Manipal Health के IPO को अंतिम दिन मिलीं 4.92 गुना बोलियां, 5 अगस्त को होगी लिस्टिंग
मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को शुक्रवार को बोली के अंतिम दिन 4.92 गुना बोलियां मिलीं। एनएसई के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी के आईपीओ में 9,00,88,286 शेयरों की पेशकश के मुकाबले 44,30,73,025 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। पात्र संस्थागत खरीदारों (क्यूआईबी) के हिस्से को 8.25 गुना अभिदान मिला, जबकि गैर-संस्थागत निवेशकों के कोटे को 1.02 गुना अभिदान मिला।
खुदरा निवेशकों की श्रेणी को 93 प्रतिशत अभिदान मिला। मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज ने एंकर निवेशकों से 4,167 करोड़ रुपये जुटाए। इनमें अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और एलियांज ग्लोबल इन्वेस्टर्स फंड शामिल हैं।
आईपीओ का मूल्य दायरा 560-590 रुपये प्रति शेयर है, जिससे ऊपरी स्तर पर कंपनी का मूल्यांकन 77,600 करोड़ रुपये से थोड़ा अधिक बैठता है। बेंगलुरु स्थित कंपनी के आईपीओ में 8,000 करोड़ रुपये तक के इक्विटी शेयरों का ताजा निर्गम और मौजूदा शेयरधारकों द्वारा 2.16 करोड़ इक्विटी शेयरों तक का बिक्री पेशकश (ओएफएस) शामिल है। कंपनी ताजा निर्गम से मिलने वाली 5,378 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग अपनी अनुषंगी कंपनी मणिपाल हॉस्पिटल्स प्राइवेट लिमिटेड के कर्ज के समय से पहले भुगतान के लिए करेगी।
कंपनी का शेयर पांच अगस्त को बीएसई और एनएसई में सूचीबद्ध होगा।
US Senate के रूसी तेल खरीदारों पर 100% शुल्क वाले विधेयक पर भारत की नजर
रूसी तेल एवं गैस के भारत, चीन समेत बड़े खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का प्रावधान करने वाले विधेयक को अमेरिकी सीनेट में मंजूरी दिए जाने के बीच भारत ने शुक्रवार को कहा कि वह स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है। अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट में मंजूरी मिलने के बाद यह विधेयक अब निचले सदन प्रतिनिधि सभा में विचार के लिए जाएगा। प्रस्तावित कानून अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों पर कड़े व्यापारिक शुल्क लगाने का अधिकार देगा, जो रूस से बड़े पैमाने पर तेल एवं गैस का आयात करते हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भारत का रुख कई बार स्पष्ट किया जा चुका है। यह हमारी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को विविध स्रोतों के जरिए पूरा करने पर आधारित है, जिसमें अमेरिका भी शामिल है।” उन्होंने बताया कि भारत इस मुद्दे पर अमेरिका के संबंधित हितधारकों के साथ विभिन्न स्तरों पर संवाद बनाए हुए है। सीनेटर लिंडसे ओ ग्राहम की पहल पर लाया गया यह विधेयक रूस-यूक्रेन युद्ध में रूस का समर्थन करने वाले तत्वों पर प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिबंध लगाने का प्रावधान करता है।
इसके तहत रूसी अधिकारियों, उद्योगपतियों, उनके परिवारों, बैंकों और रूसी शैडो फ्लीट को निशाना बनाया गया है। विधेयक की धारा 113 के तहत उन पांच देशों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया है, जो रूसी ईंधन के सबसे बड़े खरीदार हैं या प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं। इसमें भारत और चीन के अलावा स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं।
प्रस्ताव के अनुसार, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) हर 180 दिन में इन देशों की सूची की समीक्षा करेगा और उनके आयात व्यवहार के आधार पर शुल्क दरों में बदलाव किया जा सकता है।
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