वर्मा ने किया चौंकाने वाला खुलासा, खोली मॉडलिंग इंडस्ट्री की पोलपट्टी
Vijay Varma on Casting Couch: बॉलीवुड की चमक-दमक और ग्लैमर से भरी दुनिया बाहर से जितनी खूबसूरत नजर आती है, उसके पीछे संघर्ष, असफलताओं और कई कड़वे अनुभवों की लंबी कहानी छिपी होती है. वहीं अक्सर ये देखा जाता है कास्टिंग काउच की चर्चा एक्ट्रेसेस को लेकर होती है, लेकिन समय-समय पर कई एक्टर भी अपने ऐसे अनुभव साझा कर चुके हैं. अब बॉलीवुड के दमदार एक्टर विजय वर्मा ने भी अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों को याद करते हुए एक ऐसा अनुभव साझा किया है, जिसने इंडस्ट्री में नए कलाकारों के सामने आने वाली चुनौतियों पर फिर से चर्चा छेड़ दी है. विजय ने बताया कि फिल्मों में पहचान बनाने से पहले उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया में भी किस्मत आजमाने की कोशिश की थी. इसी दौरान उन्हें एक ऐसे अनुभव का सामना करना पड़ा, जिसने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया.
मॉडलिंग के दिनों में हुआ था भयानक अनुभव
विजय वर्मा ने बताया कि करियर की शुरुआत में उन्होंने हैदराबाद में मॉडलिंग करने की कोशिश की थी. उस समय वो छोटे स्तर पर काम कर रहे थे और इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए लगातार कोशिश कर रहे थे. उन्होंने याद करते हुए कहा, "मैंने हैदराबाद में मॉडल बनने की कोशिश की थी. बस छोटे लेवल पर शौकिया तौर पर काम कर रहा था. उसी दौरान मेरी मुलाकात एक मॉडल को-ऑर्डिनेटर से हुई." विजय के मुताबिक, शुरुआत में सब कुछ नार्मल लग रहा था, लेकिन धीरे-धीरे उस व्यक्ति का बिहेवियर उन्हें उनकंफर्टबल महसूस कराने लगा.
'वो मुझे गलत तरीके से छूने लगा'
अपने अनुभव को साझा करते हुए विजय वर्मा ने कहा, "वो मेरे साथ थोड़ा गलत बर्ताव करने लगा. जैसे मुझे गलत तरीके से छूने की कोशिश करने लगा. मैंने तुरंत कहा, 'भाई, ये क्या है? तुम क्या कर रहे हो?'" विजय ने बताया कि उन्होंने उसी समय इस बिहेवियर का विरोध किया और साफ तौर पर अपनी नाराजगी जताई.
'नए कलाकार जल्दी निराश हो जाते हैं'
विजय वर्मा ने कहा कि इंडस्ट्री में नया होने की वजह से उस समय वो काफी निराश हो गए थे. उन्होंने माना कि जब कोई कलाकार अपने करियर की शुरुआत कर रहा होता है, तब ऐसे अनुभव मानसिक रूप से काफी प्रभावित कर सकते हैं. उन्होंने कहा, "मैं काफी निराश हो गया था. जब आप नए होते हैं, तो बहुत जल्दी हताश हो जाते हैं. लेकिन फिर मैंने सोचा कि अगर मुझे एक्टिंग में ही करियर बनाना है, जो मैं हमेशा से करना चाहता था, तो मुझे इन मुश्किलों का सामना करना होगा."
एक्टिंग स्कूल ने भी कर दिया था मना
विजय वर्मा ने अपनी एक्टिंग के शुरुआती सफर का एक और दिलचस्प किस्सा साझा किया. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने हैदराबाद के 'सूत्रधार स्कूल ऑफ एक्टिंग' में दाखिला लेने की कोशिश की, तो शुरुआत में उन्हें एंट्री देने से इनकार कर दिया गया था. उन्होंने कहा, "मैं स्कूल गया और कहा कि मैं एक्टिंग सीखना चाहता हूं. लेकिन उन्होंने मुझे मना कर दिया. उनका कहना था कि एक्टिंग सिर्फ शौक नहीं है. इसके लिए पूरी कमिटमेंट और डेडिकेशन चाहिए. ये ऐसा काम नहीं है जिसे दो दिन करके छोड़ दिया जाए." हालांकि, इस जवाब ने विजय का हौसला कम नहीं किया. उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी और खुद को अभिनय के लिए तैयार किया.
संघर्ष के बाद मिली पहचान
शुरुआती मुश्किलों और असफलताओं के बावजूद विजय वर्मा ने कभी हार नहीं मानी. उन्होंने थिएटर से लेकर फिल्मों और ओटीटी तक अपनी दमदार एक्टिंग एबिलिटी का लोहा मनवाया. आज विजय वर्मा हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे टैलेंटेड और वर्सटाइल एक्टर्स में गिने जाते हैं. उन्होंने अपने अलग-अलग किरदारों से दर्शकों और समीक्षकों दोनों की खूब तारीफ हासिल की है. चाहे गंभीर भूमिकाएं हों, निगेटिव किरदार या फिर इंटेंस ड्रामा, विजय ने हर भूमिका में अपनी अलग पहचान बनाई है.
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स्वदेशी डीएससी ए24 जहाज समुद्री ऑपरेशन के लिए तैयार, कोलकाता में लॉन्च
कोलकाता, 2 अगस्त (आईएएनएस)। आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल के तहत भारतीय नौसेना ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट (डीएससी) परियोजना का पांचवां और अंतिम पोत रविवार को कोलकाता स्थित टीटागढ़ शिपयार्ड में लॉन्च किया गया। यह समारोह नौसेना की परंपराओं और औपचारिक रीति-रिवाजों के अनुरूप भव्य तरीके से आयोजित किया गया।
भारतीय नौसेना के कार्मिक प्रमुख वाइस एडमिरल गुरचरण सिंह की उपस्थिति में पोत को पानी में उतारा गया। इस अवसर पर भारतीय नौसेना और एम/एस टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (टीआरएसएल) के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
डीएससी ए24, डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट प्रोजेक्ट का पांचवां जहाज है। इसे यार्ड 329 के नाम से भी जाना जाता है। इस जहाज का निर्माण टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड, कोलकाता द्वारा आईआरएस और नेवल नियमों के अनुसार किया गया है।
जहाज में कैटामरन-हल फॉर्म दिया गया है और इसका डिस्प्लेसमेंट लगभग 300 से 400 टन के बीच है। इस डिजाइन की वजह से जहाज को बेहतर स्थिरता, बड़ा डेक एरिया और समुद्र में बेहतर प्रदर्शन मिलता है, जो डाइविंग ऑपरेशन के लिए बेहद जरूरी हैं।
जहाज में कैटामरन-हल फॉर्म एक ऐसा डिजाइन है जिसमें एक ही बड़े ढांचे के बजाय समान आकार के दो समानांतर पतवार होते हैं, जो ऊपर एक साझा डेक या ब्रिजडेक द्वारा आपस में जुड़े होते हैं।
डीएससी ए24 अत्याधुनिक डाइविंग सिस्टम से लैस है और इसे खासतौर पर ऑपरेशनल डाइव्स करने के लिए तैयार किया गया है।
इस जहाज की सबसे बड़ी खासियत है स्वदेशी उपकरण। जहाज में इस्तेमाल होने वाले 70 प्रतिशत मुख्य और सहायक उपकरण स्वदेशी निर्माताओं से लिए गए हैं। इसी कारण डीएससी को आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल का गौरवशाली वाहक कहा जा रहा है।
भारतीय नौसेना में इन जहाजों के शामिल होने से डाइविंग सपोर्ट, अंडरवाटर इंस्पेक्शन, बचाव सहायता और तटीय ऑपरेशनल तैनाती की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।
भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे ये जहाज इंजीनियरिंग उत्कृष्टता और स्वदेशी क्षमता का प्रमाण हैं। ये जहाज न सिर्फ नौसेना की समुद्री ताकत बढ़ाएंगे बल्कि देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।
--आईएएनएस
वीकेयू/वीसी
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