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पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि के तहत सद्भावना को खत्म करने की हरसंभव कोशिश की: क्वात्रा

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नेपाल हिंसा-बिहार के बाजारों में 500Cr का कारोबार ठप:होटल, स्पा, रेस्टोरेंट और फैक्ट्रियां बंद; नहीं पहुंच रहे कर्मचारी; जानिए व्यापारियों का दर्द

"मेरे सैलून में काम करने वाली लोपिका पिछले तीन दिनों से नहीं आई है। वह कह रही है कि उसके इलाके का माहौल खराब है और घर से निकलने में डर लग रहा है। हमारे यहां के लगभग सभी होटल, स्पा, सैलून और रेस्टोरेंट में काम करने वाले कई महिला और पुरुष कर्मचारी नेपाल से आते हैं। यहां से भी बड़ी संख्या में लोग नेपाल की फैक्ट्रियों में काम करने जाते हैं। बीते चार दिनों से जारी हिंसा के कारण हमारे कारोबार को भारी नुकसान हुआ है।" रक्सौल के बैंक रोड में सैलून संचालक राकेश ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपना दर्द साझा किया। दरअसल, सुपौल के कोसी बैराज से रविवार को जल लेकर कप्टानगंज पहुंचे कांवड़ यात्रियों पर पथराव के बाद नेपाल के 7 जिले हिंसा की चपेट में हैं। इसके कारण बॉर्डर पर बहुत जरूरी होने पर ही आवाजाही हो रही है। दोनों ओर के बाजारों में कारोबार पर भारी असर देखने को मिला है। नेपाल में सांप्रदायिक हिंसा की शुरुआत कैसे हुई? नेपाल के 7 जिले कैसे हिंसा की चपेट में आ गए? इस हिंसा से बिहार के कारोबार को कितना नुकसान हुआ? कारोबारियों ने क्या कहा? पढ़िए पूरी रिपोर्ट.. नेपाल हिंसा से जुड़ी 2 तस्वीरें… पहले पढ़िए कब और कैसे भड़की हिंसा नेपाल में सांप्रदायिक तनाव की शुरुआत कोसी क्षेत्र के सुनसरी जिले के देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका के कप्तानगंज से हुई। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रविवार को करीब 20 कांवड़ यात्री दोपहर लगभग 12 बजे सुपौल के कोसी बैराज से जल लेकर नेपाल के लिए निकले थे। यात्रा के दौरान गाड़ी में भक्ति गीत बजाए जा रहे थे। कांवरियों की यात्रा कप्तानगंज पहुंची तो कुछ स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग गाने की आवाज कम कराने के लिए पहुंचे। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि बहस के बीच भीड़ में मौजूद किसी व्यक्ति ने पत्थर फेंक दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच लाठी-डंडों से झड़प हो गई और देखते ही देखते माहौल हिंसक हो गया। स्थानीय निवासी सुमित ने बताया कि कप्तानगंज में करीब 90 प्रतिशत हिंदू, लगभग 5 प्रतिशत मुस्लिम और शेष अन्य समुदाय के लोग रहते हैं। कप्तानगंज में शुरू हुई हिंसा का सबसे ज्यादा असर सुनसरी जिले में देखने को मिला। कई स्थानों पर पथराव, आगजनी, तोड़फोड़ और तनाव की घटनाएं सामने आईं है। इसके बाद स्थिति अन्य जिलों तक पहुंच गई। सप्तरी, सिराहा, धनुषा और पर्सा (बीरगंज) में भी तनाव की स्थिति बन गई। इन जिलों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। इनमें सुनसरी सबसे अधिक प्रभावित जिला है, जबकि पर्सा जिले के बीरगंज में स्थिति बिगड़ने के बाद प्रशासन को कर्फ्यू तक लगाना पड़ा। बिहार के 5 जिलों से 500 से ज्यादा करोड़ का कारोबार ठप नेपाल में बीते चार दिनों से जारी हिंसा का असर बिहार के सीमावर्ती जिलों के बाजारों पर पड़ रहा है। बिहार के रक्सौल (पूर्वी चंपारण), सीतामढ़ी, मधुबनी, अररिया और सुपौल के करीब 10 प्रमुख बाजार सीधे नेपाल से जुड़े हैं। 2025-26 के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इन बाजारों में प्रतिदिन करीब 320 करोड़ रुपए का कारोबार होता है। कारोबारियों का अनुमान है कि हिंसा के कारण हर दिन करीब 40 प्रतिशत का नुकसान हो रहा है। इस हिसाब से चार दिनों में करीब 500 करोड़ से ज्यादा रुपए के कारोबार का नुकसान हुआ है। सबसे अधिक असर उन बाजारों पर पड़ा है, जिनकी अर्थव्यवस्था नेपाली ग्राहकों पर निर्भर है। सुपौल: 25 लाख की बिक्री घटकर 2 लाख तक पहुंची सुपौल जिले के भीमनगर व्यापार संघ के अध्यक्ष सतेंद्र सिंह ने बताया, 'नेपाल में होने वाली बड़ी घटना का सबसे पहला असर बाजार पर पड़ता है। भीमनगर का करीब 80 फीसदी कारोबार नेपाली ग्राहकों पर निर्भर है। नेपाल से शादी, बारात, त्योहार और रोजमर्रा की खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में लोग भीमनगर आते हैं।' सामान्य दिनों में बाजार में रोजाना करीब 25 लाख की बिक्री होती थी, लेकिन हिंसा के बाद यह घटकर करीब 2 लाख तक रह गई है। भीमनगर के राम प्रवेश ने बताया, 'हमारे बाजार का अस्तित्व ही नेपाली ग्राहकों पर टिका है। हिंसा के बाद नेपाल से खरीदारी करने आने वाले लोग नहीं पहुंच रहे हैं और परिवहन भी लगभग ठप है। इस स्थिति में छोटे व्यापारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। हिंदू और मुस्लिम सभी को रोटी-कपड़ा-मकान चाहिए और सबको साथ रहना है। आपसी संघर्ष से किसी का भला नहीं होता, नुकसान सभी का होता है। हरपुर बाजार अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। जहां शाम के समय हजारों लोगों की भीड़ रहती थी, वहां अभी सन्नाटा पसरा है।' सुपौल के जामनगर बाजार के विकास कुमार ने बताया कि, ‘हमारी जनरल स्टोर की दुकान पर पहले प्रतिदिन 2500 रुपए की बिक्री होती थी, लेकिन हिंसा के बाद यह घटकर 300 रुपए रह गई है।’ अररिया: टैक्स के बाद अब हिंसा ने कारोबार तोड़ा अररिया जिले के पानीपुरा बाजार निवासी मनोज कुमार यादव ने बताया, ‘हिंसा नेपाल में हो रही है, लेकिन नुकसान सीमावर्ती भारतीय व्यापारियों को उठाना पड़ रहा है। जल्द ही हालात सामान्य होंगे और दोनों देशों के लोग पहले की तरह मिल-जुलकर रहेंगे।’ जोगबनी के व्यापारी अमन कुमार ने बताया, 'नेपाल सरकार द्वारा लगाए गए कर के कारण पहले ही 70 फीसदी नेपाली ग्राहक आना बंद कर चुके थे। अब हिंसा के कारण बचा हुआ कारोबार भी खत्म हो गया है। पिछले कुछ समय से सीमा पर नेपाली पुलिस सामान की जांच के दौरान ग्राहकों की तस्वीर लेकर उन्हें दोबारा भारत से खरीदारी नहीं करने की चेतावनी देती थी। इससे ग्राहक कम हो गए थे और अब हिंसा के कारण लगभग कोई ग्राहक नहीं आ रहा है। हालात ऐसे ही रहे तो व्यापार छोड़कर दूसरे शहरों में रोजगार तलाशने की नौबत आ सकती है।' जोगबनी के किराना दुकानदार कृष्ण नारायण राय ने कहा, ‘लॉकडाउन के दौरान भी कारोबार की इतनी खराब स्थिति नहीं थी। सुबह से शाम तक 200 रुपए की भी बिक्री नहीं हो रही है।’ मधुबनी: जयनगर का बाजार नेपाली ग्राहकों पर निर्भर मधुबनी जिले के जयनगर के व्यवसायी अनिल बैरोलिया ने बताया, 'नेपाल में कोई भी बड़ी घटना होती है तो उसका सीधा असर जयनगर के व्यापार पर पड़ता है। यहां का अधिकांश कारोबार नेपाली ग्राहकों के भरोसे चलता है। पहले नेपाल सरकार द्वारा लगाए गए कर ने व्यापार को प्रभावित किया और अब हिंसा ने स्थिति को और खराब कर दिया है।' सीतामढ़ी: कांवड़ यात्रियों को बॉर्डर से लौटाया गया सीतामढ़ी जिले के भिट्ठामोड़ बॉर्डर पर नेपाल के जनकपुर धाम में जल चढ़ाने जा रहे कांवड़ यात्रियों को सीमा पर रोक दिया गया। गोरखपुर निवासी महेश वर्मा ने बताया, 'मैं सुबह ही कांवड़ लेकर सीमा पर पहुंच गया था, लेकिन प्रशासन ने नेपाल में तनावपूर्ण माहौल का हवाला देते हुए आगे जाने की अनुमति नहीं दी। हम करीब आठ घंटे तक इंतजार करते रहे, लेकिन हालात सामान्य नहीं होने पर वापस लौटना पड़ा।' जनकपुर के पास दुकान चलाने वाले विजय कुमार गुप्ता ने बताया कि हमारी दुकान दो दिनों से बंद है। प्रशासन उन्हें सीमा पार नहीं जाने दे रहा है। लगातार दो दिनों से दुकान बंद रहने के कारण परिवार की आजीविका पर संकट आ गया है। पूर्वी चंपारण (रक्सौल): छोटे व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित रक्सौल भारत-नेपाल व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां बड़े मालवाहक वाहनों की आवाजाही जारी है, लेकिन छोटे व्यापारियों और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। सीमा क्षेत्र में सैलून चलाने वाले राकेश ने बताया कि उनके यहां काम करने वाले तीन नेपाली कर्मचारी दो महिलाएं और एक पुरुष पिछले तीन दिनों से काम पर नहीं आए हैं। उन्होंने बताया कि कर्मियों के इलाके में डर का माहौल है। कर्मचारियों के नहीं आने के कारण उन्हें खुद ही पूरा काम संभालना पड़ रहा है, जिससे कारोबार में करीब 80 फीसदी की गिरावट आई है। रक्सौल में कई होटल, सैलून, स्पा और अन्य प्रतिष्ठानों में नेपाली कर्मचारी काम करते हैं और लगभग सभी इसी समस्या का सामना कर रहे हैं। रक्सौल के व्यापारी रमेश ने बताया कि बड़े कारोबारी ट्रकों के माध्यम से माल भेज पा रहे हैं, लेकिन छोटे व्यापारी सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। दुकान पर ग्राहक नहीं आ रहे हैं और सीमा पार आवाजाही बाधित होने से उनका कारोबार लगभग ठप हो गया है।

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  Sports

CWG 2026: गुलवीर सिंह ने 5000 मीटर में रचा इतिहास, एक ही संस्करण में दो मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बने

Gulveer Singh: भारतीय लॉन्ग-डिस्टेंस रनर गुलवीर सिंह ने शनिवार को इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है। वह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पुरुषों की 5000 मीटर स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं। मौजूदा एशियाई चैंपियन गुलवीर ने इस प्रतियोगिता में कांस्य पदक अपने नाम किया है। इसके साथ ही उन्होंने इस महाकुंभ में अपने शानदार प्रदर्शन को दोहराते हुए डबल मेडल अपने नाम किया है, क्योंकि इससे पहले वह पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में रजत पदक भी जीत चुके हैं।

एक ही संस्करण में दो पदक जीतने वाले पहले एथलीट
इस बड़ी उपलब्धि के साथ गुलवीर सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में एक ही संस्करण में दो ट्रैक एंड फील्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट भी बन गए हैं। भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में यह एक ऐतिहासिक और मील का पत्थर साबित होने वाली उपलब्धि है।

एथलेटिक्स प्रतियोगिता के अंतिम दिन गुलवीर ने 13:24.95 का समय निकालकर पुरुषों की 5000 मीटर फाइनल में तीसरा स्थान हासिल किया। केन्या के मैथ्यू किपचुम्बा किपसांग ने 13:23.61 का समय लेकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि ऑस्ट्रेलिया के काई रॉबिन्सन (जिन्होंने पहले 10,000 मीटर का खिताब जीता था) ने 13:24.70 के समय के साथ रजत पदक हासिल किया।

कांटे की टक्कर में केन्याई प्रतिद्वंद्वी को पीछे छोड़ा
28 वर्षीय भारतीय धावक, जो 5000 मीटर और 10,000 मीटर दोनों इवेंट्स में राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक भी हैं, पूरी रेस के दौरान लीडिंग ग्रुप के साथ बने रहे और अंतिम लैप में जोरदार फिनिश दी। गुलवीर ने अंतिम चरणों में गजब का संयम दिखाया और केन्या के कॉर्नेलियस केम्बोई को महज 0.04 सेकंड के अंतर से पीछे छोड़ते हुए कांस्य पदक अपने नाम कर लिया। केम्बोई इस साल की शुरुआत में 12:56.02 के अपने पर्सनल बेस्ट के साथ उतरे थे, लेकिन पोडियम से चूक गए।

गौर करने वाली बात यह है कि गुलवीर का यह मेडल-विनिंग समय उनके इस साल के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (13:03.93) और उनके राष्ट्रीय रिकॉर्ड (12:59.77) से नीचे था, फिर भी यह भारतीय एथलेटिक्स के लिए इतिहास रचने के लिए पर्याप्त साबित हुआ।

इससे पहले इस भारतीय धावक ने 2023 के हांगझोउ एशियाई खेलों में 10,000 मीटर में कांस्य पदक जीता था, जिसके बाद अब उन्होंने इस कॉमनवेल्थ गेम्स में एक रजत और एक कांस्य अपने नाम कर लिया है।

प्रवीण चित्रवेल और सेलवा प्रभु ने भी बढ़ाया भारत का मान
एथलेटिक्स में भारत के लिए शनिवार का दिन बेहद सफल रहा। पुरुषों की ट्रिपल जंप (त्रिस्तरीय कूद) में प्रवीण चित्रवेल ने 16.58 मीटर के शानदार प्रयास के साथ रजत पदक अपने नाम किया। वहीं उनके साथी एथलीट सेलवा प्रभु तिरुमरण ने 16.52 मीटर की छलांग लगाकर कांस्य पदक जीता, जो उनके करियर का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय पदक है। जमैका के जॉर्डन स्कॉट ने 16.72 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

पैरा एथलेटिक्स में सोमन राणा और शुभम जुयाल का जलवा
पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भी भारत का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की F57 शॉट पुट (गोला फेंक) स्पर्धा में सोमन राणा ने सीजन के सर्वश्रेष्ठ 13.40 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। उनके साथी भारतीय एथलीट शुभम जुयाल ने सीजन के बेस्ट 13.28 मीटर के प्रयास के साथ रजत पदक देश की झोली में डाला। इस तरह भारत ने इस स्पर्धा में वन-टू फिनिश हासिल की। वहीं कैमरून के सेड्रिक अज़ामदजी ने 12.57 मीटर के साथ कांस्य पदक हासिल किया।

अन्य स्पर्धाओं में भारत का मिला-जुला प्रदर्शन
अन्य मुकाबलों की बात करें तो महिलाओं की 10,000 मीटर रेस वॉक में प्रियंका गोस्वामी ने सीजन के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (45:53.93) के साथ सातवां स्थान हासिल किया, जबकि साथी एथलीट रवीना को डिस्क्वालीफाई कर दिया गया। पुरुषों की पोल वॉल्ट (बांस कूद) में राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक देव कुमार मीना 5.30 मीटर की छलांग लगाकर चौथे स्थान पर रहे, जबकि कुलदीप कुमार 5.10 मीटर के साथ छठे स्थान पर रहे।

इसके अलावा, विशाल टीके, अंसा बाबू, संतोष कुमार तमिलरासन और रशदीप कौर की भारतीय मिक्स्ड 4x400 मीटर रिले टीम ने 3:20.32 के समय के साथ छठा स्थान प्राप्त किया। भले ही एथलेटिक्स में इस बार एबल-बॉडी वर्ग में कोई स्वर्ण पदक हाथ नहीं लगा, लेकिन भारत ने कुल 10 पदकों (पांच रजत और पांच कांस्य) के साथ अपना अभियान समाप्त किया।

नई दिल्ली में 2010 में जीते गए 12 पदकों के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलेटिक्स का यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा और बेहतरीन पदक अभियान रहा है।

Sun, 02 Aug 2026 10:38:07 +0530

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