दरभंगा में युवक की हत्या से सनसनी, घर से बुलाकर सीने और गले में गोली मारी
दरभंगा जिले के कमतौल में मंगलवार रात एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। परिजन ने आरोप लगाया कि कुछ युवक उसे रात में घर से बुलाकर ले गए थे। उसके बाद उसका सड़क पर शव पड़ा मिला।
26 साल से जेल में बंद दारा सिंह की सजा में छूट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, समीक्षा बोर्ड से कहा- मामले को लंबा न खींचे
दारा सिंह की सजा में छूट की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी ली.
सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह बात आई कि दारा सिंह पिछले करीब 26 साल से जेल में बंद है. उसकी सजा में छूट के मामले पर सजा समीक्षा बोर्ड को फैसला लेना है, लेकिन अभी तक बोर्ड की ओर से कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. कोर्ट ने इस देरी को गंभीरता से लिया और अधिकारियों से जल्द कार्रवाई करने को कहा.
पीठ ने कहा कि किसी कैदी की सजा में छूट के मामले पर विचार करने के लिए तय प्रक्रिया है और संबंधित बोर्ड को उसी प्रक्रिया के तहत समय पर फैसला लेना चाहिए. अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि इस मामले में जेल विभाग की रिपोर्ट भी अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गई है. रिपोर्ट के बिना बोर्ड की पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ना मुश्किल है.
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सजा समीक्षा बोर्ड से कहा कि वह मामले को और लंबा न खींचे और जल्द अपना फैसला ले. कोर्ट ने साफ किया कि पहले संबंधित प्राधिकरण को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी. अगर वहां से समय पर फैसला नहीं आता है तो अदालत को खुद इस मामले में फैसला लेना पड़ सकता है.
देरी को लेकर पीठ ने कड़ा रुख अपनाया
सुनवाई के दौरान पीठ ने देरी को लेकर कड़ा रुख अपनाया. कोर्ट ने कहा कि वह इस तरह की स्थिति को बर्दाश्त नहीं कर सकता. अदालत की टिप्पणी से साफ था कि वह सजा में छूट के आवेदन को लंबे समय तक लंबित रखे जाने से संतुष्ट नहीं है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल दारा सिंह की सजा में छूट को लेकर कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है. अदालत ने राज्य सजा समीक्षा बोर्ड को पहले मामले पर फैसला लेने का मौका दिया है. साथ ही संबंधित रिपोर्ट और दस्तावेज जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अगली सुनवाई में स्थिति साफ हो सके.
सजा में छूट का मतलब यह नहीं होता कि किसी कैदी को अपने आप रिहाई का अधिकार मिल जाता है. ऐसे मामलों में संबंधित नियमों के तहत कैदी के आचरण, जेल में बिताई गई अवधि और अन्य जरूरी पहलुओं पर विचार किया जाता है. इसके बाद सक्षम प्राधिकरण तय करता है कि सजा में छूट दी जा सकती है या नहीं.
दारा सिंह का मामला लंबे समय से अदालत के सामने है. अब सुप्रीम कोर्ट की नजर इस बात पर है कि सजा समीक्षा बोर्ड इस मामले में क्या फैसला लेता है और जेल विभाग की रिपोर्ट में क्या जानकारी सामने आती है. कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 2 सितंबर 2026 की तारीख तय की है. उस दिन बोर्ड की ओर से की गई कार्रवाई और उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट मामले को आगे सुनेगा. फिलहाल अदालत ने राज्य सजा समीक्षा बोर्ड को जल्द फैसला लेने का स्पष्ट निर्देश दिया है.
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