Cube Highways Trust InvIT की बाजार में मजबूत एंट्री, 3% से ज्यादा तेजी पर बंद
क्यूब हाईवेज ट्रस्ट इनविट का निर्गम कारोबार के पहले दिन तीन प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ बंद हुआ। कंपनी का 5,000 करोड़ रुपये का इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट) सार्वजनिक निर्गम पिछले सप्ताह बंद हुआ था। एक बयान के अनुसार यह सूचीबद्धता भारत में किसी इनविट के निजी तौर पर सूचीबद्ध मंच से सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध मंच में पहले बदलाव का प्रतीक है।
क्यूब हाईवेज ट्रस्ट की यूनिट ने बीएसई और एनएसई, दोनों में 152 रुपये प्रति यूनिट के निर्गम मूल्य से 1.97 प्रतिशत के प्रीमियम के साथ 155 रुपये पर कारोबार शुरू किया। बीएसई में यूनिट 3.21 प्रतिशत बढ़कर 156.88 रुपये पर बंद हुआ। एनएसई में यह 3.26 प्रतिशत बढ़कर 156.96 रुपये पर बंद हुआ।
इसका बाजार मूल्यांकन 21,085.77 करोड़ रुपये रहा। क्यूब हाईवेज ट्रस्ट के शुरुआती सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को पिछले सप्ताह शुक्रवार को बोली के अंतिम दिन 9.35 गुना अभिदान मिला था। इस पेशकश के लिए कीमत का दायरा 151-152 रुपये प्रति यूनिट था।
Union Cabinet ने बंदरगाह-आधारित उद्योगों के लिए संशोधित नीति को मंजूरी दी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को प्रमुख बंदरगाहों में बंदरगाह-आधारित उद्योगों को भूमि के आवंटन के लिए एक संशोधित नीति को मंजूरी दे दी। एक आधिकारिक बयान के अनुसार संशोधित नीति मौजूदा कैप्टिव उपयोगकर्ताओं को 30 वर्षों तक की बढ़ी हुई आवश्यकता के लिए नई बर्थ, जेट्टी, टर्मिनल, सिंगल बॉय मूरिंग (एसबीएम) जोड़ने की अनुमति देती है। साथ ही नीति बदलते कारोबारी और नियामक स्थितियों से होने वाले बदलावों का समाधान भी करती है।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि संशोधित नीति बंदरगाह-संचालित औद्योगिक विकास के लिए एक अनुमानित, पारदर्शी और निवेशक अनुकूल ढांचा तैयार करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। सोनोवाल ने कहा, संशोधित कैप्टिव नीति एक प्रमुख सुधार है, जो सार्वजनिक हित के साथ निवेशकों के विश्वास को संतुलित करती है। मौजूदा परिचालको को दीर्घकालिक निश्चितता प्रदान करके, क्षमता विस्तार की सुविधा देकर और भविष्य के निवेश के लिए एक पारदर्शी ढांचा तैयार करके यह कदम उठाया गया है।
बयान में कहा गया कि इस नीति से निवेशकों को अधिक निश्चितता मिलने, क्षमता वृद्धि को बढ़ावा मिलने और सरकार पर बिना किसी वित्तीय प्रभाव के बंदरगाह क्षेत्र में व्यापार करने में आसानी की उम्मीद है। बयान के अनुसार ये सुधार प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरणों को किसी नई निविदा प्रक्रिया की आवश्यकता के बिना मौजूदा बंदरगाह आधारित उद्योगों (पीडीआई) के रियायत समझौतों को 30 साल तक नवीनीकृत या विस्तारित करने की अनुमति देते हैं।
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