ITR Notice: समय पर आईटीआर भरने के बाद भी आ सकता टैक्स नोटिस, ये 3 गलतियां पड़ सकती हैं भारी
31 जुलाई की समयसीमा से पहले इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने के बाद भी टैक्स से जुड़ी परेशानी पूरी तरह खत्म नहीं होती। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके आईटीआर में दी गई जानकारी का मिलान बैंक, नियोक्ता और दूसरे स्रोतों से मिलने वाले डेटा से करता है। अगर दोनों जगह की जानकारी में अंतर मिलता है, तो विभाग आपसे स्पष्टीकरण मांग सकता है। ऐसे में समय पर ITR दाखिल करने के बावजूद टैक्स नोटिस आ सकता है।
ITR में बताई इनकम और विभाग के डेटा में अंतर
टैक्स नोटिस आने की सबसे बड़ी वजह आय से जुड़ी जानकारी में अंतर हो सकता है। उदाहरण के लिए, अगर ITR में बताई गई सैलरी और नियोक्ता के Form 16 में दर्ज रकम अलग है, तो विभाग सवाल पूछ सकता है।
इसी तरह एनुअल इंफॉर्मेशन सिस्टम यानी AIS में दिखाई गई आय और आईटीआर में घोषित आय में अंतर होने पर भी नोटिस आ सकता है। इसलिए ITR भरने से पहले फॉर्म 16, AIS और दूसरे आय संबंधी दस्तावेजों का मिलान करना जरूरी है।
TDS या TCS क्रेडिट में गड़बड़ी
टीडीएस और TCS की जानकारी में अंतर भी टैक्स नोटिस की वजह बन सकता। कई बार नियोक्ता या अन्य डिडक्टर ने TDS रिटर्न दाखिल नहीं किया हो या उसमें सुधार नहीं किया हो। ऐसे में टैक्सपेयर के रिकॉर्ड में सही जानकारी समय पर अपडेट नहीं होती। अगर आईटीआर में दावा किया गया TDS/TCS और फॉर्म 26AS में दिखाई देने वाली रकम अलग है, तो विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है।
गलत आयकर रिटर्न फॉर्म का इस्तेमाल करना, अधूरी जानकारी देना या दोषपूर्ण रिटर्न दाखिल करना भी परेशानी खड़ी कर सकता है। इसके अलावा ऐसी कर कटौती या कर छूट का दावा करना, जिसके समर्थन में जरूरी दस्तावेज नहीं हैं, विभाग की नजर में आ सकता है।
इसलिए धारा 80सी, मकान किराया भत्ता (एचआरए) या अन्य कर छूट का दावा करते समय संबंधित दस्तावेजों को सुरक्षित रखना जरूरी है।
कर नोटिस आए तो क्या करें?
सबसे पहले नोटिस की वास्तविकता आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर जांचें। इसके लिए स्थायी खाता संख्या (पैन) और दस्तावेज पहचान संख्या (डीआईएन) जैसी जानकारी की जरूरत पड़ सकती है। इसके बाद नोटिस को ध्यान से पढ़ें और पता करें कि विभाग ने किस वजह से जवाब मांगा है।
फिर फॉर्म 16, वार्षिक सूचना विवरण (एआईएस), फॉर्म 26एएस और अन्य जरूरी दस्तावेज जुटाकर तय समयसीमा के भीतर जवाब दें। अगर आयकर रिटर्न में कोई गलती या कमी है, तो कुछ मामलों में संशोधित रिटर्न दाखिल करके उसे ठीक करना पड़ सकता है।
(प्रियंका कुमारी)
Imran Khan Death Rumour: इमरान खान की मौत का दावा या अफवाह? पाकिस्तानी पत्रकार के खुलासे से जेल से लेकर सड़क तक हड़कंप
पाकिस्तानी पत्रकार वजाहत सईद खान ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो जारी कर सनसनीखेज दावा किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सेना के तीन उच्च पदस्थ सूत्रों ने उनसे बातचीत में यह आशंका व्यक्त की है कि रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद पूर्व पीएम इमरान खान अब जीवित नहीं हैं।
पत्रकार ने हालांकि तुरंत यह स्पष्टीकरण भी दिया कि न तो उन्होंने और न ही उनके सूत्रों ने खुद इमरान खान को मृत देखा है। यह दावा केवल सैन्य अधिकारियों की आशंकाओं पर आधारित है, लेकिन इसके बावजूद इस खबर ने पूरे पाकिस्तान में हड़कंप मचा दिया है।
Senior Pakistani journalist Wajahat S. Khan claims three senior army officers fear former PM Imran Khan may be dead in prison - YouTube video post pic.twitter.com/tbfxcxzGv8
— NextMinute News (@nextminutenews7) August 12, 2026
मुलाकात पर लंबे समय से पाबंदी, परिजनों और वकीलों का बढ़ा शक
इमरान खान की सेहत को लेकर अफवाहों को हवा मिलने का सबसे बड़ा कारण जेल प्रशासन का रवैया बना हुआ है। इमरान की बहनों और पीटीआई के शीर्ष नेताओं का आरोप है कि उन्हें पिछले कई हफ़्तों से अदियाला जेल में पूर्व प्रधानमंत्री से मिलने की इजाजत नहीं दी जा रही है। अदालत के स्पष्ट आदेशों के बावजूद बार-बार मुलाकात टालने से परिवार और समर्थकों के मन में इमरान खान की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंकाएं पैदा हो गई हैं।
पीटीआई का उग्र आंदोलन का ऐलान, लाखों समर्थकों को तैयार रहने का संदेश
पत्रकार के दावे और जेल में सस्पेंस के बाद पीटीआई नेतृत्व ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी नेताओं ने सरकार और जेल प्रशासन से तत्काल इमरान खान का वीडियो संदेश जारी करने या उनके वकीलों-परिजनों को सीधी मुलाकात कराने की मांग की है। पीटीआई की ओर से चेतावनी जारी की गई है कि यदि इमरान खान की सलामती का पुख्ता सबूत नहीं दिया गया, तो लाखों कार्यकर्ता रावलपिंडी और इस्लामाबाद का घेराव करेंगे और इसके लिए प्रशासन सीधे तौर पर जिम्मेदार होगा।
सरकार और जेल प्रशासन पर गहराया संकट, पहले भी उड़ चुकी हैं अफवाहें
यह पहली बार नहीं है जब इमरान खान की हिरासत में मौत या गंभीर बीमारी की खबरें वायरल हुई हैं। इससे पहले भी सोशल मीडिया पर फर्जी दस्तावेज और अफवाहें उड़ी थीं, जिस पर अदियाला जेल प्रशासन को सफाई देनी पड़ी थी। हालांकि, इस बार पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व और शहबाज शरीफ सरकार पर विपक्षी दलों का भारी दबाव है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार ने जल्द ही इस मामले में पारदर्शिता नहीं दिखाई, तो स्थिति हाथ से निकल सकती है।
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