छात्र आंदोलन का श्रेय, राम मंदिर चंदा चोरी... कांग्रेस की CWC बैठक में किन किन मुद्दों पर हुई बात?
Congress CWC Meeting: अगले साल 7 राज्यों में चुनाव से पहले कांग्रेस ने दिल्ली में बुधवार को बड़ी बैठक बुलाई. दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक हुई. इस दौरान हाल में हुए घटनाक्रम पर कांग्रेस ने विस्तार से चर्चा की.
कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने कहा कि आज हमने कांग्रेस वर्किंग कमेटी की एक विस्तृत बैठक की, जिसमें CWC सदस्य, स्थायी आमंत्रित सदस्य, विशेष आमंत्रित सदस्य और हमारे चार मुख्यमंत्री शामिल हुए. बैठक में 88 से ज्यादा लोग मौजूद थे. चर्चा में 33 लोगों ने हिस्सा लिया, जिनमें मुख्यमंत्री और वर्किंग कमेटी के वरिष्ठ सदस्य शामिल थे. जैसा कि जयराम रमेश ने सही कहा, आज हमारा ध्यान 3-4 अहम मुद्दों पर है.
#WATCH | Delhi: Congress General Secretary (Organisation) KC Venugopal says, "Today we had a detailed meeting of the Congress Working Committee with CWC members, permanent invitees, special invitees, along with our four Chief Ministers. More than 88 people attended the meeting.… pic.twitter.com/zgKltrd7re
— ANI (@ANI) August 19, 2026
खबर अपडेट की जा रही है...
'विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, साथ चल सकते हैं', उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने IFS अधिकारियों को किया संबोधित
Vice President Radhakrishnan: उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन बुधवार को उत्तराखंड दौरे पर रहे. इस दौरान उन्होंने भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारियों से विकास और संरक्षण के बीच बेहतर संतुलन बनाने का आह्वान किया. उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ा जा सकता है।
उपराष्ट्रपति ने बुधवार को देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) में भारतीय वन सेवा के 2025-27 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों और प्रशिक्षण ले रहे रॉयल भूटान फॉरेस्ट सर्विस के अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि आने वाले महत्वपूर्ण दशकों में देश के जंगलों, वन्यजीवों, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों की जिम्मेदारी इन अधिकारियों के कंधों पर होगी। उन्होंने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में वन सेवा की महत्वपूर्ण भूमिका है। देश की पर्यावरणीय सुरक्षा मजबूत करने और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने में वन अधिकारियों का योगदान अहम होगा।
संरक्षण और विकास के बीच बनाएं संतुलन
सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि अधिकारियों को पर्यावरण संरक्षण और विकास, पर्यावरण सुरक्षा और लोगों की आजीविका के साथ-साथ वर्तमान जरूरतों और आने वाली पीढ़ियों के हितों के बीच संतुलन बनाकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी संस्था या देश की सफलता केवल किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि से नहीं, बल्कि पूरी टीम के सामूहिक प्रयास से होती है। वन अधिकारियों को जंगलों के आसपास पीढ़ियों से रहने वाले समुदायों के पारंपरिक ज्ञान और अनुभव का भी सम्मान करना चाहिए।
ईमानदारी से समझौता नहीं
उपराष्ट्रपति ने सार्वजनिक सेवा में ईमानदारी को सबसे जरूरी बताते हुए कहा कि ईमानदारी से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। कठिन परिस्थितियों में फैसले लेते समय संविधान, कानून, विज्ञान और व्यापक जनहित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे देश और दुनिया में अपनाई जा रही बेहतर व्यवस्थाओं को समझें, लेकिन उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लागू करें।
जंगलों की निगरानी में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाएं
उपराष्ट्रपति ने वन प्रबंधन में तकनीक की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के वन अधिकारियों को रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा आधारित तकनीकों का इस्तेमाल करना चाहिए। हालांकि, तकनीक के साथ जमीनी अनुभव, सही निर्णय लेने की क्षमता और स्थानीय लोगों के प्रति संवेदनशीलता भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक वैज्ञानिक वन प्रबंधन और भारत का सदियों पुराना पारंपरिक ज्ञान एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों के बेहतर तालमेल से देश के सतत विकास का रास्ता मजबूत होगा।
मौजूदा बैच में 17 फीसदी महिलाएं
उपराष्ट्रपति ने वन सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी सकारात्मक बदलाव बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा बैच में करीब 17 फीसदी महिलाएं हैं। उन्होंने इसे नारी शक्ति का उदाहरण बताते हुए इस बदलाव का स्वागत किया।
पद से नहीं, काम से मापें अपना करियर
प्रशिक्षु अधिकारियों को सलाह देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें अपने करियर का आकलन सिर्फ इस आधार पर नहीं करना चाहिए कि उन्हें कौन सा पद मिला। बल्कि यह देखना चाहिए कि उन्होंने कितने जंगलों को बचाया और बहाल किया, कितने वन्यजीवों की रक्षा की और जंगलों पर निर्भर समुदायों का कितना भरोसा जीता। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी विरासत छोड़ने के उद्देश्य से काम करें और हमेशा 'राष्ट्र प्रथम' के सिद्धांत को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। कार्यक्रम में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, आईजीएनएफए के निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद, कोर्स डायरेक्टर अजीता लोंगजाम समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation







