Explainer: एक के बाद एक रियलिटी शोज की बाढ़, आखिर क्यों बढ़ता जा रहा है इनका क्रेज?
Reality Shows Trend: एक समय था जब टीवी पर गिने-चुने रियलिटी शोज ही देखने को मिलते थे. दर्शक 'इंडियन आइडल', 'सारेगामापा', 'डांस इंडिया डांस' या 'बिग बॉस' के नए सीजन का लंबे समय तक इंतजार करते थे. लेकिन अब टीवी के साथ-साथ OTT प्लेटफॉर्म्स ने भी रियलिटी कंटेंट पर बड़ा दांव लगाना शुरू कर दिया है. एक शो खत्म भी नहीं होता और दूसरे का ऐलान हो जाता है. पिछल कुछ समय में राइज एंड फॉल, द 50 जैसे नए इंटरनेशनल फॉर्मेट्स पर बने रियलिटी शोज देखने को मिले हैं.
बता दें कि इन दिनों अलायंस (Alliance) और लॉक अप का सीजन 2 (Lock Upp 2) भी लोगों को खूब एंटरटेन कर रहा है और अब द ट्रेटर्स (The Traitotrs 2) के नए सीजन का भी ऐलान हो गया है. दूसरी ओर बिग बॉस, रोडिज, लाफ्टर शेफ जैसे पुराने हिट शोज भी लगातार चर्चा में बने रहते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर रियलिटी शोज का क्रेज इतना क्यों बढ़ गया है?
सिंगिंग-डांसिंग तक सीमित नहीं रियलिटी शोज
एक दौर था जब रियलिटी शोज का मतलब सिर्फ सिंगिंग या डांस कॉम्पिटिशन होता था. 'इंडियन आइडल', 'सुपरस्टार सिंगर', 'सारेगामापा', 'डांस इंडिया डांस', 'झलक दिखला जा' और 'इंडियाज गॉट टैलेंट' जैसे शोज कंटेस्टेंट्स को मंच देने के लिए जाने जाते थे.लेकिन पिछले कुछ सालों में गेम, सर्वाइवल, माइंड गेम, कॉमेडी, डेटिंग और सोशल एक्सपेरिमेंट जैसे नए कॉन्सेप्ट्स वाले रियलिटी शोज लोगों को पसंद आ रहे हैं. यही वजह है कि अब रियलिटी शोज की डिमांड पहले से कही ज्यादा बड़ गई है.
OTT ने बदल दिया पूरा खेल
OTT प्लेटफॉर्म्स के आने के बाद रियलिटी शोज की दुनिया में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. पहले जहां टीवी की समय सीमा और सेंसरशिप की वजह है कई चीजें सीमित रहती थीं, वहीं ओटीटी ने मेकर्स को नए फॉर्मेट्स पर शोज को दिखाने की आजादी दी है. करण जौहर का शो 'The Traitors' की बात करे तो इस शो में दोस्ती, धोखा, रणनीति और माइंड गेम्स देखने को मिला था. वहीं, राइज एंड फॉल और द 50 इंटरनेशनल फॉर्मेट्स वाले शोज बाकि रियलिटी शो से अलग हैं और इनमें पॉलीटिक्स, अलयांस, सर्वाइवल जैसी चीजें देखने को मिली हैं.
'बिग बॉस' ने बदली रियलिटी शोज की दिशा
भारत में रियलिटी शोज की सबसे बड़ी सफलता की बात करें तो बिग बॉस (Bigg Boss) का नाम सबसे ऊपर आता है. इस शो की वजह से ही पता चल पाया है कि फैंस अपने फेवरेट स्टार को बस एक्टिंग करते हुए ही नहीं देखना चाहते, बल्कि उनकी पर्सनल लाइफ और रियल पर्सनैलिटी भी देखना चाहते हैं. आज लगभग हर नया रियलिटी शो किसी न किसी रूप में इसी फॉर्मूले को यूज कर रहा है. बस गेम का फॉर्मट और खेलने का तरीका अलग है.
'Lock Upp' में दिखा कुछ नया
एकता कपूर का रियलिटी शो 'Lock Upp' की बात करे तो ये भी एक नया फॉर्मेट है. इसमें कंटेस्टेंट जेल में रहते हैं और खाने के लिए उन्हें पैसे कमाने होते हैं. इसमें कंटेस्टेंट्स को अपने पर्सनल सीक्रेट भी रिवील करने होते हैं, जो विवाद, र मानसिक दबाव जैसे मुद्दों को उठाता है. इन दिनों लॉक अप का 2 दूसरा स्ट्रीम किया जा रहा है, जो लोगों को बेहद पसंद आ रहा है. हालांकि अब ये शो अपने आखिरी हफ्ते में हैं और जल्द ही इसका फिनाले होने वालसा है.
कॉमेडी और कुकिंग भी बन रहे हैं हिट फॉर्मेट
रियलिटी शोज अब सिर्फ मुकाबले तक सीमित नहीं हैं. पहले जहां कुकिंग शो में मास्टर शेफ देखने को मिलता था. तो वहीं अब कुकिंग के साथ-साथ कॉमेडी भी देखने को मिलती है. लॉफ्टर सेफ (Laughter Chefs) जैसे शोज में कॉमेडी, कुकिंग और सेलिब्रिटी की मस्ती देखने को मिलती है. इन शोज को लोग अपने पूरे परिवार के साथ देखते हैं. बता दें, आज किसी भी रियलिटी शो की पॉपुलैरिटी सिर्फ उसकी TRP से तय नहीं होती, बल्कि इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब क्लिप्स और X पर ट्रेंडिंग हैशटैग ने भी इन शो को पॉपुलर कर दिया है. कई बार शो का सिर्फ 30 सेकंड का क्लिप वायरल हो जाता है और लोग पूरा एपिसोड देखने पहुंच जाते हैं. यही वजह है कि मेकर्स अब ऐसे मोमेंट्स बनाने पर भी खास ध्यान देते हैं.
सेलेब्रिटी के नाम से चलता है शो
आज लगभग हर बड़ा रियलिटी शो किसी न किसी बड़े चेहरे से जुड़ा होता है. सलमान खान का 'Bigg Boss', करण जौहर का 'The Traitors', रोहित शेट्टी का 'Khatron Ke Khiladi' और कंगना रनौत का 'Lock Upp', हालांकि इसके सीजन 2 को फरहा खान और रितेश देशमुख होस्ट कर रहे हैं.
रियलिटी शोज का और बढ़ेगा ट्रेंड?
जिस तरह से इस समय रियलिटी शोज का दौर देखने को मिल रहा है, ऐसे में लगता है कि आने वाले समय में ये और बढ़ने वाला है. अब सिर्फ सिंगिंग और डांस ही नहीं, बल्कि माइंड गेम्स, सोशल एक्सपेरिमेंट, सर्वाइवल, कॉमेडी और सेलिब्रिटी-ड्रिवन फॉर्मेट्स भी मनोरंजन का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं. वहीं, इसकी एक बड़ी वजह ये भी है कि अब हर कोई सेलेब्स की रियल पर्सनैलिटी को देखना चाहता है. वहीं, मेकर्स के लिए इसमें ये फायदा होता है कि फिक्शन शोज की तुलना में रियलिटी शोज कई बार कम लागत में बनते हैं. इसके साथ ही इन्हें कई एड, ब्रांड इंटीग्रेशन, स्पॉन्सरशिप और डिजिटल व्यूअरशिप मिलती है.
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FAQ
1. आजकल रियलिटी शोज पहले से ज्यादा क्यों बन रहे हैं?
- इसकी वजह है, OTT प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती लोकप्रियता, कम प्रोडक्शन कॉस्ट और दर्शकों की बदलती पसंद.
2- क्या अब रियलिटी शोज सिर्फ सिंगिंग और डांस तक सीमित नहीं हैं?
- अब रियलिटी शोज में माइंड गेम्स, सर्वाइवल, सोशल एक्सपेरिमेंट, कॉमेडी, कुकिंग और सेलिब्रिटी से जुड़े फॉर्मेंट देखने को मिलते हैं.
3- रियलिटी शोज को सोशल मीडिया से कितना फायदा मिलता है?
- इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब क्लिप्स और X पर वायरल होने वाले वीडियो नए दर्शकों को शो से जोड़ते हैं.
4- मेकर्स रियलिटी शोज पर इतना बड़ा दांव क्यों लगा रहे हैं?
- रियलिटी शोज में ब्रांड इंटीग्रेशन, स्पॉन्सरशिप और डिजिटल व्यूअरशिप की वजह से अच्छी कमाई होती है.
5- क्या आने वाले समय में रियलिटी शोज का ट्रेंड और बढ़ेगा?
-जिस तरह से लोगों की डिमांड बढ़ रही हैं, ऐसे में टीवी और OTT दोनों पर नए-नए रियलिटी शोज देखने को मिलते रहेंगे.
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विश्व के दवा नियामकों के बीच घनिष्ठ सहयोग चाहता है भारत: पीयूष गोयल
नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत दुनिया भर के दवा नियामक संस्थानों (मेडिसिन रेगुलेटर्स) के बीच घनिष्ठ सहयोग चाहता है। उन्होंने कहा कि भारत के बढ़ते मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का नेटवर्क इस सहयोग को और मजबूती देगा, जिससे दुनिया भर के मरीजों को बेहतर गुणवत्ता वाली किफायती दवाएं तेजी से उपलब्ध कराई जा सकेंगी और भारत वैश्विक फार्मास्युटिकल नवाचार का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।
पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि नई दिल्ली के भारत मंडपम में दो दिवसीय ग्लोबल ड्रग रेगुलेटरी कॉन्क्लेव 2026 की शुरुआत हुई है। उन्होंने बताया कि भारत के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय फार्मास्युटिकल नियामक मंच के रूप में आयोजित इस सम्मेलन में दुनिया के विभिन्न देशों के राष्ट्रीय दवा नियामक प्राधिकरणों के प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी भाग ले रहे हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सम्मेलन भारतीय दवा उद्योग, वैश्विक नियामकों और अन्य हितधारकों के बीच सहयोग को और मजबूत करेगा तथा अधिक सक्षम, नवाचार-आधारित और मरीज-केंद्रित वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उनके अनुसार, यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाने के साथ-साथ भारत को वैश्विक फार्मास्युटिकल नवाचार केंद्र के रूप में और मजबूत करेगा।
फार्मेक्सिल द्वारा आयोजित जीडीआरसी 2026 का मुख्य उद्देश्य भारत की दवा नियामक प्रणाली को और मजबूत बनाना है।
सम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि भारत एक ऐसी आधुनिक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप दवा नियामक व्यवस्था विकसित कर रहा है, जो स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार को गति देने के साथ-साथ मरीजों की सुरक्षा, गुणवत्ता और प्रभावशीलता के सर्वोच्च मानकों को भी सुनिश्चित करेगी।
वहीं, ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने कहा कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) अगले 18 महीनों के भीतर एंड-टू-एंड डिजिटल ड्रग रेगुलेटरी प्लेटफॉर्म का पहला चरण शुरू करेगा।
उन्होंने कहा कि यह पहल भारत की दवा नियामक प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी।
पीयूष गोयल ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि भारत अब तक 9 महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) कर चुका है, जिनके जरिए लगभग 60 ट्रिलियन डॉलर के वैश्विक बाजार तक पहुंच मिली है।
उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में देश के निर्यात में 73 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की व्यापार नीति में आया परिवर्तन निर्णायक नेतृत्व और प्रभावी नीतिगत फैसलों का परिणाम है।
--आईएएनएस
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