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JK के लिए उठाए गए कदम सराहनीय': अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने ट्रैवल एडवाइजरी में ढील देने के दिए संकेत

US envoy Sergio Gor Jammu-Kashmir Visit: भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी यात्रा चेतावनियों (ट्रैवल वार्निंग्स) की समय-समय पर समीक्षा करता है। हालांकि उन्होंने आज यहां कोई बड़ी घोषणा तो नहीं की, लेकिन यह स्पष्ट किया कि इस पर विचार किया जाएगा।

राजदूत ने माना कि नई दिल्ली और यहां की सरकार ने इस क्षेत्र को सुरक्षित और संरक्षित बनाने की दिशा में बेहद सराहनीय कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इसी के मद्देनजर इस बात पर विचार किया जाएगा कि अमेरिका द्वारा अनुशंसित ट्रैवल वार्निंग को डाउनग्रेड (कम) किया जाना चाहिए या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि यह एक बेहद खूबसूरत इलाका है और अमेरिका के कई नागरिक यहां की सुंदरता और अवसरों का आनंद उठाना चाहेंगे।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा?
इस मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, "आज श्रीनगर में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करके मुझे बहुत प्रसन्नता हुई। हमने जम्मू-कश्मीर और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जुड़ाव को व्यापक और गहरा करने की संभावनाओं पर बहुत अच्छी बातचीत की, विशेष रूप से पर्यटन, बागवानी और नई अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में। मैं इस जुड़ाव को जारी रखने और हमारी बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हूं।"

महबूबा मुफ्ती ने ट्रैवल एडवाइजरी वापस लेने की की थी मांग
इससे पहले दिन में, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अमेरिकी राजदूत से कश्मीर आने पर लगाई गई उच्चतम स्तर की यात्रा सलाह (ट्रैवल एडवाइजरी) की समीक्षा करने और उसे वापस लेने का आग्रह किया था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिए उन्होंने कहा था कि कश्मीर में हजारों परिवार अपनी आजीविका के लिए पर्यटन पर निर्भर हैं, और यह एडवाइजरी केवल एक चेतावनी नहीं बल्कि "कश्मीर और दुनिया के बीच एक दीवार" की तरह है।

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि इस एडवाइजरी को हटाना आत्मविश्वास का एक मजबूत संदेश भेजेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की वापसी में मदद मिलेगी और उन अनगिनत परिवारों को बहुत जरूरी राहत मिलेगी जिनकी रोजी-रोटी पूरी तरह से पर्यटन पर टिकी हुई है।

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Cabinet Mega Approval: रेल और सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 13,000 करोड़ से अधिक की मंजूरी; मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला

देश के आर्थिक विकास को गति देने और 'पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान' के तहत मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार ने बुनियादी ढांचे में बड़ा निवेश किया है। लॉजिस्टिक्स लागत को घटाने, औद्योगिक कॉरिडोर को बंदरगाहों से जोड़ने और यात्री ट्रेनों के समयबद्ध संचालन के लिए रेल नेटवर्क के मल्टी-ट्रैकिंग और आधुनिक राजमार्गों के विस्तार की आवश्यकता लंबे समय से थी।

इसी रणनीति के तहत केंद्रीय कैबिनेट ने पूर्वी भारत, दक्षिणी राज्यों और भारत-नेपाल सीमावर्ती इलाकों के लिए कई बड़ी इंफ्रा परियोजनाओं पर अंतिम मुहर लगाई है।

ओडिशा, बंगाल और दक्षिण भारत में तीसरी और चौथी रेल लाइन की मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में रेल नेटवर्क के विस्तार और भारी ट्रैफिक वाले रेल मार्गों पर कंजेशन घटाने के लिए प्रमुख मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इसके तहत पश्चिम बंगाल और ओडिशा के बीच खड़गपुर-भद्रक (रणिताल) चौथी लाइन परियोजना 3,352 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगी। इसी क्रम में भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन के विस्तार पर 1,583 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

वहीं दक्षिण भारत में कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए गुम्मडिपूंडी-गुडूर के बीच तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण पर 2,229 करोड़ रुपये का निवेश होगा।

पारादीप पोर्ट कनेक्टिविटी और माल ढुलाई क्षमता में बड़ा इजाफा
ओडिशा के प्रमुख औद्योगिक और तटीय क्षेत्रों को मजबूती देने के लिए कटक-पारादीप रेल खंड पर तीसरी और चौथी लाइन परियोजना को 2,286 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जाएगा। इस परियोजना से पारादीप बंदरगाह तक कोयला, कच्चा माल और औद्योगिक उत्पादों की आवाजाही बेहद सुगम होगी।

रेलवे लाइनों के इस चौगुनीकरण और मल्टी-ट्रैकिंग से मालगाड़ियों की औसत गति में उल्लेखनीय सुधार होगा और बंदरगाहों से अंतर्देशीय बाजारों तक माल ढुलाई की लागत में बड़ी कमी आएगी।

बिहार में मुजफ्फरपुर से सोनबरसा तक 3,591 करोड़ से बनेगा 4-लेन हाईवे
सड़क परिवहन के मोर्चे पर कैबिनेट ने बिहार में मुजफ्फरपुर से सीतामढ़ी होते हुए सोनबरसा (भारत-नेपाल सीमा) तक चार-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण को स्वीकृति प्रदान की है। इस रणनीतिक सड़क परियोजना पर कुल 3,591 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

यह फोर-लेन कॉरिडोर उत्तर बिहार के सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने के साथ-साथ भारत और नेपाल के बीच सीमा पार व्यापार और धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

लाखों नए रोजगार और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा
पीएम गति शक्ति के तहत स्वीकृत ये परियोजनाएं न केवल विभिन्न राज्यों के बीच निर्बाध यात्रा सुनिश्चित करेंगी, बल्कि निर्माण और संचालन के दौरान लाखों मानव-दिवस के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर भी पैदा करेंगी। इसके अतिरिक्त, सड़क से रेल मार्ग पर माल ढुलाई के शिफ्ट होने से ईंधन की भारी बचत होगी और देश के कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी, जो भारत के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों को हासिल करने में मददगार साबित होगा।

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