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Coal India Q1FY27 Results: क्या कोल इंडिया की हालिया अर्निंग्स रिपोर्ट के बाद उस पर नजर रखना फायदेमंद है?
Coal India Q1FY27 Results: जून तिमाही के लिए कंपनियों के नतीजे आने का दौर जोरों पर है. अलग-अलग सेक्टर की कंपनियां वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए अपनी परफॉर्मेंस रिपोर्ट पेश कर रही हैं और निवेशक हर नतीजे पर बारीकी से नजर रख रहे हैं. इसी बीच, सरकारी माइनिंग कंपनी कोल इंडिया ने भी वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए. रेवेन्यू और मुनाफे में थोड़ी बढ़ोतरी हुई, लेकिन ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव और बढ़ती लागत ने निवेशकों को निराश किया. नतीजतन, मंगलवार, 28 जुलाई को ट्रेडिंग के दौरान कंपनी का शेयर लगभग 3% गिर गया.
नतीजों की तस्वीर- रेवेन्यू ऊपर, मार्जिन नीचे
तिमाही नतीजों की बात करें तो, कोल इंडिया का रेवेन्यू 7.8% बढ़कर ₹46,255 करोड़ हो गया, जो एक साल पहले ₹42,919 करोड़ था. हालांकि ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस के मामले में तस्वीर उतनी अच्छी नहीं थी. EBITDA 4.1% गिरकर ₹12,069 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल यह ₹12,588 करोड़ था. नतीजतन, EBITDA मार्जिन 29.3% से घटकर 26.1% हो गया.
लागत का बोझ बना असली विलेन
लागत बढ़ने की मुख्य वजह वर्कफोर्स से जुड़ा खर्च था. कुल खर्च 12% बढ़कर ₹36,816 करोड़ हो गया. कर्मचारियों के फायदे से जुड़े खर्च में मामूली 0.4% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹11,023 करोड़ रहा. कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े खर्च 11% बढ़कर ₹8,658 करोड़ हो गए. हालांकि सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कच्चे माल की लागत में देखी गई. सिलेंडर, लुब्रिकेटिंग ऑयल और भारी अर्थ-मूविंग टेक्नोलॉजी जैसी चीजों से जुड़े खर्च 27% बढ़कर ₹3,260 करोड़ हो गए. इन सबके बावजूद, नेट प्रॉफिट में मामूली 0.6% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹8,850 करोड़ हो गया, जो एक साल पहले ₹8,797 करोड़ था.
कैपेक्स की कहानी जो लॉन्ग टर्म उम्मीद जगाती है
तिमाही नतीजों के बीच एक और अहम बात पर ध्यान देना जरूरी है, कंपनी का कैपिटल एक्सपेंडिचर. जून तिमाही में, कोल इंडिया ने ₹3,399 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर किया, जो एक साल पहले खर्च किए गए ₹2,914 करोड़ के मुकाबले 16.6% ज्यादा है. कंपनी ने अपने तिमाही कैपेक्स लक्ष्य का 101.5% हासिल किया, यानी लक्ष्य से ज्यादा काम किया. यह आंकड़ा FY27 के लिए कुल ₹16,500 करोड़ के अनुमानित कैपेक्स का 20.6% है.
पैसा कहां लग रहा है?
कैपेक्स (Capex) का सबसे बड़ा हिस्सा ₹804 करोड़ जमीन अधिग्रहण और पुनर्वास के लिए आवंटित किया गया. कंपनी ने कहा कि जमीन के बिना कोई भी माइनिंग प्रोजेक्ट शुरू या उसका विस्तार नहीं किया जा सकता, इसलिए यह एक जरूरी निवेश है. कोयला निकालने और ले जाने के इंफ्रास्ट्रक्चर पर ₹949 करोड़ खर्च किए गए, जिसमें रेलवे साइडिंग, रेल कॉरिडोर, कोयला हैंडलिंग प्लांट, साइलो, वे-ब्रिज और सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं. इसके अलावा, प्लांट और मशीनरी में ₹819 करोड़ का निवेश किया गया. कंपनी के चेयरमैन बी. सैराम ने कहा कि जमीन अधिग्रहण, कोयला निकासी इंफ्रास्ट्रक्चर और प्लांट-मशीनरी मिलकर पहली तिमाही के कैपेक्स का 75 % से अधिक हिस्सा बनाते हैं और ये इस वित्त वर्ष के उत्पादन और आपूर्ति लक्ष्यों को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएंगे.
सोलर और जॉइंट वेंचर, कोयले से आगे की सोच
कोल इंडिया खुद को सिर्फ अपने पारंपरिक काम तक ही सीमित नहीं रखना चाहती है. कंपनी ने सोलर प्रोजेक्ट्स में ₹278 करोड़ और जॉइंट वेंचर्स में ₹207 करोड़ का निवेश किया है. कारोबार को अलग-अलग क्षेत्रों में फैलाने की यह कोशिश दिखाती है कि कंपनी पारंपरिक कोयला खनन से आगे बढ़कर रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अपनी जगह बनाना चाहती है.
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FY27 से FY30 तक 68,000 करोड़ का महाप्लान
फ्यूचर प्लान की बात करें तो Coal India ने वित्त वर्ष 2027 से वित्त वर्ष 2030 के दौरान ₹68,000 करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर (capex) की रूपरेखा तैयार की है. इस बड़े निवेश का मकसद प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाना, माइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और कारोबार का विस्तार करना है. अगर इसे समय पर लागू किया जाता है, तो यह योजना ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ाएगी और कंपनी के लंबे समय के ग्रोथ स्ट्रैटेजी को पूरा करने में मदद करेगी.
AI डेटा सेंटर और बढ़ती गर्मी- Coal India के लिए दोहरा मौका
अब आइए उस ट्रेंड पर नजर डालते हैं जो आने वाले सालों में कोल इंडिया को अहम बनाए रखेगा. सरकारी अनुमानों के मुताबिक, भारत में AI डेटा सेंटर्स से बिजली की मांग 2031-32 तक 26.3 गीगावाट तक पहुंच सकती है. यह मार्च में पावर मिनिस्ट्री के 13.56 गीगावाट के शुरुआती अनुमान से लगभग दोगुना है. AI इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार अगले दशक में बिजली खपत को बढ़ाएगा. इसके अलावा, बढ़ते तापमान और बार-बार पड़ने वाली हीटवेव के कारण गर्मियों में बिजली की मांग नए रिकॉर्ड बना रही है. और जब बिजली की मांग बढ़ती है तो कोयले की मांग भी बढ़ती है, क्योंकि भारत की बिजली उत्पादन में कोयले का हिस्सा अभी भी सबसे बड़ा है.
क्या Coal India पर अभी भी इंवेस्टर्स को नजर रखना चाहिए?
कंपनी का आक्रामक कैपेक्स, AI डेटा सेंटर और बढ़ती गर्मी से कोयले की मांग में संभावित उछाल और FY27-FY30 का महाप्लान, यह सब मिलकर Coal India को लॉन्ग टर्म नजरिए से दिलचस्प बनाते हैं. निवेशकों को कंपनी के फंडामेंटल, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और मौजूदा वैल्यूएशन को ध्यान में रखकर अपना फैसला करना चाहिए.
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डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए दी गई है और इसे निवेश की सलाह नहीं माना जाना चाहिए. किसी भी निवेश फैसले से पहले कृपया अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें.
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