Assam flood: पीड़ितों को राहत देने बीमा कंपनियों व NBFCs से संपर्क करेगी सरकार
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने इस साल बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित चार जिलों के अपने ग्राहकों को छूट प्रदान करने के लिए तथा दावों के शीघ्र निपटान के लिए बीमा कंपनियों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से संपर्क करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि घरों, पशुओं आदि को हुए नुकसान का आकलन जल्द ही पूरा होने की उम्मीद है और सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी कि मरम्मत के लिए धन जल्द से जल्द वितरित किया जाए। यह घोषणा मुख्यमंत्री के उस बयान के एक दिन बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की एक विशेष बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि चार जिलों में सभी बाढ़ प्रभावित लोगों को ऋण चुकाने के लिए छह महीने की मोहलत दी जाएगी।
राज्य में बाढ़ से अब तक कम से कम 80 लोगों की मौत हो चुकी है और 2 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। चार जिले - शिवसागर, चारियादेव, जोरहाट और गोलाघाट - सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। यहां कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए शर्मा ने कहा, ‘‘हमने इस महत्वपूर्ण समय में लोगों को और अधिक राहत कैसे प्रदान की जाए, इस पर विस्तार से चर्चा की।’’ उन्होंने कहा कि 5 अगस्त को निजी और सरकारी दोनों बीमा कंपनियों के साथ एक बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया ताकि उनसे बीमित क्षतिग्रस्त वाहनों, पशुधन आदि के दावों का शीघ्र निपटान करने का आग्रह किया जा सके।
उन्होंने कहा, ‘‘शिवसागर, चारियादेव, जोरहाट और गोलाघाट के चार जिलों के लिए, हम उनसे अनुरोध करेंगे कि वे स्वयं दावे एकत्र करें और उन्हें जल्द से जल्द निपटाएं।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इन चार जिलों के कर्जदारों को मोहलत देने और ऐसे लाभ देने के अनुरोध के साथ 5 अगस्त को एनबीएफसी के साथ भी बैठक करेगी। उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरह बैंकों ने कल उनके साथ हमारी बैठक के बाद ऋण पर छह महीने की मोहलत या ऋण चुकाने की अवधि बढ़ा दी है, हम एनबीएफसी से भी इसी तरह का लाभ प्रदान करने का आग्रह करेंगे।’’ शर्मा ने कहा कि सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में मकानों को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है और एक या दो दिन के भीतर पूरा होने की उम्मीद है, ताकि अंतरिम राहत के रूप में प्रति परिवार 15,000 रुपये का वितरण अगस्त में ही किया जा सके।
Senthil Balaji को Supreme Court से राहत, नए भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तारी पर रोक
उच्चतम न्यायालय ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेता एवं पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी को राहत देते हुए शुक्रवार को उन्हें तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा दर्ज किए गए भ्रष्टाचार के एक नये मामले में अगले आदेश तक अग्रिम जमानत दे दी। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कुछ शर्तों के साथ बालाजी की गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। पीठ ने जो शर्तें लगाई हैं उसके तहत बालाजी जांच में सहयोग करेंगे, अपना पासपोर्ट जमा कराएंगे और किसी गवाह को प्रभावित नहीं करेंगे।
न्यायमूर्ति बागची ने तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गुरु कृष्णकुमार से कहा, ‘‘जमानत की शर्तों का तनिक भी उल्लंघन हो तो आप तुरंत हमारे पास आइए। हम अपने आदेश में बदलाव कर देंगे या उसे रद्द कर देंगे।’’ इससे पहले दिन में न्यायमूर्ति वी. मोहना ने बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था। उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (टासमैक) में कथित अनियमितताओं से जुड़े भ्रष्टाचार के नये मामले में अग्रिम जमानत का अनुरोध करने वाली बालाजी की याचिका पर सुनवाई के लिए बृहस्पतिवार को सहमति जताई थी।
मद्रास उच्च न्यायालय ने टासमैक घोटाला मामले में सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय द्वारा दर्ज प्राथमिकी में बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका बृहस्पतिवार को खारिज कर दी थी। इसके तुरंत बाद वरिष्ठ अधिवक्ताओं --कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी और अमित आनंद तिवारी-- ने द्रमुक नेता की ओर से न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ से याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि बालाजी के खिलाफ किसी भी समय दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
सुनवाई के दौरान, प्रधान न्यायाधीश ने कृष्णकुमार से पूछा कि बालाजी से हिरासत में पूछताछ की जरूरत क्यों है, क्योंकि यह मामला मुख्य रूप से दस्तावेजी सबूतों पर आधारित है। वरिष्ठ वकील ने जवाब दिया कि आरोप 2021-25 की घटना से जुड़े हैं और बालाजी ने प्राथमिकी दर्ज होने से रोका था क्योंकि वे उस समय मंत्री थे, इसलिए उन्हें अदालत से पूर्ण सुरक्षा नहीं मिल सकती। बालाजी की ओर से वरिष्ठ वकीलों, मुकुल रोहतगी और अमित आनंद तिवारी, के साथ सिब्बल पेश हुए और कहा कि यह एक ‘अजीब मामला’ है, क्योंकि प्राथमिकी 28 जुलाई को तब दर्ज की गई जब मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व में नयी टीवीके सरकार सत्ता में आई।
यह प्राथमिकी एक दूसरे मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर हलफनामे पर आधारित थी। उन्होंने कहा, ‘‘जिन घटनाओं की बात हो रही है, वे 2021-25 के दौरान की हैं। ईडी ने 2025 में इस अदालत में एक हलफनामा दायर किया था।
जिस व्यक्ति ने हलफनामा दायर किया था, वह अब बदल गया है, क्योंकि नयी सरकार बन गई है। उसी हलफनामे के आधार पर 28 जुलाई को प्राथमिकी दर्ज की गई थी।’’ इसके बाद न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि वह अब मंत्री नहीं हैं और राज्य सरकार उनके प्रभाव में नहीं है, लेकिन न्यायालय यह सुनिश्चित करेगा कि वह जांच से भागें नहीं और गवाहों को प्रभावित न करें। कृष्णकुमार ने यह भी कहा कि यह भ्रष्टाचार का गंभीर मामला है और इसमें अग्रिम ज़मानत नहीं दी जानी चाहिए।
उच्च्तम न्यायालय ने याचिका पर तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा कि यदि मामले की जांच के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ आवश्यक हो, तो राज्य सरकार अदालत से अनुमति मांग सकती है। बालाजी तमिलनाडु विधानसभा में कोयंबटूर दक्षिण सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्राथमिकी के अनुसार, टासमैक में दुकानों और बार के आवंटन में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ।
बालाजी ने आरोप लगाया कि प्राथमिकी में प्रवर्तन निदेशालय के हलफनामे और एजेंसी द्वारा उच्चतम न्यायालय में दाखिल याचिका के अंश शब्दशः शामिल किए गए हैं। याचिका में कहा गया कि प्राथमिकी में कई स्थानों पर स्वयं यह उल्लेख किया गया है कि संबंधित सामग्री प्रवर्तन निदेशालय के जवाबी हलफनामे और याचिका से ली गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता तिवारी ने कहा, ‘‘हमारी दलील है कि प्राथमिकी उन घटनाओं को लेकर दर्ज की गई है, जो कथित तौर पर 2021 से 2025 के बीच हुईं।
मेरे फरार होने की कोई आशंका नहीं है और हिरासत में पूछताछ की भी आवश्यकता नहीं है। मैं संबंधित विभाग का मंत्री था, जबकि टासमैक अपने अस्तित्व और कामकाज में एक स्वतंत्र निगम है।’’ उन्होंने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण भी बताया। प्राथमिकी में करोड़ों रुपये की कथित सुनियोजित नकद रिश्वत योजना का विवरण दिया गया है।
आरोप है कि बोतल आपूर्ति करने वाली कंपनियों ने शराब बनाने वाली इकाइयों के लिए फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर बिल तैयार किए। इस घटना में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 120बी, 167, 409, 109 और 420, भारतीय न्याय संहिता, 2023 की संबंधित धाराओं 61(2), 201, 316(5), 49 और 318(4) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (2018 में संशोधित) की धाराओं 7(सी), 12, 13(1)(ए) और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
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