Responsive Scrollable Menu

उत्तराखंड में महिला शक्ति के सम्मान को बढ़ावा, तीलू रौतेली पुरस्कार की राशि 51 से बढ़कर ₹75 हजार

Uttarakhand News: उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश की महिलाओं के सम्मान और उनके योगदान को प्रोत्साहित करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीरांगना तीलू रौतेली पुरस्कार और आंगनबाड़ी कार्यकर्ती पुरस्कार की सम्मान राशि बढ़ाने की घोषणा की है. सरकार के इस फैसले को प्रदेश की उन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतर काम कर समाज और राज्य के विकास में योगदान दे रही हैं.

मुख्यमंत्री के मुताबिक, वीरांगना तीलू रौतेली पुरस्कार की सम्मान राशि अब 51 हजार रुपये से बढ़ाकर 75 हजार रुपये की जाएगी. इसी तरह आंगनबाड़ी कार्यकर्ती पुरस्कार की राशि भी 51 हजार रुपये से बढ़ाकर 61 हजार रुपये की जाएगी. सरकार का मानना है कि पुरस्कार राशि में यह बढ़ोतरी महिलाओं को उनके काम के लिए सम्मान देने के साथ-साथ उन्हें आगे भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करेगी.

महिलाओं के योगदान को सम्मान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह निर्णय प्रदेश की महिला शक्ति के समर्पण, संघर्ष और उत्कृष्ट योगदान को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. उत्तराखंड में महिलाओं की भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है. पहाड़ से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक महिलाएं परिवार, समाज और आर्थिक गतिविधियों में अहम योगदान देती हैं. ऐसे में सरकार की ओर से पुरस्कार राशि बढ़ाने का फैसला महिलाओं के काम को पहचान देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. खास तौर पर उन महिलाओं के लिए यह प्रोत्साहन महत्वपूर्ण है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने क्षेत्र में लगातार काम कर रही हैं.

यह भी पढ़ें: भूस्खलन प्रबंधन मॉडल से उत्तराखंड की कमाई शुरू, बाहरी राज्य की परियोजना से मिला 4.21 लाख राजस्व

 

तीलू रौतेली के नाम पर पुरस्कार

वीरांगना तीलू रौतेली उत्तराखंड के इतिहास में साहस और वीरता की प्रतीक मानी जाती हैं. उनके नाम पर दिया जाने वाला पुरस्कार प्रदेश की उन महिलाओं को सम्मानित करने के लिए है, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम किया है. सम्मान राशि को 51 हजार से बढ़ाकर 75 हजार रुपये करने से इस पुरस्कार की अहमियत और बढ़ेगी. इससे पुरस्कार पाने वाली महिलाओं को आर्थिक प्रोत्साहन भी मिलेगा और उनके काम को समाज के सामने पहचान मिलेगी. सरकार का उद्देश्य केवल पुरस्कार देना नहीं, बल्कि महिलाओं को यह संदेश देना भी है कि उनके योगदान को गंभीरता से देखा और सम्मानित किया जा रहा है. इससे दूसरी महिलाओं को भी अपने क्षेत्र में बेहतर काम करने की प्रेरणा मिल सकती है.

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए भी बढ़ी राशि

आंगनबाड़ी कार्यकर्तियां भी ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. बच्चों के पोषण, प्रारंभिक देखभाल और महिलाओं से जुड़े कई सामाजिक कार्यक्रमों को जमीन पर पहुंचाने में इनकी भूमिका अहम रहती है. उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दुर्गम क्षेत्रों में भी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। ऐसे में उनके लिए पुरस्कार राशि को 51 हजार से बढ़ाकर 61 हजार रुपये करना उनके काम के प्रति सम्मान का संकेत है.

प्रोत्साहन से बढ़ेगा उत्साह

सरकार के इस फैसले का एक बड़ा उद्देश्य महिलाओं में काम के प्रति उत्साह बढ़ाना भी है. जब किसी व्यक्ति के अच्छे काम को सार्वजनिक रूप से सम्मान मिलता है तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है. साथ ही दूसरे लोग भी उससे प्रेरणा लेते हैं. मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि महिलाओं का सम्मान केवल एक पुरस्कार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में उनके योगदान को पहचान देने का माध्यम है. पुरस्कार राशि बढ़ाने के फैसले से सरकार की महिला-केंद्रित सोच भी सामने आती है.

महिलाओं को आगे बढ़ने का मिल सकता है प्रोत्साहन 

उत्तराखंड में बड़ी संख्या में महिलाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सेवा, स्वरोजगार, खेल, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों में काम कर रही हैं. सरकार की ओर से ऐसे प्रयासों को सम्मान मिलने से इन क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं को आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिल सकता है.

कुल मिलाकर, वीरांगना तीलू रौतेली पुरस्कार और आंगनबाड़ी कार्यकर्ती पुरस्कार की राशि में बढ़ोतरी केवल आर्थिक वृद्धि नहीं है. यह उन महिलाओं के योगदान को सम्मान देने का प्रयास है, जो अपने काम से समाज को मजबूत बनाने में भूमिका निभा रही हैं. सरकार को उम्मीद है कि इस तरह के प्रोत्साहन से प्रदेश की महिलाएं और अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेंगी और उत्तराखंड के विकास में अपनी भागीदारी को और मजबूत करेंगी.

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड की 104 हेल्थ हेल्पलाइन लोगों के लिए बनी वरदान, जो खुद करती है मरीजों को ट्रैक

 

Continue reading on the app

Shubman Gill ने Manav Suthar को बताया 'Team India का भविष्य', Galle में जीता दिल

भारत ने गाले में खेले गए अपने 600वें टेस्ट मैच में श्रीलंका पर 165 रनों से जीत हासिल की। ​​कप्तान शुभमन गिल ने स्पिनर मानव सुथार की तारीफ़ की, जिन्होंने मैच जिताने वाला प्रदर्शन करते हुए दस विकेट लिए। गिल ने सुथार को एक होनहार ऑलराउंडर बताया जो "लंबे समय तक भारत के लिए खेल सकते हैं"। सुथार के दस विकेट श्रीलंका की ज़मीन पर किसी भारतीय खिलाड़ी का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था और जीत में इनकी अहम भूमिका रही।
 

इसे भी पढ़ें: IND vs SL Test: Galle में भारत की Sri Lanka पर बड़ी जीत, Manav Suthar ने 6 विकेट से ढाया कहर


स्पिन के दिग्गज खिलाड़ी हरभजन सिंह और रविचंद्रन अश्विन का ज़िक्र करते हुए गिल ने कहा कि अपने देश के लिए 600वां टेस्ट मैच जीतना वाकई बहुत खास है। यह हमारे लिए बहुत संतोषजनक जीत रही। मुझे लगता है कि हम अच्छी स्थिति में थे। लेकिन यहाँ आने के बाद, मौसम की वजह से मैच होगा या नहीं, इसे लेकर थोड़ी अनिश्चितता थी, जिससे हम पर थोड़ा दबाव बना। फिर भी, मुझे लगता है कि टीम ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया।

दूसरी पारी में बल्लेबाजी के लड़खड़ाने पर बात करते हुए, जब भारत 193 रन पर ऑल आउट हो गया था, उन्होंने बताया कि टीम का लक्ष्य लगभग 400 रनों की बढ़त हासिल करना था। उन्होंने कहा कि हम तीसरी पारी में थोड़ा और आक्रामक होकर खेलना चाहते थे क्योंकि हमें (आखिरी पारी के लिए) उतने ओवर चाहिए थे, और हमें पक्का नहीं पता था कि चौथे और पांचवें दिन हम कितने ओवर गेंदबाजी कर पाएंगे। तो, हमारी सोच यही थी। और इसी कोशिश में हमने शुरुआत में ही कुछ विकेट गंवा दिए। लेकिन मुझे लगता है कि कुल मिलाकर हम फिर भी अच्छी स्थिति में थे।
 

इसे भी पढ़ें: David Warner के बाद Australia की सलामी जोड़ी पर संकट, Matt Renshaw लौटे और Labuschagne के लिए बढ़ी मुश्किलें


गिल ने देवदत्त पडिक्कल की भी तारीफ़ की, जिन्होंने पहली पारी में 167 और दूसरी पारी में 44 रन बनाए और 'प्लेयर ऑफ़ द मैच' का अवॉर्ड जीता। कप्तान ने कहा कि उन्हें खेलते हुए देखना शानदार था। शतक लगाना ज़रूरी है, लेकिन शतक बनाने के बाद भी... उन्होंने बड़ी पारी खेली। एक कॉम्पिटिटिव मैच में और आरामदायक स्थिति में होने के बावजूद... जिस तरह से उन्होंने दूसरी पारी में बैटिंग की और दबदबा बनाया, वह देखने लायक था। जीत के महत्व पर बात करते हुए गिल ने कहा कि टेस्ट मैच जीतना आसान नहीं होता और यह जीत बहुत सुखद है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फ़ाइनल में खेलना ही सबसे बड़ा लक्ष्य है।
 
 For more updates and in-depth coverage on cricket, visit Cricket News in Hindi at Prabhasakshi.

Continue reading on the app

  Sports

बेंगलुरु नहीं अब Chennai में होगा Duleep Trophy Final, BCCI ने क्रिकेट फैंस के लिए लिया बड़ा फैसला

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने टूर्नामेंट के फाइनल मुकाबले का आयोजन स्थल बदलने का फैसला किया है। अब दलीप ट्रॉफी का फाइनल बेंगलुरु के बजाय चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेला जाएगा। यह मुकाबला 6 सितंबर से शुरू होगा और पांच दिनों तक चलेगा।

बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने बताया कि बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल मुकाबले तय कार्यक्रम के अनुसार खेले जाएंगे, लेकिन इन मैचों को देखने के लिए आम दर्शकों को मैदान में प्रवेश नहीं दिया जा सकेगा। इसके पीछे सरकारी प्रतिबंधों को वजह बताया गया है। ऐसे में बोर्ड ने फाइनल को चेन्नई ट्रांसफर करने का फैसला किया है, ताकि क्रिकेट प्रशंसक स्टेडियम में बैठकर देश के शीर्ष खिलाड़ियों को खेलते हुए देख सकें।

सैकिया के मुताबिक, बेंगलुरु के उत्कृष्टता केंद्र में दो क्वार्टर फाइनल और दो सेमीफाइनल मुकाबले आयोजित किए जाएंगे। हालांकि, वहां आम लोगों के लिए प्रवेश की अनुमति नहीं होने के कारण फाइनल के आयोजन स्थल में बदलाव किया गया है। चेन्नई का एमए चिदंबरम स्टेडियम देश के प्रमुख क्रिकेट मैदानों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, दलीप ट्रॉफी का इस बार का आयोजन 23 अगस्त से शुरू होगा। यह अंतर-क्षेत्रीय लाल गेंद वाला बहुदिवसीय टूर्नामेंट है, जिसमें देश के अलग-अलग क्षेत्रों की टीमें हिस्सा लेंगी। शुरुआती चरण में दो क्वार्टर फाइनल एक साथ खेले जाएंगे। पहले मुकाबले में पूर्व क्षेत्र का सामना पूर्वोत्तर क्षेत्र से होगा, जबकि दूसरे क्वार्टर फाइनल में उत्तर क्षेत्र और पश्चिम क्षेत्र आमने-सामने होंगे।

क्वार्टर फाइनल मुकाबले चार-चार दिन के होंगे और इनकी शुरुआत 23 अगस्त से होगी। इसके बाद दोनों सेमीफाइनल मुकाबले 30 अगस्त से शुरू होंगे। इन मुकाबलों के बाद फाइनल के लिए दोनों विजेता टीमें चेन्नई पहुंचेंगी। फाइनल छह सितंबर से खेला जाएगा और यह पांच दिन का मुकाबला होगा।

गौरतलब है कि दलीप ट्रॉफी में देश के कई प्रमुख और उभरते हुए क्रिकेटरों को लाल गेंद के प्रारूप में खुद को साबित करने का मौका मिलता है। घरेलू क्रिकेट का यह टूर्नामेंट भारतीय टीम के लिए भी प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करने का महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। खास तौर पर टेस्ट क्रिकेट के लिए खिलाड़ियों की तैयारी में ऐसे मुकाबलों की अहम भूमिका रहती है।

बीसीसीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि टूर्नामेंट के सभी मुकाबलों का सीधा प्रसारण इंटरनेट के माध्यम से किया जाएगा। वहीं कुछ चुनिंदा मैचों को टेलीविजन पर भी दिखाया जाएगा। इनमें फाइनल मुकाबला भी शामिल है, जिससे मैदान पर मौजूद दर्शकों के अलावा देशभर के क्रिकेट प्रशंसक भी मुकाबले देख सकेंगे।

बता दें कि मध्य क्षेत्र दलीप ट्रॉफी का मौजूदा विजेता है। उसने पिछले साल के फाइनल में दक्षिण क्षेत्र को हराकर खिताब अपने नाम किया था। अब उसकी नजर एक बार फिर ट्रॉफी बचाने पर होगी, जबकि बाकी क्षेत्र उसे चुनौती देने के लिए मैदान में उतरने वाले हैं।
Wed, 19 Aug 2026 20:57:00 +0530

  Videos
See all

ChakraView | Sumit Awasthi | Vande Mataram |कितना वंदे मातरम् गाया जाए...कांग्रेस नहीं मानेगी कानून? #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-19T15:40:37+00:00

ChakraView: ट्रेन में यात्रा करने वालों के लिए बहुत बड़ी और डराने वाली खबर.. | Indian Railways #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-19T15:42:04+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers