Mood Swing Issue: 5 वजहों से हो सकता है मूड स्विंग! इन आसान तरीकों से रखें अपने मूड को कंट्रोल
Mood Swing Issue: कभी बिना किसी बड़ी वजह के अचानक गुस्सा आना, फिर कुछ देर बाद उदास महसूस करना या छोटी-सी बात पर जरूरत से ज्यादा खुश हो जाना-मूड में ऐसे बदलाव कई लोगों को परेशान करते हैं। हर बार इसे सिर्फ स्वभाव का हिस्सा मानना सही नहीं है। हमारी नींद, खान-पान, तनाव और रोजमर्रा की आदतों का सीधा असर मानसिक स्थिति और भावनाओं पर पड़ सकता है। अगर मूड स्विंग बार-बार हो रहे हैं, तो इसके पीछे की वजह समझना जरूरी है।
मूड में कभी-कभार बदलाव सामान्य हैं, लेकिन जब ये बदलाव काम, रिश्तों या रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगें तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अच्छी बात यह है कि कई मामलों में लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव करके मूड को काफी हद तक स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।
मूड स्विंग के 5 कारण और काबू करने के तरीके
नींद की कमी
पर्याप्त नींद न लेने से शरीर और दिमाग दोनों प्रभावित होते हैं। लगातार कम नींद लेने पर चिड़चिड़ापन, गुस्सा और बेचैनी बढ़ सकती है। देर रात तक मोबाइल चलाना या सोने का समय रोज बदलना भी नींद की गुणवत्ता खराब कर सकता है।
क्या करें: रोज लगभग एक ही समय पर सोने और उठने की कोशिश करें। सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें और शांत माहौल में पर्याप्त नींद लें।
लगातार तनाव
काम का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां या किसी बात की लगातार चिंता मूड को अस्थिर कर सकती है। तनाव बढ़ने पर छोटी-सी बात भी बड़ी लगने लगती है और व्यक्ति जल्दी गुस्सा या परेशान हो सकता है।
क्या करें: दिन में कुछ समय अपने लिए निकालें। गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज, मेडिटेशन, हल्की वॉक या पसंदीदा गतिविधि तनाव कम करने में मदद कर सकती है।
खान-पान में गड़बड़ी
लंबे समय तक भूखे रहना, बहुत ज्यादा मीठा या अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड लेना और भोजन का अनियमित समय भी ऊर्जा और मूड में उतार-चढ़ाव से जुड़ा हो सकता है।
क्या करें: भोजन में प्रोटीन, फाइबर, साबुत अनाज, सब्जियां और फल शामिल करें। लंबे समय तक खाली पेट रहने से बचें और पर्याप्त पानी पिएं।
हार्मोनल बदलाव
हार्मोन में होने वाले बदलाव भी मूड पर असर डाल सकते हैं। खासकर महिलाओं में मासिक धर्म के आसपास होने वाले हार्मोनल परिवर्तन के दौरान चिड़चिड़ापन, उदासी या भावनात्मक संवेदनशीलता बढ़ सकती है। उम्र और अन्य शारीरिक बदलाव भी भूमिका निभा सकते हैं।
क्या करें: अगर मूड स्विंग लगातार या बहुत ज्यादा हो रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। बिना जांच के हार्मोन या कोई दवा लेना उचित नहीं है।
बहुत ज्यादा स्क्रीन टाइम और कम शारीरिक गतिविधि
लगातार मोबाइल या लैपटॉप पर समय बिताना और दिनभर बैठे रहना भी मानसिक थकान बढ़ा सकता है। शारीरिक गतिविधि की कमी से तनाव और सुस्ती महसूस हो सकती है।
क्या करें: रोज कुछ समय वॉक, योग या हल्की एक्सरसाइज के लिए निकालें। काम के बीच छोटे ब्रेक लें और अनावश्यक स्क्रीन टाइम कम करें।
कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी?
अगर मूड में बहुत तेज और बार-बार बदलाव हो रहे हैं, कई दिनों तक उदासी या चिड़चिड़ापन बना रहता है, नींद और भूख में बड़ा बदलाव आता है या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगते हैं, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। कुछ स्थितियों में मूड स्विंग किसी मानसिक या शारीरिक समस्या का संकेत भी हो सकते हैं।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
अगर आपको यह खबर उपयोगी लगी हो, तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर करना न भूलें और हर अपडेट के लिए जुड़े रहिए [haribhoomi.com] के साथ।
लेखक: (कीर्ति)
Fatty Liver Problem: 5 वजहों से हो सकती है फैटी लिवर की समस्या! बचाव के लिए बदल लें ये आदतें
White Clothes Cleaning: सफेद कपड़ों पर लगे जिद्दी दाग हटाने हैं? इन 5 आसान ट्रिक्स से कपड़े फिर दिखेंगे चमकदार
CWG 2026: नीरज चोपड़ा, मीराबाई चानू समेत इन खिलाड़ियों पर रहेंगी भारत को गोल्ड की उम्मीदें
ग्लासगो। 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत एक बार फिर मजबूत दावेदारी के साथ उतरने जा रहा है। 23 जुलाई से 2 अगस्त तक स्कॉटलैंड के ग्लासगो में होने वाले इन खेलों में 126 सदस्यीय भारतीय दल 10 खेलों में हिस्सा लेगा। ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया के मेजबानी से हटने के बाद खेलों की संख्या 19 से घटाकर 10 कर दी गई थी, जिसके बाद ग्लासगो ने आयोजन की जिम्मेदारी संभाली। यह टूर्नामेंट 2030 में अहमदाबाद में प्रस्तावित कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी से पहले भारत के लिए भी अहम माना जा रहा है।
भारत की सबसे बड़ी गोल्ड मेडल उम्मीदें
नीरज चोपड़ा पर सबसे ज्यादा नजरें
भारत की गोल्ड मेडल उम्मीदों की अगुआई ओलंपिक और विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा करेंगे। टोक्यो ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता नीरज पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में एक बार फिर खिताब के प्रबल दावेदार हैं। उनसे ग्लासगो में भी स्वर्ण पदक जीतकर अपने शानदार रिकॉर्ड में एक और उपलब्धि जोड़ने की उम्मीद है।
मीराबाई चानू तीसरे लगातार गोल्ड की तलाश में
भारोत्तोलन स्टार मीराबाई चानू भी भारत की सबसे भरोसेमंद पदक दावेदारों में शामिल हैं। गोल्ड कोस्ट 2018 और बर्मिंघम 2022 में स्वर्ण जीत चुकी चानू इस बार लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड जीतने के इरादे से उतरेंगी। ओलंपिक रजत पदक विजेता चानू लंबे समय से भारत की सबसे सफल अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं।
लवलीना से बॉक्सिंग में बड़ी उम्मीद
महिलाओं की 75 किग्रा वर्ग में लवलीना बोरगोहेन भारत की सबसे मजबूत दावेदार होंगी। टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता और 2023 विश्व चैंपियन लवलीना लगातार बड़े मंचों पर शानदार प्रदर्शन करती रही हैं। इस बार उनका लक्ष्य अपने करियर में कॉमनवेल्थ गेम्स का स्वर्ण पदक जोड़ना होगा।
गुरिंदरवीर सिंह पर रहेंगी नजरें
एथलेटिक्स में उभरते स्प्रिंटर गुरिंदरवीर सिंह भी भारत के लिए खास आकर्षण होंगे। उन्होंने इस साल फेडरेशन कप 2026 में पुरुषों की 100 मीटर दौड़ 10.09 सेकेंड में पूरी कर 10.10 सेकेंड की बाधा तोड़ने वाले पहले भारतीय बनने का इतिहास रचा था। राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी गुरिंदरवीर अब कॉमनवेल्थ के शीर्ष धावकों को चुनौती देने के लिए तैयार हैं।
प्रणति नायक से जिम्नास्टिक में उम्मीद
आर्टिस्टिक जिम्नास्ट प्रणति नायक जिम्नास्टिक में भारत की चुनौती की अगुआई करेंगी। कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव रखने वाली प्रणति इस बार अपने करियर का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स पदक जीतने की कोशिश करेंगी।
अनुभव और युवा जोश का शानदार मिश्रण
नीरज चोपड़ा, मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन जैसे अनुभवी सितारों के साथ गुरिंदरवीर सिंह और प्रणति नायक जैसे उभरते खिलाड़ियों के दम पर भारत ग्लासगो में मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद कर रहा है। यह अभियान 2030 में अहमदाबाद में संभावित कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी से पहले भारतीय खेलों की तैयारियों की भी बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi









