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मछली पालकों के लिए खुला सरकारी खजाना.. बोट से लेकर मशीन तक मिलेगा लाभ, बस इस तारीख से पहले करें आवेदन

Fish Farming Schemes 2026: आजमगढ़ में मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए मत्स्य पालन विभाग की ओर से 6 प्रमुख योजनाओं के तहत ऑनलाइन आवेदन शुरू किए गए हैं. इनमें बोट सब्सिडी, एरेशन सिस्टम, मोपेड विद आइस बॉक्स, मोती संवर्धन और मत्स्य हैचरी जैसी योजनाएं शामिल हैं. इच्छुक मछली पालक 5 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.

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Sawan 2026: आखिर भगवान शिव को ही क्यों चढ़ाया जाता है धतूरा? जानिए इस विषैले फल के पीछे छिपा आस्था का गहरा संदेश

Sawan 2026: सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दौरान भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस धतूरे को सामान्य तौर पर जहरीला पौधा माना जाता है, वही भगवान शिव को इतना प्रिय क्यों है? इसके पीछे सिर्फ धार्मिक परंपरा ही नहीं, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक संदेश भी जुड़ा हुआ है।

शिव पूजा में क्यों खास है धतूरा?

शिव पूजा में क्यों खास है धतूरा?

धतूरा एक ऐसा पौधा है जिसे खाने या गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर नुकसान हो सकता है। इसके बावजूद शिव पूजा में इसका विशेष स्थान है। दरअसल, मान्यता है कि भगवान शिव उन चीजों को भी स्वीकार करते हैं जिन्हें दुनिया सामान्य या उपयोगी नहीं मानती। यही कारण है कि धतूरा उनकी पूजा का अहम हिस्सा बन गया।

समुद्र मंथन की कथा से जुड़ा है इसका संबंध
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब समुद्र मंथन के दौरान हलाहल विष निकला तो पूरे संसार पर संकट आ गया। तब भगवान शिव ने सभी की रक्षा के लिए उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया। इसी वजह से उन्हें नीलकंठ कहा जाता है। माना जाता है कि धतूरा भी विषैले गुणों वाला पौधा है, इसलिए इसे भगवान शिव को अर्पित करना उनके त्याग, धैर्य और संसार की रक्षा के भाव का प्रतीक माना जाता है।

धतूरा चढ़ाने का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

धतूरा चढ़ाने का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?
धतूरा चढ़ाने का मतलब सिर्फ एक फल भगवान को अर्पित करना नहीं है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह अपने मन के क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या और नकारात्मक विचारों को भगवान शिव के चरणों में समर्पित करने का प्रतीक है। संदेश यह है कि जैसे महादेव ने संसार का विष अपने ऊपर लिया, वैसे ही वे अपने भक्तों के दुख और मन के बुरे विचारों को भी दूर करने वाले देव माने जाते हैं।

शिव भक्ति में सबसे ज्यादा मायने रखती है सच्ची श्रद्धा

धतूरे का सेवन करना हो सकता है खतरनाक

भगवान शिव को भोलेनाथ इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे भक्ति में दिखावा नहीं, बल्कि सच्चे मन से की गई पूजा को स्वीकार करते हैं। इसलिए सावन में भक्त जलाभिषेक करने के साथ बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर सुख, शांति और मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।

धतूरे का सेवन करना हो सकता है खतरनाक
धार्मिक महत्व होने के बावजूद यह ध्यान रखना जरूरी है कि धतूरा एक विषैला पौधा है। इसका उपयोग केवल पूजा के लिए ही करना चाहिए। बिना डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह के इसका सेवन करना स्वास्थ्य के लिए गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।   

(Disclaimer ): यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं के आधार पर तैयार किया गया है। हमारा उद्देश्य किसी भी धार्मिक विश्वास की पुष्टि या खंडन करना नहीं, बल्कि जानकारी साझा करना है।

यह भी पढ़ें: सावन में हरा रंग महिलाओं के लिए क्यों है इतना खास? जानिए धार्मिक मान्यता और महत्व

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