जोधपुर एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर VS जैतावत ने 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026' पर बहस के दौरान IIT मद्रास के डायरेक्टर V कामाकोटी पर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा की टिप्पणी की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह "किसी भी नज़रिए से स्वीकार्य नहीं है।" कामाकोटी, परीक्षा सुधारों पर सरकार द्वारा बनाई गई हाई-लेवल टास्क फोर्स के सदस्य हैं। ANI से बात करते हुए जैतावत ने कहा कि प्रोफेसर कामाकोटी अपने क्षेत्र के जाने-माने एक्सपर्ट हैं और उन्हें पद्म श्री समेत कई सम्मान मिले हैं। कांग्रेस नेता का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि मशहूर एकेडमिक के खिलाफ की गई किसी भी व्यंग्यात्मक टिप्पणी को वापस लिया जाना चाहिए।
यह टिप्पणी किसी भी नज़रिए से स्वीकार्य नहीं है। प्रोफ़ेसर वी. कामाकोटी दुनिया भर में मशहूर कंप्यूटर साइंटिस्ट हैं। वे IIT मद्रास के डायरेक्टर और प्रतिष्ठित पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित व्यक्ति हैं। उनके एकेडमिक करियर को देखें तो प्रतिष्ठित जर्नल्स में उनके 150 से ज़्यादा रिसर्च पेपर प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने कई रिसर्च प्रोजेक्ट्स के ज़रिए देश की तरक्की में अहम योगदान दिया है।
संसद में मज़ाकिया और व्यंग्यात्मक अंदाज़ में ऐसे एकेडमिक को 'गोमूत्र (गाय का पेशाब) विशेषज्ञ' कहकर उनका मज़ाक उड़ाना किसी भी एकेडमिक को मंज़ूर नहीं होगा। देश का कोई भी एकेडमिक इसे पसंद नहीं करेगा। भले ही गोमूत्र के विषय पर आगे बहस हो सकती है, लेकिन संसद में एकेडमिक्स के बारे में ऐसी बातें स्वस्थ लोकतांत्रिक बातचीत का हिस्सा नहीं हैं। मेरा मानना है कि जिन लोगों ने ये बातें कहीं, उन्हें देश के एकेडमिक समुदाय के प्रति सम्मान दिखाते हुए शालीनता से इन्हें वापस ले लेना चाहिए।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक में कहा कि मैसूरु भारत की शाश्वत सांस्कृतिक पहचान रहा है, शहर ने उस परंपरा को संजोकर रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामी विवेकानंद के जीवन, संदेश और आदर्शों को समर्पित 'स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र - विवेका स्मारक' का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति से विभूति का निर्माण एकाएक नहीं होता। इसके लिए हमें जीवन की अनगिनत परीक्षाएं देनी होती है, साधनाएं करनी होती हैं, तप करना होता है, खुद को तपाना और खपाना पड़ता है। ख्याति के बाद तो संसार पीछे खड़ा होता है। लेकिन तप के समय महान विभूतियों को पहचानना आसान नहीं होता।
मोदी ने कहा कि जो साधक को तपस्या में पहचानता है, वो उसकी सिद्धि का सहभागी भी होता है। इसलिए भाई-बहनों स्वामी विवेकानंद जी के जीवन में मैसूरु का इतना अहम योगदान था। करीब 130 वर्ष पहले स्वामी जी 1 युवा सन्यासी के रूप में भ्रमण करते हुए यहां आए थे। तब उनकी प्रसिद्धि वैसी नहीं थी, लेकिन विचार उतने ही ऊंचे थे। उस समय उन्हें जिन लोगों ने पहचाना, जो उनके साथ जुड़े उनमें से एक प्रमुख मैसूरु के तत्कालीन महाराजा का भी था। जब स्वामी विवेकानंद जी अमेरिका में थे, तब उन्होंने वहां से मैसूरु के महाराजा को एक पत्र लिखा था, उसमें उन्होंने स्वयं महाराजा के सहयोग का उल्लेख किया था।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ने भारतीय चेतना को आत्मसात किया था। उन्होंने शास्त्रों को आत्मसात किया था। जो कहते हैं कि वास्तव में वही जीता है, जो दूसरों के लिए जीता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ से जुड़ी सेवाएं हों या प्राकृतिक आपदा में राहत कार्य, श्री रामकृष्ण आश्रम ने स्वामी विवेकानंद जी की विरासत को जीवंत रखा है। मुझे विश्वास है कि Viveka Smaraka साधकों और श्रद्दालुओं के लिए आत्मिक उत्थान के एक तीर्थ बनेगा। स्वामी विवेकानंद जी की प्रेरणा थी शिव ज्ञाने, जीव सेवा, यानी जीव की सेवा ही शिव की सेवा है। हमें इस स्मारक में ऐसे युवाओं को घड़ना है, जिनके लिए समाज और राष्ट्र के हित, गरीब और वंचित के दुःख आने सुख-दुःख से ऊपर हो। जिन युवाओं के लिए राष्ट्र प्रथम ही सर्वोपरि मंत्र हो, मां भारती की सेवा ही जिनका जीवन लक्ष्य हो।
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी युवाओं की शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार मानते थे। उन्होंने ये देखा था कि कैसे दुनिया के देश अपने युवाओं को शिक्षित बना रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से तब भारत गुलाम था। भारत के युवा भी गुलामी की जंजीरो में जकड़े हुए थे। उस दौर से लेकर आज तक भारत के युवा ने एक लंबी यात्रा तय की है। भारत का जो युवा कभी जंजीरों में था, आज वो युवा दुनिया के विकास को गति दे रहा है। आज भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेज गति से आगे बढ़ रही है। ये सब भारत के युवाओं के सामर्थ्य की वजह से ही हो रहा है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। वो भी भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।
मोदी ने कहा कि आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाईल फोन निर्माता बन चुका है वो भी भारत के युवाओं के सामर्थ्य से। आज भारत में बने digital solutions दुनिया के अनेक देशों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। वो भी भारत के युवाओं के सामर्थ्य से। आज भारत सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की नई यात्रा पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। वो भी भारत के युवाओं के सामर्थ्य की वजह से। स्वामी विवेकानंद जी राष्ट्र उत्थान के लिए शिक्षा के साथ-साथ समानता को भी उतना ही अहम मानते थे। शिक्षा में भेदभाव न हो, अवसरों में भेदभाव न हो, आज ये देश का विजन बन गया है। उन्होंने कहा कि युवाशक्ति का स्वास्थ्य, अनुशासित और आत्मविश्वास से भरे रहना बहुत जरूरी है। जो देश खेलों को महत्व देते हैं, वहां के युवाओं में इन तीनों गुणों का तेजी से विकास होता है। इसलिए आज खेलों को राष्ट्र निर्माण को एक महत्वपूर्ण धारा के रूप में देखा जा रहा है।
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