इस SUV के दम पर हुंडई ने रचा इतिहास, जुलाई में 18,088 लोगों ने खरीदा; बिक्री में बनी नंबर-1
हुंडई इंडिया ने जुलाई, 2026 में बिक्री का नया इतिहास रच दिया है। कंपनी ने अब तक का अपना सबसे बेहतरीन मंथली सेल्स दर्ज किया है। पहली बार हुंडई की कुल बिक्री 75,000 यूनिट के पार पहुंच गई है।
लोक प्रिय विहार CGHS घोटाला: पूर्व रजिस्ट्रार सहित 7 दोषियों को दो-दो साल की सजा, CBI को मिली बड़ी सफलता
करीब 20 साल पुराने लोक प्रिय विहार को-ऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी (CGHS) घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को बड़ी कानूनी सफलता मिली है. नई दिल्ली की सीबीआई विशेष अदालत ने इस मामले में दो पूर्व सरकारी अधिकारियों समेत सात दोषियों को दो-दो वर्ष के कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाई है. अदालत ने सभी दोषियों पर जुर्माना भी लगाया है.
सजा पाने वालों में तत्कालीन रजिस्ट्रार ऑफ को-ऑपरेटिव सोसाइटीज आर.के. श्रीवास्तव, तत्कालीन असिस्टेंट रजिस्ट्रार पी.एन. मंचंदा और पांच निजी व्यक्ति के.के. वाधवा, अनिल कुमार, सुनील कुमार, देवेंद्र पाल सिंह तथा रवि सलूजा शामिल हैं.
आरोपियों को मिली ये सजा
अदालत ने दोनों पूर्व सरकारी अधिकारियों को आपराधिक कदाचार (Criminal Misconduct) के मामले में दो वर्ष के कठोर कारावास और 75-75 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है. वहीं पांचों निजी आरोपियों को धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश के आरोप में दो वर्ष के कठोर कारावास के साथ जुर्माने की सजा दी गई है.
2006 में दर्ज किया गया था मुकदमा
सीबीआई के मुताबिक, यह मामला सितंबर 2006 में दर्ज किया गया था. जांच एजेंसी उस बड़े घोटाले की जांच कर रही थी, जिसमें वर्ष 1970 से 1980 के बीच पंजीकृत और बाद में बंद या निष्क्रिय हो चुकी कई को-ऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों को फर्जी तरीके से दोबारा जीवित दिखाकर लाभ पहुंचाया गया.
जांच में यह साबित हुआ कि निजी आरोपियों ने रजिस्ट्रार ऑफ को-ऑपरेटिव सोसाइटीज कार्यालय के अधिकारियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची. इस साजिश के तहत लोक प्रिय विहार सीजीएचएस को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पुनर्जीवित दिखाया गया और इसके बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) से जमीन का आवंटन हासिल कर लिया गया.
2008 में दाखिल किया गया था आरोपपत्र
सीबीआई ने जांच पूरी होने के बाद 27 जनवरी 2008 को आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया था. लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने 14 जुलाई 2026 को सभी सात आरोपियों को दोषी करार दिया और 30 जुलाई 2026 को उन्हें सजा सुनाई.
सीबीआई का मानना है कि यह फैसला सहकारी आवासीय समितियों में फर्जी पुनर्जीवन, जालसाजी और सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल है. एजेंसी का कहना है कि इस निर्णय से ऐसे मामलों में भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का स्पष्ट संदेश जाएगा.
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