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Yes Milord: सब CJP में लगे थे, इधर कोर्ट में शिवसेना टूट की कहानी क्या पलटने वाली है?

चुनाव लड़ो किसी और सिंबल पर... और सरकार बना लो किसी और के दम पर! अगर यही चलता रहा, तो इस देश के संसदीय लोकतंत्र का क्या होगा? यह तीखा और सीधा सवाल देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रिम कोर्ट में गूंजा है। सवाल उठाने वाले हैं देश के जाने-माने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल। मौका महाराष्ट्र की सियासत से जुड़े उस सबसे बड़े कानूनी संग्राम का, जिसकी आंच एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुँच चुकी है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इन सांसदों के विलय को आधिकारिक मान्यता दे दी थी, जिसे अब उद्धव गुट ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की विशेष पीठ कर रही है, जिसकी अगुवाई CJI सूर्यकांत कर रहे हैं और पीठ में जस्टिस जयमालिया बागची व जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं। हाल ही में शिवसेना उद्धव बाला साहेब ठाकरे के छह सांसद एकनाथ शिंद के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए हैं। बकायदे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने खुद इनके विलय को मान्यता दी। इस फैसले को उद्धव गुट ने चैलेंज किया है। सुप्रीम कोर्ट में तीन जजेस की बेंच सुनवाई कर रही है। सीजीआई सूर्यकांत, जस्टिस जयमालिया, बागची और जस्टिस वी मोहना। 30 जुलाई को सुनवाई के दौरान एडवोकेट कपिल सिब्बल ने शिवसेना पर दावेदारी, चुनाव सिंबल, अलॉटमेंट, तत्कालीन राज्यपाल और चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाए। इस पर सीजीआई ने क्या कहा है पूरी दलील समझते हैं। इंडिया टुडे टीवी के एसोसिएट एडिटर अनीषा माथुर की रिपोर्ट के मुताबिक कपिल सिब्बल ने आज कोर्ट में कहा कि साल 2012 में बाला साहेब का निधन हुआ। फिर उद्धव ठाकरे ने पार्टी संभाली। उनकी अगुवाई में 40 चुनाव लड़े गए। तब पार्टी में एकनाथ शिंद भी थे। 2018 में पार्टी में हमने चुनाव किया। सिब्बल ने यहां 2018 में हुए शिवसेना के ऑर्गेनाइजेशनल इलेक्शन का जिक्र किया। इसी के तहत उद्धव ठाकरे को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था। कपिल सिब्बल ने आगे कहा 2019 में एकनाथ शिंद शिक्षा मंत्री बने। एमएलसी चुनाव के दौरान कुछ विधायकों ने अपनी पार्टी से हटकर क्रॉस वोटिंग की। हमें शक हुआ कि एकनाथ शिंद का गुट पीछे से कुछ गड़बड़ कर रहा है। फिर अचानक एक दिन 31 विधायक गुवाहाटी चले गए। उन 31 विधायकों ने एक प्रस्ताव पास किया। इस प्रस्ताव में उन्होंने पार्टी के व्हिप सुनील प्रभु को पद से हटा दिया और उनकी जगह भरत गोगावले को नया व्हिप बना दिया गया।  

क्या विधायक दावा कर सकते हैं कि वे ही पार्टी हैं?

अपनी दलीलें शुरू करते हुए, सिब्बल ने 2012 में शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के निधन के बाद पार्टी के संगठनात्मक इतिहास का ज़िक्र किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उद्धव ठाकरे ने पार्टी की कमान संभाली और उसके बाद हुए चुनावों में पार्टी का नेतृत्व किया। 2019 में एकनाथ शिंदे शिवसेना नेता के तौर पर महा विकास अघाड़ी सरकार में मंत्री बने। सिब्बल ने कहा कि शक सबसे पहले महाराष्ट्र विधान परिषद के चुनावों के दौरान हुआ, जब शिवसेना के कुछ विधायकों ने कथित तौर पर क्रॉस-वोटिंग की। इसके कुछ ही समय बाद, 31 विधायक महाराष्ट्र छोड़कर गुवाहाटी चले गए, जिससे उस बगावत की शुरुआत हुई जिसने आखिरकार पार्टी को दो हिस्सों में बांट दिया। सिब्बल के मुताबिक, इन विधायकों ने फिर एक प्रस्ताव पास करके तत्कालीन पार्टी व्हिप सुनील प्रभु को हटा दिया और उनकी जगह भरत गोगावले को नियुक्त कर दिया। सिब्बल ने दलील दी, सिर्फ़ इन 31 विधायकों ने वह प्रस्ताव पास किया था। यह राजनीतिक पार्टी का फ़ैसला नहीं था। उन्होंने बताया कि प्रस्ताव विधानसभा अध्यक्ष को भेजा गया, जिन्होंने इसे राज्यपाल को भेज दिया, जिसके बाद फ़्लोर टेस्ट का आदेश दिया गया। सिब्बल ने कहा हमने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा कि ऐसा कैसे हो सकता है। वे सिर्फ़ विधायक हैं। जबकि पार्टी के पंच प्रमुख तो उद्धव ठाकरे ही हैं।  उन्होंने अदालत के सामने एक अहम संवैधानिक सवाल रखा कि क्या विधायी पार्टी के सदस्य खुद को ही राजनीतिक पार्टी होने का दावा कर सकते हैं और क्या ऐसा आचरण कानून के मुताबिक है?

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एक चुनाव चिह्न पर चुने गए, दूसरे का दावा कर रहे हैं

सिब्बल ने तर्क दिया कि यह मामला संविधान की दसवीं अनुसूची के मूल सिद्धांत पर चोट करता है, जो दल-बदल के आधार पर अयोग्यता तय करती है। उन्होंने कहा कि जो विधायक अपनी मर्ज़ी से उस पार्टी को छोड़ देते हैं जिसके चुनाव चिह्न पर वे चुने गए थे, उन्हें अयोग्य ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब ऐसा रोज़ हो रहा है। लोग 'A' चुनाव चिह्न पर चुने जाते हैं और बाद में दावा करते हैं कि वे 'B' चुनाव चिह्न वाले गुट से हैं। संसदीय लोकतंत्र के लिए इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता ने आगे तर्क दिया कि याचिकाएँ वर्षों से लंबित हैं और समय पर सुनवाई होने से महाराष्ट्र में राजनीतिक परिणाम बदल सकते थे। उन्होंने कहा यदि इस मामले की समय पर सुनवाई हो जाती, तो शिंदे सरकार का गठन नहीं हो पाता।

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अदालत ने विलंब संबंधी दलील पर सवाल उठाए

हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने विलंब के संबंध में सिबल के तर्क पर सवाल उठाया और पूछा कि याचिकाकर्ताओं ने स्वयं विभिन्न चरणों में स्थगन की मांग क्यों की। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने यह भी टिप्पणी की कि सरकार का गठन न होने का दावा दो मान्यताओं पर निर्भर करता है - कि मुकदमे की सुनवाई होगी और अंतिम फैसला याचिकाकर्ताओं के पक्ष में आएगा। जवाब में सिबल ने कहा कि कानून स्पष्ट है। उन्होंने तर्क दिया फैसला हमारे पक्ष में ही आना चाहिए। दसवीं अनुसूची बिल्कुल स्पष्ट है। चुनाव जीतने के बाद निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा निष्ठा बदलने की प्रवृत्ति को "संवैधानिक आत्महत्या" बताते हुए सिबल ने कहा कि प्रतिनिधि लोकतंत्र में विधायकों को उस राजनीतिक दल का प्रतिनिधित्व करना आवश्यक है जिसका चिन्ह मतदाताओं ने मतपेटी में चुना हो।

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ECI के फ़ैसले को चुनौती

सिब्बल ने शिंदे गुट को असली शिवसेना के तौर पर मान्यता देने के चुनाव आयोग के फ़ैसले की भी आलोचना की। उन्होंने तर्क दिया कि चुनाव आयोग ने पार्टी की संगठनात्मक संरचना को लेकर विवादों को नजरअंदाज कर दिया और प्रतिद्वंद्वी दावों पर फैसला करते समय मुख्य रूप से विधायी शक्ति पर भरोसा किया। सिबल ने पूछा कि चुनाव आयोग केवल विधायी विंग को देखकर यह निष्कर्ष कैसे निकाल सकता है कि वह पार्टी के बहुमत का प्रतिनिधित्व करता है?" उन्होंने आगे कहा कि इस फैसले के परिणामस्वरूप अंततः उद्धव गुट को शिवसेना का नाम और चिन्ह खोना पड़ा। अब इस मामले पर 4 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय में फिर से सुनवाई होगी।

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सार्वजनिक परीक्षाओं के Bill पर राष्ट्रपति की मंजूरी, राज्यों में बनेंगी विशेष अदालतें

नयी दिल्ली, एक अगस्त सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए प्रत्येक राज्य में विशेष त्वरित अदालत स्थापित करने और दोषियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करने वाले विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है। शुक्रवार को जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026 को अपनी मंजूरी दे दी है। संसद के दोनों सदनों ने इस सप्ताह की शुरुआत में इस विधेयक को पारित किया था।

अब प्रश्नपत्र लीक के मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा। कानून के अनुसार, प्रश्नपत्र लीक कराने या परीक्षाओं में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने के दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों को कम से कम पांच वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक के कारावास की सजा तथा 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, संगठित अपराध से जुड़े मामलों में संशोधित कानून के तहत कम से कम सात वर्ष के कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

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  Sports

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: नीरज चोपड़ा ने सिल्वर और यशवीर सिंह ने जीता ब्रॉन्ज मेडल, पीएम मोदी ने दी बधाई

Commonwealth Games 2026: ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के स्टार एथलीटों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया है। पुरुषों की जैवलिन थ्रो स्पर्धा में भारत ने डबल पोडियम फिनिश हासिल किया है। ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया, जबकि यशवीर सिंह ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीता है। भारत के इस ऐतिहासिक प्रदर्शन पर देश भर में खुशी का माहौल है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने की एथलीटों की सराहना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीरज चोपड़ा और यशवीर सिंह की इस ऐतिहासिक सफलता पर उनकी जमकर तारीफ की है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर बधाई देते हुए कहा कि इन युवा एथलीटों की उपलब्धि देश के तमाम युवाओं को प्रेरित करेगी।

यशवीर सिंह को ब्रॉन्ज मेडल जीतने पर बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने लिखा कि उन्होंने शानदार थ्रो के साथ अपनी कड़ी मेहनत और लगन का परिचय दिया है। वहीं, सिल्वर मेडल जीतने वाले नीरज चोपड़ा की निरंतरता, संयम और जुझारू भावना की सराहना करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सफलता हर भारतीय को गौरवान्वित करती है।

नीरज चोपड़ा का शानदार थ्रो
ग्लासगो खेलों में ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा ने अपने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए सीजन का बेस्ट थ्रो फेंका। उन्होंने 85.83 मीटर के शानदार प्रयास के साथ सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया। हालांकि, इस प्रदर्शन के बावजूद वह अपना कॉमनवेल्थ खिताब बचाने से चूक गए।

नीरज ने अपनी शुरुआत 80.97 मीटर के थ्रो के साथ की थी और अपने दूसरे प्रयास में सुधार करते हुए 85.83 मीटर की दूरी तय की, जो इस प्रतियोगिता में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रयास रहा। इसके अलावा उनके अन्य वैध थ्रो 81.29 मीटर और 80.73 मीटर के रहे, जबकि उनके अंतिम दो प्रयास फाउल हो गए।

यशवीर सिंह का बेहतरीन निजी प्रदर्शन
भारत के लिए यह इवेंट इसलिए भी खास रहा क्योंकि यशवीर सिंह ने भी पोडियम पर अपनी जगह बनाई। उन्होंने अपने करियर का पर्सनल बेस्ट थ्रो 85.41 मीटर दर्ज करते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। एक बेहद कड़े मुकाबले में वह अपने देश के सीनियर खिलाड़ी नीरज चोपड़ा से महज 42 सेंटीमीटर पीछे रहे।

श्रीलंका के पाथिराज ने जीता गोल्ड
इस रोमांचक प्रतियोगिता में श्रीलंका के आर.टी. पाथिराज ने एक बड़ा उलटफेर करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पाथिराज ने गेम्स रिकॉर्ड बनाते हुए 89.75 मीटर का करिश्माई थ्रो फेंका, जो उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। उन्होंने मजबूत खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते हुए कॉमनवेल्थ का ताज अपने नाम किया।

अन्य खिलाड़ियों का प्रदर्शन
शीर्ष खिलाड़ियों की इस रेस में ग्रेनेडा के एंडरसन पीटर्स 83.88 मीटर के साथ चौथे स्थान पर रहे। उनके बाद दक्षिण अफ्रीका के डौव स्मिट (82.88 मीटर) और त्रिनिदाद एंड टोबैगो के केशव वॉल्कॉट (82.55 मीटर) का स्थान रहा।

भले ही नीरज चोपड़ा अपना पिछला खिताब डिफेंड करने में सफल नहीं रहे, लेकिन भारत का यह डबल पोडियम फिनिश कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के सबसे सफल पलों में दर्ज हो गया है।

Sat, 01 Aug 2026 15:39:57 +0530

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