Manoj Tiwari:मनोज तिवारी का राहुल गांधी पर हमला #manojtiwari #rahulgandhi #congress #bjp #shorts
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस पर हुए हमले को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन में कुछ असामाजिक तत्व शामिल हुए और पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया। मनोज तिवारी ने कहा कि कांग्रेस ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 का विरोध करते हुए सदन में हंगामा किया, जबकि यह कानून छात्रों के भविष्य के लिए जरूरी है। #manojtiwari #rahulgandhi #congress #bjp #paperleakbill #publicexaminationsbill #publicexaminationamendmentbill #studentsprotest #studentprotest #studentfuture #police #policeaction You can Search us on YouTube by- NBT, NBT TV Live, Navbharat Times, Times Now, TNN, TNNB, Navbharat TV, Hindi News, Latest news and @timesnownavbharat About Channel: Times Now Navbharat देश का No.1 Hindi news है। यह चैनल भारत और दुनिया से जुड़ी हर Latest News और Breaking News , राजनीति, मनोरंजन और खेल से जुड़े समाचार आपके लिए लेकर आता है। इसलिए सब्सक्राइब करें और बने रहें टाइम्स नाउ नवभारत के साथ Times Now Navbharat is India's fastest growing Hindi News Channel with 24 hour coverage. Get Breaking news, Latest news, Politics news, Entertainment news and Sports news from India & World on Times Now Navbharat. ------------------------------------------------------------------------------------------------------------- Watch Live TV : https://www.timesnowhindi.com/live-tv Subscribe to our other network channels: Times Now: https://www.youtube.com/TimesNow Zoom: https://www.youtube.com/zoomtv ------------------------------------------------------------------------------------------------------------- You can also visit our website at: https://www.timesnowhindi.com Download our App for Breaking News: https://tinyurl.com/bde8rv84 Like us on Facebook: https://www.facebook.com/Timesnownavbharat Follow us on Twitter: https://twitter.com/TNNavbharat Follow us on Instagram: https://www.instagram.com/timesnownavbharat
Bombay High Court का FDA को निर्देश: मंत्रालय कैंटीन को दें नोटिस, पक्षपात पर फटकार
बंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) को शहर के रेस्तरां और होटलों के खिलाफ पक्षपातपूर्ण कार्रवाई करने के लिए फटकार लगाई। अदालत ने आदेश दिया कि मंत्रालय की कैंटीनों को सुधारात्मक नोटिस जारी किया जाए, क्योंकि वकीलों की एक समिति की जांच में वहां गंदगी मिली और कीड़े पाए गए थे। अदालत ने कहा कि एफडीए सरकारी कैंटीनों को बिना किसी कार्रवाई के ‘क्लीन चिट’ दे रहा है, जबकि निजी होटल, रेस्तरां और भोजनालयों पर सख्ती से कार्रवाई कर रहा है।
उच्च न्यायालय की ओर से नियुक्त चार वकीलों की एक समिति ने राज्य सचिवालय (मंत्रालय) के अंदर मौजूद तीन कैंटीन का निरीक्षण किया और एक रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में कहा गया कि कैंटीन साफ-सुथरी नहीं थीं, वहां सीवेज और ड्रेनेज सिस्टम टूटा-फूटा और खुला हुआ था, और किचन के फर्श पर कॉकरोच और मक्खियां थीं। वकीलों की यह रिपोर्ट शुक्रवार को अदालत में एफडीए की ओर से सौंपी गई उस रिपोर्ट के उलट थी, जिसमें कहा गया था कि मंत्रालय की कैंटीन नियमों का 98 प्रतिशत पालन कर रही थीं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ ने कहा कि एफडीए को होटलों और रेस्तरां(सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों की कैंटीन सहित) के खिलाफ अपनी कार्रवाई में ‘निष्पक्ष, भेदभाव रहित और समान रवैया’ अपनाने की जरूरत है। उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी मंत्रालय (राज्य सचिवालय) की कैंटीन को एफडीए द्वारा दिए गए ‘98 प्रतिशत स्वच्छता’ संबंधी प्रमाणपत्र पर सवाल उठाते हुए की। समिति की ओर से सौंपी गई मंत्रालय की कई कैंटीन की तस्वीरें देखने के बाद पीठ ने हैरानी जताई और कहा कि एफडीए को मंत्रालय की कैंटीन को भी नोटिस जारी करना चाहिए।
अदालत इस बात से नाराज थी कि ऐसी ही कमियों के लिए एफडीए ने दक्षिण मुंबई के पूर्णिमा रेस्तरां को निलंबन नोटिस जारी किया था, जबकि मंत्रालय की कैंटीन को नियमों का 98 प्रतिशत पालन करने वाला बताया गया था। पूर्णिमा रेस्तरां की ओर से पेश वरिष्ठ वकील वेंकटेश धोंड ने अदालत को बताया था कि एफडीए ने कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना ‘निलंबन नोटिस’ जारी किया था। उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘तो फिर मंत्रालय की (कैंटीन) का लाइसेंस भी निलंबित करें।
या तो यह लाइसेंस निलंबित करें या पूर्णिमा का लाइसेंस बहाल करें। हम बराबरी चाहते हैं, इस देश में हर व्यक्ति बराबर है। कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।’’ इसके बाद एफडीए के वकीलों ने कहा कि पूर्णिमा को दिया गया निलंबन नोटिस (काम रोकने का नोटिस) सुधारात्मक नोटिस में बदल दिया जाएगा और दोबारा जांच की जाएगी।
उच्च न्यायालय ने इसे मान लिया और कहा कि पूर्णिमा रेस्तरां को जारी निलंबन नोटिस को ‘कारण बताओ सुधार नोटिस’ में बदल दिया जाएगा और मंत्रालय की तीन कैंटीनों को भी ऐसे ही नोटिस जारी किए जाएंगे। अदालत मामले की अगली सुनवाई छह अगस्त को करेगी। अदालत ने कहा, ‘‘इन जगहों को मंगलवार तक का समय दिया जाएगा और बुधवार को एफडीए द्वारा फिर से जांच की जाएगी।’’ पीठ ने एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे को आदेश दिया कि वे अपने अधिकारियों द्वारा सौंपी गई उन रिपोर्ट की भी समीक्षा करें जिनमें मंत्रालय की कैंटीन द्वारा 98 प्रतिशत नियमों का पालन करने की बात कही गई थी, और ‘झूठ बोलने’ के लिए उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करने को कहा।
पीठ ने कहा कि एफडीए और उसके कमिश्नर मुंडे जो काम कर रहे हैं, वह तारीफ के काबिल है, लेकिन साथ ही एजेंसी को निष्पक्ष भी रहना चाहिए। पीठ ने कहा, ‘‘हम विभाग के काम की तारीफ करते हैं, लेकिन हम बस इतना चाहते हैं कि वे सबके साथ एक जैसा व्यवहार करें। उन्हें किसी एक की तरफ झुकाव नहीं रखना चाहिए।
उन्हें निष्पक्ष और ईमानदार रहने की ज़रूरत है।’’ इससे पहले दिन में एफडीए ने अदालत में एक चार्ट पेश किया, जिसमें सभी भोजनालयों और कैंटीन का विवरण था, जिनमें अदालत परिसर और मंत्रालय में मौजूद तीन कैंटीन के साथ-साथ शहर भर के निजी क्लब भी शामिल थे। चार्ट के अनुसार, मंत्रालय कैंटीन को साफ-सफाई के मामले में 98 प्रतिशत अंक मिले हैं। अदालत ने इस पर संदेह जताया और एफडीए से निरीक्षण के दौरान ली गई तस्वीरें और वीडियो फुटेज पेश करने को कहा।
अदालत ने कहा, ‘‘हमें मंत्रालय की कैंटीन की वे तस्वीरें और वीडियो दिखाएं, जो निरीक्षण के समय ली गई थीं। एफडीए के अनुसार, कैंटीन एकदम साफ-सुथरी है। आपने (एफडीए ने) पूर्णिमा रेस्तरां में किए गए निरीक्षण की तस्वीरें पेश की हैं।
सभी के साथ एकसमान और निष्पक्ष व्यवहार करें। आप केवल निजी प्रतिष्ठानों को ही निशाना नहीं बना सकते।’’ अदालत ने एफडीए से उन हालात और पैमानों के बारे में भी जानकारी मांगी, जिनके आधार पर कुछ खाने-पीने की जगहों को सुधारात्मक नोटिस जारी किए गए, जबकि कुछ अन्य को सीधे निलंबन (काम रोकने) के नोटिस दिए गए।
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