24 घंटे की नॉन-स्टॉप फ्लाइट? प्लेन तो तैयार है, पर आपका शरीर?
क्या आप 24 घंटे तक बिना जमीन पर उतरे एक प्रेशराइज्ड हवाई जहाज में बंद रह सकते हैं? एयरबस के एक नए रिकॉर्ड-ब्रेकिंग टेस्ट फ्लाइ ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक 20,000 किलोमीटर की दूरी (यानी पृथ्वी का आधा चक्कर) एक सांस में तय कर सकती है. लेकिन इस लंबी उड़ान में सबसे बड़ा खतरा प्लेन के इंजनों को नहीं, बल्कि इंसानी शरीर को है! इस वीडियो में जानिए कि 24 घंटे की नॉन-स्टॉप फ्लाइट के दौरान हमारे बायोलॉजिकल सिस्टम पर क्या-क्या अटैक होते हैं. Could you stay confined in a pressurized aircraft for 24 hours without landing? A new record-breaking test flight by Airbus has proven that modern technology can cover a distance of 20,000 kilometers halfway around the Earth in a single stretch. Yet, the greatest danger during this long-haul flight lies not with the plane's engines, but with the human body! Find out in this video how our biological systems are affected during a 24-hour non-stop flight.
NPS में Active Choice या ऑटो चॉइस: फैसला लेने से पहले इन 3 बातों का रखें ध्यान
नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस में निवेश करने वालों के सामने एक अहम फैसला यह होता है कि उनकी जमा रकम किस तरह निवेश की जाए। इसके लिए एनपीएस में मुख्य रूप से एक्टिव चॉइस और ऑटो चॉइस का विकल्प मिलता है। एक्टिव चॉइस में निवेशक खुद तय करता है कि पैसा इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड और सरकारी प्रतिभूतियों जैसे एसेट क्लास में कितना रखा जाए।
वहीं, ऑटो चॉइस में उम्र और रिटायरमेंट के करीब आने के हिसाब से निवेश का अनुपात अपने आप बदलता रहता है। इसलिए विकल्प चुनते समय कुछ जरूरी बातों को समझना चाहिए।
पहले अपनी जोखिम लेने की क्षमता समझें
एक्टिव चॉइस उन निवेशकों के लिए ज्यादा उपयुक्त हो सकता है जिन्हें बाजार और अलग-अलग निवेश विकल्पों की अच्छी समझ है। इसमें निवेशक तय कर सकता है कि उसके पोर्टफोलियो में इक्विटी का कितना हिस्सा रहे। नियमों के तहत इक्विटी में 75% तक निवेश का विकल्प मिल सकता है। ज्यादा इक्विटी का मतलब लंबे समय में अधिक रिटर्न की संभावना है, लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव का जोखिम भी ज्यादा रहता है।
ऑटो चॉइस उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है जो निवेश का फैसला बार-बार खुद नहीं लेना चाहते। इसमें लाइफसाइकिल फंड के तहत इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड और सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश का अनुपात उम्र के साथ अपने आप बदलता है।
उम्र और निवेश की अवधि का रखें ध्यान
एनपीएस में लंबी निवेश अवधि युवा निवेशकों के लिए बड़ा फायदा हो सकती है। 20 और 30 की उम्र में निवेश शुरू करने वालों के पास बाजार के उतार-चढ़ाव को सहने और लंबे समय में इक्विटी से ग्रोथ हासिल करने का अधिक समय होता है। ऐसे निवेशक एक्टिव चॉइस के जरिए अपेक्षाकृत ज्यादा इक्विटी एक्सपोजर बनाए रख सकते हैं।
वहीं 40 के आखिरी वर्षों और 50 की उम्र के निवेशकों के लिए रिटायरमेंट का समय नजदीक होता है। ऐसे में ऑटो चॉइस धीरे-धीरे ज्यादा जोखिम वाली इक्विटी से पैसा निकालकर सरकारी प्रतिभूतियों और कॉरपोरेट डेट जैसे अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले विकल्पों की ओर निवेश बढ़ाता है। इसका उद्देश्य रिटायरमेंट के करीब बाजार में बड़ी गिरावट से जमा रकम को बचाना है।
कितना समय दे सकते हैं, यह भी जरूरी
अगर आप अपने निवेश की नियमित निगरानी कर सकते हैं और समय-समय पर एसेट का संतुलन समझना चाहते हैं, तो एक्टिव चॉइस पर विचार किया जा सकता है। इसके लिए निवेशक को अपने लक्ष्य और जोखिम के हिसाब से पोर्टफोलियो पर नजर रखनी होती है। व्यस्त नौकरी करने वाले या कम अनुभव वाले निवेशकों के लिए ऑटो चॉइस आसान विकल्प हो सकता है।
एनपीएस में दोनों विकल्पों के तहत निवेश का तरीका बदलने की सुविधा भी है। टियर-1 और टियर-2 में वित्त वर्ष के दौरान चार बार निवेश विकल्प बदला जा सकता है। नियमों के अनुसार सब्सक्राइबर अपना पेंशन फंड मैनेजर भी बदल सकते हैं। इसलिए फैसला अपनी उम्र, जोखिम क्षमता, लक्ष्य और निवेश की निगरानी के लिए उपलब्ध समय को देखकर लेना चाहिए।
(प्रियंका कुमारी)
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