Tahir Hussain को Delhi Riots में मिली उम्रकैद, IB कर्मी अंकित शर्मा की हत्या में पाए गए दोषी
अल्पसंख्यक मतदाता बहुल मुस्तफाबाद विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी (आप) उम्मीदवार की हार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत का मार्ग प्रशस्त करने के एक साल बाद, ताहिर हुसैन को शुक्रवार को 2020 के दिल्ली दंगों के एक मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई। शहर की एक अदालत ने उसे और चार सह-दोषियों को दंगों के दौरान आसूचना ब्यूरो (आईबी) के कर्मी अंकित शर्मा की हत्या के लिए उम्रकैद की सजा सुनाते हुए कहा कि यह मामला मृत्युदंड के लिए दुर्लभतम श्रेणी में नहीं आता है। इसके बाद अदालत से बाहर ले जाए जाने के दौरान हुसैन ने उम्मीद जताते हुए कहा, इंसाफ हाईकोर्ट से मिलेगा।
फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लेकर प्रदर्शनों के बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़कने के दौरान 48 वर्षीय हुसैन नेहरू विहार वार्ड से ‘आप’ का पार्षद था। इन दंगों में 53 लोगों की जान चली गई थी और सैकड़ों लोग घायल हो गए थे। दंगों के सिलसिले में नाम आने, खासकर चांद बाग इलाके में आईबी कर्मी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में नाम सामने आने के कुछ ही दिनों बाद ‘आप’ ने हुसैन को निष्कासित कर दिया था।
दंगों के दौरान हुसैन के घर की छत पर मौजूद भीड़ का वीडियो वायरल होने के बाद उसकी काफी बदनामी हुई। उसके आवास के पास एक नाले से शर्मा का शव बरामद हुआ था। आरोप था कि उसके घर और छत का इस्तेमाल पत्थर, पेट्रोल बम और अन्य हथियार जमा करने के लिए किया गया था।
दिल्ली पुलिस ने दंगों से जुड़े कई आपराधिक मामलों में हुसैन को नामजद किया और मार्च 2020 में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इस महीने की शुरुआत में, अदालत ने हुसैन को चार अन्य सह-आरोपियों के साथ शर्मा की हत्या का दोषी ठहराया था। यह कहा गया कि हुसैन 2020 के दंगों के दौरान दंगा, आगजनी और लूटपाट में शामिल गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा था।
यह भी कहा गया कि शर्मा की हत्या बेहद क्रूर तरीके से की गई थी। हुसैन दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले दिसंबर 2024 में जेल में रहते हुए ही ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) में शामिल हो गया था। एआईएमआईएम उम्मीदवार के रूप में, उसने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मुस्तफाबाद निर्वाचन क्षेत्र से फरवरी 2025 का विधानसभा चुनाव लड़ा।
यह इलाका दंगों के दौरान सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र था। हुसैन को 33,000 से अधिक वोट मिले। भाजपा उम्मीदवार मोहन सिंह बिष्ट ने ‘आप’ के आदील अहमद खान को 17,000 से अधिक मतों के अंतर से हराकर चुनाव जीता।
चुनाव प्रचार के लिए हुसैन को छह दिन की पैरोल मिली थी। राजनीति में आने से पहले, वह कारोबार करता था और उत्तर-पूर्वी दिल्ली क्षेत्र में रहता था। सजा सुनाए जाने के बाद भी हुसैन की राजनीतिक अहमियत कम नहीं हुई।
भाजपा ने उसके नाम का हवाला देते हुए आम आदमी पार्टी से उसके पुराने संबंधों को लेकर हमला बोला और पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल से माफी मांगने की मांग की।
PM Modi पर विवादित पोस्ट: Meta India प्रमुख और सोशल मीडिया यूज़र्स पर FIR दर्ज
हैदराबाद साइबर अपराध पुलिस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में कथित आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं की शिकायत पर कुछ सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं और मेटा इंडिया के प्रमुख के खिलाफ दो मामले दर्ज किए हैं। भाजपा की तेलंगाना इकाई की सोशल मीडिया कोर कमेटी के एक सदस्य की 29 जुलाई की शिकायत के बाद आईटी कानून और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस के एक अधिकारी ने शुक्रवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘ये मामले उन लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए, जिन्होंने पोस्ट किया और कैसे उन्होंने (सोशल मंचों) इसकी इजाज़त दी।’’ पहले मामले में, इंस्टाग्राम और फेसबुक उपयोगकर्ताओं तथा मेटा इंडिया के प्रमुख के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
शिकायतकर्ता ने कुछ ऐसे इंस्टाग्राम अकाउंट की जांच की मांग की, जिन्होंने कथित तौर पर प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी। शिकायत में कहा गया है कि इस सामग्री से देश की संप्रभुता, अखंडता और सार्वजनिक व्यवस्था के खिलाफ विमर्श को बढ़ावा मिलता प्रतीत होता है। भाजपा की तेलंगाना इकाई के मुख्य प्रवक्ता एन वी सुभाष ने शुक्रवार को मांग की कि कॉजपा नीत नीट प्रश्नपत्र लीक आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाने वाले अपमानजनक पोस्ट को लेकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे के केंद्र में एक ‘‘बुनियादी संवैधानिक सवाल’’ है - क्या किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ बार-बार और संगठित सार्वजनिक अपमानजनक टिप्पणी अभिव्यक्ति की आज़ादी के दायरे में आता है या यह कानूनी कार्रवाई के लायक कदाचार है। सुभाष ने एक बयान में कहा कि संविधान आजादी की रक्षा करता है, लेकिन यह कानून तोड़ने को सही नहीं ठहराता। उन्होंने कहा कि अधिकारों के साथ ज़िम्मेदारियां भी आती हैं और जब कानूनी सीमाओं का कथित तौर पर उल्लंघन होता है, तो जवाबदेही तय होती है।
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