जहरीले कोबरा को मां झांकेश्वरी मानकर पूजा! बंगाल के 7 गांवों में घरों में बेखौफ घूमते हैं नाग
Cobra Worship: पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले में एक अनोखी परंपरा आज भी जिंदा है. यहां सात गांवों में लोग जहरीले मोनोकोल्ड कोबरा को मां झांकेश्वरी का स्वरूप मानकर पूजा करते हैं. ग्रामीणों का दावा है कि ये सांप कभी उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाते और गांव में खुलेआम घूमते हैं. हर साल होने वाले उत्सव में हजारों लोग शामिल होते हैं. इस परंपरा को देखने देश-विदेश से विशेषज्ञ भी पहुंचते हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार, यह इंसान और जहरीले सांपों के बीच सह-अस्तित्व का दुर्लभ उदाहरण है.
गोंडा की गिरिजा देवी पारंपरिक खेती छोड़ सांवा और रागी की खेती, न पानी, न खाद, फिर भी बंपर पैदावार, जानें
गोंडा की किसान गिरिजा देवी बताती हैं कि सांवा और रागी की खेती में बुवाई के बाद न तो अतिरिक्त सिंचाई की जरूरत पड़ती है और न ही रासायनिक खाद की. बरसात के पानी से ही फसल अच्छी तरह तैयार हो जाती है. बुवाई के करीब चार महीने बाद इसकी कटाई कर ली जाती है, जिससे कम लागत में अच्छा उत्पादन मिलता है. गिरिजा देवी बताती है कि रागी और सांवा दोनों ही मोटे अनाज की श्रेणी में आते हैं. इनमें कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं. रागी में कैल्शियम, आयरन और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जबकि सावा भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है. यही कारण है कि आजकल लोग इन अनाजों से बने आटा, दलिया और अन्य खाद्य पदार्थों का अधिक उपयोग कर रहे हैं.
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