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Bihar में Deepak Prakash का मंत्री पद बचाने को BJP का 'मास्टरस्ट्रोक', MLC Devesh Kumar का इस्तीफा

बिहार सरकार ने मंत्री दीपक प्रकाश को बिहार विधान परिषद के लिए चुनने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया था कि वे बिना विधानमंडल का सदस्य बने राज्य कैबिनेट में कैसे बने रह सकते हैं। खबरों के मुताबिक, इस व्यवस्था के तहत बीजेपी MLC देवेश कुमार ने विधान परिषद से इस्तीफ़ा दे दिया है। उम्मीद है कि इस खाली सीट से दीपक प्रकाश चुनाव लड़ सकेंगे और अपना मंत्री पद बनाए रख सकेंगे।
 

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देवेश कुमार के इस्तीफे को सत्ताधारी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार द्वारा एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है, ताकि दीपक प्रकाश मंत्री पद पर बने रहते हुए विधानमंडल सदस्य बनने की संवैधानिक आवश्यकता को पूरा कर सकें। यह घटनाक्रम गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई उस सुनवाई के बाद सामने आया है, जिसमें दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर बने रहने को चुनौती दी गई थी, जबकि वे न तो विधानसभा और न ही विधान परिषद के सदस्य थे।

सुनवाई के दौरान, बेंच ने बिहार सरकार से सवाल किया कि कोई मंत्री किसी भी सदन के लिए चुने बिना संविधान में तय समय-सीमा से ज़्यादा समय तक पद पर कैसे बना रह सकता है। कोर्ट ने कहा कि यह मामला संवैधानिक कानून से जुड़े एक अहम सवाल से जुड़ा है और राज्य सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया। मामले की अहमियत को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई 4 अगस्त के लिए तय की है।

दीपक प्रकाश को विधान परिषद में भेजने का सरकार का फ़ैसला, कार्यवाही के दौरान उठी संवैधानिक चिंताओं को दूर करने और साथ ही राज्य कैबिनेट में उनकी मौजूदगी बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, दीपक प्रकाश को हाल ही में विधान परिषद की 10 सीटों के चुनाव में टिकट नहीं मिला था। ऐसे में संवैधानिक प्रावधानों के तहत उनका मंत्री पद खतरे में पड़ गया था। इस स्थिति से निपटने के लिए भाजपा ने अपने कोटे की एक सीट खाली करने का फैसला किया और देवेश कुमार ने इस्तीफा देकर रास्ता साफ कर दिया।
 

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देवेश कुमार राज्यपाल द्वारा मनोनीत 12 विधान परिषद सदस्यों में शामिल थे और उनका कार्यकाल मार्च 2027 तक था। अब उनके इस्तीफे से खाली हुई सीट पर राज्यपाल कोटे से दीपक प्रकाश को मनोनीत किए जाने की संभावना है। यदि ऐसा होता है तो वे विधान परिषद के सदस्य बन जाएंगे और उनका मंत्री पद बरकरार रहेगा।
 
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Bihar में Sahayog Shivir के जरिए 5.33 लाख से अधिक जनशिकायतों का हुआ निपटारा

बिहार सरकार ने राज्य में हाल ही में शुरू की गई सहयोग शिविर पहल के तहत प्राप्त 5.83 लाख से अधिक जनशिकायतों में से 5.33 लाख से अधिक का निपटारा कर दिया है, जबकि 5.18 प्रतिशत मामले अभी लंबित हैं। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, 19 मई को शुरू की गई इस पहल के तहत अब तक कुल 5,83,866 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

इनमें से 5,33,904 मामलों का निपटारा किया जा चुका है, 19,718 आवेदन अस्वीकृत किए गए हैं और 30,244 मामले लंबित हैं। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, लंबित मामलों का सर्वाधिक प्रतिशत पटना जिले में है, जहां 9.33 प्रतिशत आवेदन अभी लंबित हैं। पटना में कुल 28,206 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 24,663 का निपटारा किया गया, 911 आवेदन अस्वीकृत किए गए और 2,632 आवेदन लंबित हैं।

सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मोहम्मद सोहैल ने पटना में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘सहयोग शिविर में अब तक 5,83,866 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से लगभग दो से ढाई महीने के भीतर 5,33,904 मामलों का निपटारा किया जा चुका है, जबकि शेष मामलों पर कार्रवाई जारी है।’’ उन्होंने बताया कि बिहार लोक सेवाओं का अधिकार (आरटीपीएस) अधिनियम, 2011 के तहत जाति, आय और आवासीय प्रमाण पत्र जैसी सेवाओं के लिए अब तक 53.8 करोड़ से अधिक आवेदनों का निपटारा किया जा चुका है। सोहैल ने कहा, ‘‘राज्य सरकार ने 23 जून से आरटीपीएस सेवाओं में देरी होने पर स्वचालित अपील व्यवस्था लागू की है। इसके तहत निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन का निपटारा नहीं होने पर वह स्वतः अपीलीय स्तर पर पहुंच जाता है।’’ उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था के लागू होने के बाद अब तक 6,934 अपील स्वतः दर्ज हुई हैं, जिनमें से 5,503 का निपटारा किया जा चुका है।

सचिव ने बताया कि 22 जनवरी, 2016 से बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत प्रमंडल, अनुमंडल और जिला स्तर पर तैनात विशेष अधिकारियों के माध्यम से 19.38 लाख से अधिक शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में शुरू की गई बिहार सरकारी कर्मचारी शिकायत निवारण प्रणाली के तहत कार्यरत और सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों की 16,106 शिकायतों का भी निपटारा किया गया है। सोहैल ने बताया कि ‘सात निश्चय-2’ और ‘सात निश्चय-3’ के तहत अब तक 10,27,839 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है।

इनमें 8,19,634 लोगों की नियमित नियुक्ति तथा 1,32,558 लोगों की संविदा के आधार पर नियुक्ति की गई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 और 2026-27 के दौरान विभिन्न विभागों में 1,72,218 रिक्त पदों को भरने के लिए विभिन्न भर्ती आयोगों और बोर्ड को प्रस्ताव भेजे गए हैं। साथ ही, शिक्षक भर्ती परीक्षा (टीआरई-4) के चौथे चरण के लिए भी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।

सोहैल ने बताया कि भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) बोधगया के सहयोग से संचालित मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना के तहत 107 प्रबंधन विशेषज्ञों को विभिन्न सरकारी विभागों में तैनात किया गया है, ताकि आधुनिक प्रशासनिक पद्धतियों के माध्यम से सुशासन को और मजबूत किया जा सके।

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