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31 जुलाई तक 5.9 करोड़ ITR फाइल हुए:2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने की डेडलाइन खत्म, अब ₹5000 तक लेट फीस लगेगी

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बिना किसी पेनल्टी और ब्याज के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई निकल गई है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के मुताबिक, इस डेडलाइन यानी 31 जुलाई तक देश में 5.9 करोड़ से अधिक टैक्सपेयर्स अपने ITR जमा कर चुके हैं। यह समयसीमा उन व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स (ITR-1 और ITR-2) के लिए थी, जिन्हें अपने खातों का ऑडिट कराने की आवश्यकता नहीं होती है। आईटी विभाग ने 'X' पर दी जानकारी इनकम टैक्स विभाग ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी देते हुए बताया कि टैक्सपेयर्स की ओर से शानदार रिस्पॉन्स मिला है। विभाग ने लिखा, "31 जुलाई तक 2025-26 के लिए 5.9 करोड़ से ज्यादा ITR दाखिल किए जा चुके हैं। हालांकि, यह संख्या पिछले साल की तुलना में अभी कम दिख रही है, क्योंकि पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में सरकार ने डेडलाइन को बढ़ाकर 16 सितंबर 2025 किया था, तब तक कुल 7.3 करोड़ से अधिक रिटर्न दाखिल हुए थे। ITR-1 (सहज): सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला फॉर्म ITR फॉर्म 1, जिसे 'सहज' भी कहा जाता है, एक बेहद सरल फॉर्म है। इसका इस्तेमाल देश के छोटे और मध्यम वर्ग के टैक्सपेयर्स बड़े पैमाने पर करते हैं। कौन भर सकता है: यह फॉर्म उन भारतीय निवासियों के लिए है जिनकी सालाना कमाई ₹50 लाख तक है। कमाई का जरिया: इसमें सैलरी से आय, एक घर से होने वाली आय, अन्य स्रोतों से आय (जैसे ब्याज) और सालाना ₹5,000 तक की कृषि आय शामिल है। ITR-2: बिजनेस से अलग और कैपिटल गेन्स वाले टैक्सपेयर्स के लिए ITR-2 फॉर्म उन इंडिविजुअल्स और हिंदू अनडिवाइडेड फैमिलीज (HUF) द्वारा भरा जाता है: 31 जुलाई की डेडलाइन छूट गई तो अब क्या करें? अगर आप किसी वजह से 31 जुलाई तक अपना ITR फाइल नहीं कर पाए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप अभी भी बिलेटेड रिटर्न फाइल कर सकते हैं:

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किराने के सामान के लिए भी कर्ज ले रहे अमेरिकी:महंगाई में पेट भरना मुश्किल; 2साल में दोगुने हुए 'BNPL' यूजर्स, वर्षों चुका रहे ब्याज

कल्पना कीजिए कि आपने महीनों पहले जो सब्जी, दूध और ब्रेड खरीदी और खा भी लिया, उसका ब्याज आप आज भी चुका रहे हैं। यह कोई मजाक नहीं, बल्कि हकीकत है। अमेरिका में लाखों परिवार कुछ महीनों से यही परेशानी झेल रहे हैं। किराने के सामान की कीमतें इतनी बढ़ चुकी हैं कि लोग अब उसे क्रेडिट कार्ड और “बाय नाउ, पे लेटर’ (बीएनपीएल) जैसी उधारी स्कीम्स की मदद से खरीद रहे हैं। फिर उसी कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं। अमेरिका की गैर-लाभकारी संस्था ‘अर्बन इंस्टीट्यूट’ के ताजा सर्वे के मुताबिक, कामकाजी उम्र (18-64 साल) के हर चार में से एक अमेरिकी वयस्क ने किराने के सामान के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल किया। लेकिन उसका पूरा बिल समय पर चुकाने में उसे दिक्कत हुई। सिर्फ 35% लोग ही पूरा बिल एक साथ चुका पाए, बाकी या तो न्यूनतम राशि चुका रहे हैं या इतना भुगतान भी नहीं कर पा रहे। नतीजतन छोटी सी किराने की खरीद, रिवॉल्विंग डेट यानी घूमते-फिरते कर्ज में बदल जाती है, जिस पर वर्षों तक ब्याज चुकाना पड़ता है। यह बोझ भी किसी एसेट के लिए नहीं, बल्कि खाने-पीने की आम जरूरतों के लिए उठाया जा रहा है। बीएनपीएल सर्विसेज की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं। लेंडिंगट्री के मुताबिक, अमेरिका में करीब 29% बीएनपीएल यूजर्स अब किराने के सामान के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, जो दो साल पहले सिर्फ 14% था। यानी हिस्सेदारी दोगुनी हो गई। जेन-जी (14 से 29 साल) में तो यह आंकड़ा 38% तक पहुंच जाता है। लेकिन सुविधा की यह चमक जल्द फीकी पड़ जाती है। करीब 47% यूजर्स ने बीते एक साल में कम से कम एक बार पेमेंट लेट की, जो एक साल पहले सिर्फ 34% थी। हर पांच में से करीब एक अमेरिकी अब किराने के लिए बचत के पैसे भी इस्तेमाल करने लगा है। कम व मध्यम आय वालों में यह आंकड़ा और भी ज्यादा है। विशेषज्ञों की चिंता यह है कि बचत और क्रेडिट, दोनों ऐसे रास्ते हैं जो छोटी अवधि में राहत तो देते हैं, लेकिन बार-बार इस्तेमाल होने पर परिवारों को लंबी अवधि की वित्तीय अस्थिरता की ओर धकेल सकते हैं। इसका मतलब है कि आज की भूख मिटाने के लिए लिया गया कर्ज, आपकी की जेब को वर्षों तक हल्का करता रहेगा। तगड़ी मार - अमेरिका में 5 साल में किराने के दाम 32% बढ़ चुके पांच साल में किराने के दाम करीब 32% बढ़ चुके हैं। ऐसे में लोग बिल टालने के लिए क्रेडिट कार्ड और बीएनपीएल का सहारा लेते हैं। लेकिन मिनिमम पेमेंट चूकने पर पहले करीब 30 डॉलर (2,862) की लेट फीस, फिर अगली बार 41 डॉलर (3,912) तक की पेनल्टी लगती है। साथ ही इसमें करीब 30% सालाना ब्याज भी जुड़ जाता है। यानी सस्ता लगने वाला रास्ता असल में सबसे महंगा साबित होता है

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में प्रीति पवार और जैस्मिन लंबोरिया ने जीते गोल्ड मेडल, भारत के पदकों की संख्या इतनी हुई

ग्लास्गो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के आज 10वें दिन भारत की मुक्केबाज प्रीति पवार और जैस्मिन लंबोरिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाल दिए। पहले प्रीति ने कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को हराकर महिला 54 किग्रा वर्ग का खिताब अपने नाम किया उसके बाद जैस्मिन ने कमाल किया। Sat, 01 Aug 2026 16:07:38 +0530

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