Odisha DGP वाई बी खुरानिया ने राष्ट्रपति Droupadi Murmu के दौरे की सुरक्षा समीक्षा की
(फाइल फोटो के साथ) भुवनेश्वर, 31 जुलाई ओडिशा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) वाई बी खुरानिया ने शुक्रवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि तीन अगस्त से शुरू होने वाले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के राज्य के तीन दिवसीय दौरे के दौरान वीवीआईपी सुरक्षा के लिए ‘ब्लू बुक’ में तय प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। ओडिशा पुलिस मुख्यालय के एक बयान में कहा गया, ‘‘डीजीपी ने निर्देश दिया कि सभी संबंधित इकाइयां अति विशिष्ट व्यक्ति (वीवीआईपी) को दी जाने वाली सुरक्षा के तहत ‘ब्लू बुक’ में तय प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।
अलग-अलग विभागों के बीच सुरक्षा से जुड़े सभी कामों में बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं।’’ खुरानिया ने राष्ट्रपति की आगामी यात्रा को लेकर एक बैठक में सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की। इस बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जिनमें निदेशक (खुफिया) आर पी कोचे, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) (कानून व्यवस्था) संजय कुमार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (राज्य सशस्त्र पुलिस) (एडीजीपी-एसएपी) राजेश कुमार, पुलिस आयुक्त (भुवनेश्वर-कटक) देवदत्त सिंह, पूर्व तट रेलवे (ईसीओआर) के प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त (पीसीएससी) आलोक बोहरा, आईजीपी (सीआर) सत्यजीत नाइक और पुलिस अधीक्षक (एसपी), अपराध अन्वेषण विभाग-अपराध शाखा (सीआईडी-सीबी), विवेकानंद शर्मा शामिल थे। राष्ट्रपति के कार्यक्रम के अनुसार, मुर्मू तीन अगस्त की दोपहर नयी दिल्ली से एक विशेष विमान से भुवनेश्वर पहुंचेंगी और फिर सड़क मार्ग से कटक जिले के बांकी के पास स्थित जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय जाएंगी, जहां वह संस्थान का उद्घाटन करेंगी।
रात्रि विश्राम के लिए वह भुवनेश्वर लौट आएंगी। राष्ट्रपति चार अगस्त को भुवनेश्वर से बेरहामपुर तक ट्रेन से यात्रा करेंगी और वहां से सड़क मार्ग से गंजाम जिले के तप्तपानी जाएंगी। तप्तपानी में वह सनाखेमुंडी प्रखंड के अंतर्गत गोविंदपुर पंचायत में स्थित मां कंधुनी देवी मंदिर में पूजा-अर्चना और आरती करेंगी तथा पौधारोपण कार्यक्रम में भाग लेंगी।
अधिकारियों ने बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग की बारिश की भविष्यवाणी को ध्यान में रखते हुए ट्रेन यात्रा का कार्यक्रम तय किया गया है। सुरक्षा तैयारियों के तहत सभी जगहों और यात्रा के मार्गों पर बम निरोधक दस्ते से जांच को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जाएगी। बयान में कहा गया है कि रेलवे पटरी की निगरानी बढ़ा दी गई है और यात्रा के दौरान रास्ते में पड़ने वाले सभी समपार फाटक पर कर्मचारी तैनात रहेंगे।
बयान के अनुसार प्लेटफॉर्म पर ड्यूटी के लिए तैनात रेलवे कर्मचारियों की पहले ही पहचान की जा रही है और सुचारु प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए उन्हें ड्यूटी पास जारी किए जा रहे हैं। तैयारियों को मजबूत करने के लिए ड्रोन से निगरानी और जगहों व मार्गों की लगातार जांच जैसे व्यापक सुरक्षा उपाय भी किए जा रहे हैं। डीजीपी ने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राष्ट्रपति के दौरे को सुचारू, सुरक्षित और गरिमापूर्ण बनाने के लिए पुलिस, रेलवे और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखें।
Karnataka High Court ने KPSC भर्ती में गड़बड़ी को संवैधानिक व्यवस्था पर हमला बताया
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कहा है कि कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) द्वारा 400 पशु चिकित्सा अधिकारी की भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप अगर सच साबित होते हैं, तो यह ‘सिर्फ छिटपुट गड़बड़ी नहीं, बल्कि सरकारी नौकरी से जुड़ी संवैधानिक व्यवस्था पर एक सुनियोजित हमला’ के बराबर होगा। पीठ ने 29 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान जांच को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की याचिका पर कर्नाटक सरकार से जवाब मांगा। मंजूनाथ की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने कहा कि सरकारी पद पर भर्ती वह जरिया है जिससे अनुच्छेद 16 के तहत ‘समान अवसर’ का संवैधानिक वादा असल में पूरा होता है।
उन्होंने कहा कि अगर इस प्रक्रिया में ‘हेरफेर, पक्षपात या लेनदेन का असर’ होता है, तो नुकसान सिर्फ असफल अभ्यर्थी का नहीं होता, बल्कि सबसे अच्छे अभ्यर्थी का चयन करने की जिम्मेदारी निभाने वाले हर सरकारी संस्थान की विश्वसनीयता का भी होता है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील गिरीश भारद्वाज ने तर्क दिया कि कथित भर्ती घोटाले के बड़े पैमाने को देखते हुए जांच को अपराध जांच विभाग (सीआईडी) के पास ही रहने देना निरर्थक कदम होगा। उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा तभी बहाल हो सकता है जब जांच सीबीआई को सौंपी जाए।
अदालत ने गौर किया कि शिकायत में आरोप लगाया गया था कि भर्ती प्रक्रिया में सिर्फ कुछ अलग-अलग गड़बड़ियां नहीं थीं, बल्कि यह ‘योग्यता को ही खत्म करने की एक सुनियोजित साजिश से पूरी तरह दूषित’ थी। अदालत इस मामले पर अगली सुनवाई सात अगस्त को करेगी। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 13 जुलाई को केपीएससी के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार को निलंबित कर दिया था, जिसके बाद से आयोग में ऊहापोह की स्थिति है।
अध्यक्ष पर अपनी दो बेटियों को ‘औद्योगिक विस्तार अधिकारी’ के तौर पर गैर-कानूनी तरीके से चयनित कराने में मदद करने का आरोप है।
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