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दिल्ली-6 की छतों से गायब हुई पतंगबाजी, जानिए कैसे फीकी पड़ी पुरानी दिल्ली की यह सांस्कृतिक शान

Delhi Kite Flying Culture: सावन का महीना आते ही कभी दिल्ली-6 की छतों पर पतंगबाजी शुरू हो जाती थी. सुबह से शाम तक आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें नजर आती थीं. बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी छतों पर जमा होते थे. पतंगों के पेच लड़ते थे और किसी की पतंग कटते ही गलियों में "वो काटा" की आवाज गूंज उठती थी. लेकिन अब दिल्ली-6 के आसमान में पहले जैसी पतंगें नजर नहीं आतीं.

पतंगबाजी थी पुरानी दिल्ली की पहचान

पुरानी दिल्ली में पतंगबाजी सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति का हिस्सा रही है. गर्मी हो या सावन का मौसम, पतंग उड़ाने के बहाने परिवार और दोस्त घंटों छतों पर साथ रहते थे. पतंग कटने के बाद कटी पतंग के पीछे भागते बच्चों की तस्वीर भी दिल्ली-6 की पहचान हुआ करती थी. उस दौर में पतंगबाजी लोगों को एक-दूसरे से जोड़ती थी. छतों पर होने वाली महफिलों में रिश्ते मजबूत होते थे और लोगों के बीच अपनापन और मिठास देखने को मिलती थी.

फिल्मों में भी दिखी दिल्ली की पतंगबाजी

दिल्ली की पतंगबाजी का जिक्र फिल्मों में भी देखने को मिला है. कई फिल्मों में पतंग को बचपन, सपनों, उम्मीद और आजादी से जोड़कर दिखाया गया. पुरानी दिल्ली की गलियों और छतों पर होने वाली पतंगबाजी ने सिनेमा को भी अपनी ओर आकर्षित किया.

पतंग कारोबार पर पड़ा बड़ा असर

पतंगबाजी से जुड़े व्यापारियों के लिए भी यह कारोबार कभी अच्छी कमाई का जरिया था. दिल्ली-6 में कई परिवार पीढ़ियों से पतंग बनाने और बेचने का काम करते आए हैं. दुकानों पर अलग-अलग आकार और रंगों की पतंगें सजी रहती थीं. सावन और त्योहारों के दिनों में इन दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ रहती थी. व्यापारियों का कहना है कि पतंग का कारोबार उनका पुश्तैनी काम है और पहले दिल्ली-6 में बड़े पैमाने पर पतंग उड़ाई जाती थी. बाजार में भी काफी रौनक रहती थी, लेकिन अब इस कारोबार पर काफी असर पड़ा है.

मोबाइल और सोशल मीडिया ने बदली नई पीढ़ी की पसंद

व्यापारियों के मुताबिक, आजकल युवा मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया में ज्यादा समय बिता रहे हैं. ऐसे में पतंग उड़ाने का चलन धीरे-धीरे कम होता जा रहा है. उनका कहना है कि आने वाले समय में शायद पतंगबाजी की रौनक कुछ हद तक वापस लौटे, लेकिन इसमें समय लगेगा.

चीनी मांझे पर रोक का भी पड़ा प्रभाव

खतरनाक चीनी मांझे के बाजार में आने के बाद भी पतंगबाजी को लेकर कई तरह की घटनाएं सामने आईं. इसके बाद प्रशासन ने चीनी मांझे पर रोक लगाई और इसके खिलाफ कार्रवाई भी की. व्यापारियों का कहना है कि चीनी मांझे पर रोक लोगों और पक्षियों की सुरक्षा के लिए जरूरी है, लेकिन इसका असर पतंग के कारोबार पर भी पड़ा है. अब सुरक्षित डोर के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है.

महंगाई से बढ़ी कारोबारियों की मुश्किलें

महंगाई ने भी पतंग कारोबारियों और खरीदारों दोनों की मुश्किलें बढ़ाई हैं. व्यापारियों के मुताबिक, जो पतंग पहले एक रुपये में मिल जाती थी, उसकी कीमत अब करीब पांच रुपये तक पहुंच गई है. कच्चे माल और अन्य खर्च बढ़ने से पतंग की कीमत भी बढ़ी है, जिसका सीधा असर बिक्री पर पड़ रहा है.

बुजुर्गों की यादों में आज भी जिंदा है पतंगबाजी

दिल्ली-6 के बुजुर्ग आज भी उस दौर को याद करते हैं, जब आसमान पतंगों से भरा रहता था और छतों पर पतंग उड़ाने वालों की भीड़ होती थी. उनका कहना है कि उस समय पतंगबाजी सिर्फ एक खेल नहीं थी, बल्कि लोगों को जोड़ने का जरिया थी. छतों पर परिवार और पड़ोसी साथ आते थे, बच्चों की हंसी गूंजती थी और लोगों के बीच रिश्तों की एक अलग ही मिठास दिखाई देती थी.

यादें बाकी हैं, रौनक लौटने का इंतजार

आज आसमान कुछ खाली है, लेकिन पतंगों से जुड़ी यादें लोगों के दिलों में अब भी मौजूद हैं. पतंग सिर्फ कागज और डोर का खेल नहीं है. दिल्ली-6 के लिए यह बचपन की याद, परिवार की खुशी, रिश्तों की मिठास और कई छोटे व्यापारियों की रोजी-रोटी से जुड़ी है. व्यापारियों को उम्मीद है कि सुरक्षित डोर के साथ धीरे-धीरे इस पुराने कारोबार में फिर रौनक लौटेगी, लेकिन इसके लिए समय और नई पीढ़ी की दिलचस्पी दोनों जरूरी हैं.

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इस टी20 लीग में खेलेंगे अभिषेक शर्मा, शुभमन गिल और अर्शदीप सिंह, 30 अगस्त से खेला जाएगा मुकाबला

Abhishek Sharma shubman gill arshdeep singh play T20 League: शेर-ए-पंजाब टी20 लीग का आधिकारिक शुभारंभ मुल्लांपुर के पीसीए स्टेडियम में हुआ. जो 30 अगस्त से 13 सितंबर तक आयोजित होगी. इस टूर्नामेंट में छह टीमें और 27 मुकाबले राउंड-रॉबिन प्रारूप में खेले जाएंगे.शुभमन गिल, अर्शदीप सिंह, अभिषेक शर्मा और रमनदीप सिंह जैसे स्टार खिलाड़ी इसमें खेलते नजर आएंगे. गिल ने इसे युवाओं के लिए बड़ा मंच बताया. पीसीए सचिव गुरमीत सिंह ने कहा कि पंजाब हमेशा से बेहतरीन क्रिकेटर देता रहा है और यह लीग देश की प्रमुख टी20 प्रतियोगिताओं में शामिल होगी.

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Jasprit Bumrah की Knee Injury ने बढ़ाई Team India की टेंशन, Sri Lanka के खिलाफ गेंदबाजी आक्रमण पड़ेगा कमजोर

भारतीय टेस्ट टीम को श्रीलंका के खिलाफ होने वाली दो मैचों की टेस्ट श्रृंखला से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के सबसे अनुभवी तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह चोट के कारण इस श्रृंखला का हिस्सा नहीं होंगे। पूरी तरह फिट नहीं हो पाने की वजह से उन्हें अंतिम टीम से बाहर कर दिया गया है। उनकी अनुपस्थिति भारतीय गेंदबाजी आक्रमण के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, जसप्रीत बुमराह को पिछले महीने इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए दूसरे एकदिवसीय मुकाबले के दौरान बाएं घुटने में चोट लगी थी। इसके बाद से वह लगातार चिकित्सकीय निगरानी में रहकर पुनर्वास प्रक्रिया से गुजर रहे थे। बीसीसीआई ने उन्हें श्रीलंका दौरे के लिए प्रारंभिक टीम में शामिल किया था, लेकिन यह चयन उनकी फिटनेस रिपोर्ट पर निर्भर था।

बता दें कि बुमराह को बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई के उत्कृष्टता केंद्र में फिटनेस परीक्षण से गुजरना था। हालांकि पुनर्वास के दौरान उन्हें घुटने में लगातार असहजता महसूस होती रही। चिकित्सकीय टीम ने उनकी स्थिति का आकलन करने के बाद यह फैसला लिया कि उन्हें अभी मैदान पर लौटाना जोखिम भरा हो सकता है। इसी कारण उन्हें श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला से बाहर कर दिया गया है।

गौरतलब है कि इंग्लैंड दौरे के दौरान भी बुमराह को चोट की समस्या का सामना करना पड़ा था। कार्डिफ में क्षेत्ररक्षण करते समय लगी चोट के कारण वह लॉर्ड्स में खेला गया एकदिवसीय मुकाबला भी नहीं खेल सके थे। इसके बाद उम्मीद थी कि वह समय रहते फिट होकर श्रीलंका श्रृंखला में वापसी करेंगे, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका है।

जसप्रीत बुमराह पिछले कई वर्षों से भारतीय तेज गेंदबाजी की सबसे मजबूत कड़ी रहे हैं। नई और पुरानी दोनों गेंद से विकेट लेने की उनकी क्षमता ने उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ टेस्ट गेंदबाजों में शामिल किया है। मौजूद जानकारी के अनुसार, वह इस समय भी टेस्ट गेंदबाजों की विश्व रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर बने हुए हैं।

बता दें कि भारतीय टीम पिछले दो वर्षों में घरेलू मैदान पर दो टेस्ट श्रृंखलाएं हार चुकी है, जबकि विदेशी दौरों पर भी उसका प्रदर्शन उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा है। ऐसे समय में बुमराह की गैरमौजूदगी टीम के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है। अब टीम प्रबंधन को अन्य तेज गेंदबाजों पर अधिक भरोसा करना होगा।

फिलहाल बीसीसीआई की चिकित्सकीय टीम उनकी फिटनेस पर लगातार नजर बनाए हुए है। टीम प्रबंधन की कोशिश है कि बुमराह पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद ही मैदान पर वापसी करें, ताकि भविष्य की महत्वपूर्ण श्रृंखलाओं में वह पूरी क्षमता के साथ भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर सकें।
Sun, 02 Aug 2026 22:46:43 +0530

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